धनबाद में ₹4500 करोड़ के कोयले की 'काली कमाई'! कोल मंत्रालय ने BCCL से मांगी पूरी रिपोर्ट

धनबाद कोयलांचल में सालाना 4500 करोड़ रुपये के कोयले की अवैध निकासी के आरोपों के बीच कोयला मंत्रालय ने BCCL से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अवैध खनन से भू-धंसान, सड़क और रेल लाइन पर खतरा बढ़ रहा है। मंत्रालय ने सुरक्षा व्यवस्था, जिम्मेदार अधिकारियों और भविष्य की कार्ययोजना पर जवाब तलब किया है।

धनबाद में ₹4500 करोड़ के कोयले की 'काली कमाई'! कोल मंत्रालय ने BCCL से मांगी पूरी रिपोर्ट
हर साल 4500 करोड़ का कोयला गायब!

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HighLights

  • धनबाद में सालाना करीब ₹4500 करोड़ के कोयले की अवैध निकासी का दावा
  • आउटसोर्सिंग परियोजनाओं और अवैध खनन स्थलों पर बड़े पैमाने पर चोरी के आरोप
  • BCCL हर साल सुरक्षा पर कर रही है पर करीब ₹500 करोड़ खर्च
  • अवैध खनन से भू-धंसान, सड़क और रेल लाइन की सुरक्षा पर खतरा बढ़ा
  • मंत्रालय ने जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी मांगी जानकारी

धनबाद (Threesocieties.com Desk): कोयलांचल में कोयला चोरी और अवैध खनन को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कोयला मंत्रालय ने भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) से कोयला चोरी की घटनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मंत्रालय को मिली शिकायतों के बाद यह कार्रवाई शुरू की गई है, जिससे धनबाद के कोयला क्षेत्रों में सक्रिय अवैध कारोबारियों और संबंधित तंत्र में हलचल मच गई है।

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सूत्रों के अनुसार मंत्रालय को हाल के महीनों में कोयला चोरी, अवैध खनन और कोयले के अवैध कारोबार से जुड़ी कई शिकायतें मिली थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि BCCL की कई कोलियरियों और आउटसोर्सिंग परियोजनाओं के आसपास बड़े पैमाने पर कोयले की अवैध निकासी की जा रही है। इसके बाद मंत्रालय ने पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच कर विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

मंत्रालय ने मांगी जवाबदेही

मंत्रालय ने BCCL से केवल चोरी की घटनाओं की जानकारी ही नहीं, बल्कि उन्हें रोकने के लिए उठाए गए कदमों, सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और भविष्य की कार्ययोजना का भी ब्योरा मांगा है। मंत्रालय यह जानना चाहता है कि सुरक्षा पर भारी खर्च के बावजूद कोयला चोरी क्यों नहीं रुक पा रही है। BCCL के सूत्रों के अनुसार मंत्रालय के निर्देश के बाद विभिन्न क्षेत्रों से सूचनाएं एकत्र की जा रही हैं और तय समयसीमा के भीतर रिपोर्ट भेजी जाएगी। कंपनी का दावा है कि CISF, जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस के सहयोग से लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।

₹4500 करोड़ के अवैध कारोबार का दावा

कोयला चोरी का मुद्दा अब केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रह गया है। विभिन्न आकलनों के अनुसार धनबाद क्षेत्र में हर वर्ष करीब 4,500 करोड़ रुपये मूल्य के कोयले की अवैध निकासी होती है। इससे केंद्र सरकार, BCCL और देश के राजस्व को भारी नुकसान पहुंच रहा है। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि करीब 50 आउटसोर्सिंग परियोजनाओं और 50 से अधिक अवैध खनन स्थलों से प्रतिदिन सैकड़ों वाहन कोयला लेकर निकलते हैं। उनके अनुसार प्रतिदिन 25 से 30 हजार टन कोयले की अवैध ढुलाई और बिक्री की जा रही है।

BCCL सीएमडी ने भी माना बड़ी चुनौती

BCCL के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुके हैं कि कोयला चोरी और अवैध खनन कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। उनका कहना है कि यह केवल कंपनी का नुकसान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संपत्ति और सरकारी राजस्व को भी सीधी क्षति पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि अवैध खनन से उत्पादन व्यवस्था, खनन परिसंपत्तियों और सुरक्षा तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। कंपनी लगातार तकनीकी और प्रशासनिक उपायों के माध्यम से इस पर नियंत्रण की कोशिश कर रही है।

500 करोड़ खर्च, फिर भी नहीं थम रही चोरी

BCCL हर वर्ष सुरक्षा व्यवस्था पर करीब 500 करोड़ रुपये खर्च करती है। इस राशि में CISF के लगभग 3,000 जवानों का वेतन, सुरक्षा उपकरण और अन्य सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा कंपनी ने ड्रोन निगरानी, डिजिटल सर्विलांस, GPS ट्रैकिंग और आधुनिक तकनीक का उपयोग भी बढ़ाया है। इसके बावजूद विशाल खनन क्षेत्र, संगठित गिरोहों की सक्रियता और अवैध नेटवर्क के कारण कोयला चोरी की घटनाएं पूरी तरह नहीं रुक पाई हैं।

भू-धंसान और जनसुरक्षा पर मंडराता खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध खनन केवल आर्थिक नुकसान का मामला नहीं है, बल्कि यह जनसुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है। बाघमारा क्षेत्र के सोनारडीह, लोयाबाद और अन्य इलाकों में भू-धंसान की घटनाएं बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार कई स्थानों पर सड़क के नीचे अवैध खनन होने से जमीन कमजोर हो रही है। वहीं धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाइन और चिरकुंडा-टाटा मुख्य मार्ग के आसपास भी सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आ रही हैं।

अब सबकी नजर मंत्रालय की कार्रवाई पर

धनबाद के सांसद ढुलू महतो समेत कई जनप्रतिनिधि लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी और केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे भी अवैध खनन को गंभीर चुनौती बता चुके हैं। अब सवाल यह है कि जब मंत्रालय, जनप्रतिनिधि और स्वयं BCCL प्रबंधन समस्या को स्वीकार कर रहे हैं, तो इस संगठित अवैध कारोबार पर निर्णायक कार्रवाई कब होगी। मंत्रालय द्वारा मांगी गई रिपोर्ट को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पूरे कोयलांचल की निगाहें अब इस रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।