चुनाव आयोग का सख्त एक्शन: पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, गृह सचिव, DGP और कोलकाता पुलिस कमिश्नर हटाये गये
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद चुनाव आयोग ने बड़ा प्रशासनिक एक्शन लेते हुए मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को पद से हटा दिया। निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने तुरंत नई नियुक्तियां भी कर दीं।
नई दिल्ली/कोलकाता(Threesocieties.com Desk): पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही Election Commission of India पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। चुनाव आचार संहिता लागू होने के कुछ ही घंटों के भीतर आयोग ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर समेत कई शीर्ष अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया है।
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मुख्य सचिव और गृह सचिव को हटाया गया
चुनाव आयोग की इस त्वरित कार्रवाई को निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।निर्वाचन आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव Nandini Chakraborty को पद से हटाते हुए उनकी जगह वरिष्ठ आईएएस अधिकारी Dushyant Nariala को नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है।

वहीं गृह सचिव Jagdish Prasad Meena की जगह Sanghamitra Ghosh को गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग की नई प्रधान सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया है कि नई नियुक्तियां तुरंत प्रभाव से लागू की जाएं और राज्य सरकार सोमवार दोपहर तक अनुपालन रिपोर्ट भेजे।
बंगाल पुलिस की कमान नए DGP के हाथ
इसके कुछ ही समय बाद आयोग ने पुलिस महकमे में भी बड़ा फेरबदल किया। राज्य के कार्यवाहक डीजीपी Piyush Pandey को हटाकर Siddh Nath Gupta को पश्चिम बंगाल का नया पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया गया है। इसके अलावा कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले एडीजी के पद पर Ajay Ranade को नियुक्त किया गया है, जबकि जेल विभाग के डीजी पद पर N Ramesh Babu को तैनात किया गया है।
कोलकाता पुलिस कमिश्नर भी बदले
प्रशासनिक सर्जरी यहीं नहीं रुकी। आयोग ने Kolkata के पुलिस कमिश्नर Supratim Sarkar को भी पद से हटा दिया। उनकी जगह वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी Ajay Nanda को कोलकाता का नया पुलिस आयुक्त बनाया गया है। बताया जा रहा है कि अजय नंदा का ट्रैक रिकॉर्ड काफी प्रभावशाली रहा है और माओवादी विरोधी अभियानों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद कार्रवाई
दरअसल, चुनाव आयोग ने रविवार को पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की थी। इसके साथ ही पूरे राज्य में आचार संहिता लागू हो गई। आचार संहिता लागू होने के कुछ ही घंटों के भीतर राज्य के शीर्ष अधिकारियों को हटाने का फैसला काफी अहम माना जा रहा है।
आयोग का फैसला क्यों अहम
विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव आयोग आमतौर पर चुनाव के दौरान प्रशासनिक ढांचे में बदलाव करता है ताकि सरकारी मशीनरी किसी राजनीतिक दबाव या प्रभाव से मुक्त रहकर काम कर सके। इस बार इतनी तेजी से शीर्ष अधिकारियों को हटाने को एक अभूतपूर्व फैसला माना जा रहा है, जो यह संकेत देता है कि आयोग चुनाव को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए सख्त कदम उठाने के मूड में है।
पहली महिला मुख्य सचिव थीं नंदिनी चक्रवर्ती
पद से हटाई गईं आईएएस अधिकारी नंदिनी चक्रवर्ती करीब ढाई महीने पहले ही राज्य की पहली महिला मुख्य सचिव बनी थीं। 31 दिसंबर 2025 को पूर्व मुख्य सचिव Manoj Pant के सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि अब चुनाव आयोग के आदेश के बाद राज्य के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।






