TMC में सबसे बड़ी बगावत! 20 सांसदों ने छोड़ा ममता का साथ, NDA के समर्थन के साथ नई पार्टी में विलय का ऐलान

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर सामने आया है। TMC के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में विलय का दावा करते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपा। बागी सांसदों ने NDA के साथ काम करने का ऐलान किया है, जिससे ममता बनर्जी की पार्टी पर बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है।

TMC में सबसे बड़ी बगावत! 20 सांसदों ने छोड़ा ममता का साथ, NDA के समर्थन के साथ नई पार्टी में विलय का ऐलान
TMC के बागी सांसदों ने स्पीकर को सौंपा पत्र।।

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     HighLights

  • TMC के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी (NCP) में विलय का दावा किया
  • बागी सांसदों ने सदन में अलग बैठने की मांग की
  • TMC ने बागी सांसदों के खिलाफ स्पीकर से कार्रवाई की मांग की
  • बागी गुट ने TMC के चुनाव चिन्ह पर भी दावा ठोका
  • पश्चिम बंगाल की राजनीति में बढ़ा सियासी घमासान

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी लोकसभा सांसदों ने पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी (NCP) में विलय का दावा किया है। बागी गुट की प्रमुख नेता और बारासात सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात के बाद यह घोषणा की।

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काकोली घोष ने कहा कि उनके साथ आए सांसद TMC के लोकसभा सांसदों की कुल संख्या के दो-तिहाई से अधिक हैं। उन्होंने स्पीकर को पत्र सौंपकर संसद में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। काकोली ने कहा कि उनका गुट अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ मिलकर देशहित में काम करेगा।

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स्पीकर से मिले बागी सांसद

दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात के बाद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि 20 सांसदों ने संयुक्त रूप से एक पत्र सौंपा है। उन्होंने कहा कि सांसदों का यह समूह अब नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में विलय कर रहा है और संसद में अलग पहचान चाहता है। उन्होंने कहा, "हम देश के विकास और राष्ट्रीय हित के लिए काम करना चाहते हैं। आगे चलकर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में NDA के साथ समन्वय बनाकर काम करेंगे।"

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BJP नेताओं से भी हुई मुलाकात

सूत्रों के अनुसार, बागी सांसदों ने स्पीकर से मिलने से पहले दिल्ली में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात की। पश्चिम बंगाल भाजपा प्रभारी भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई बैठक के बाद यह घटनाक्रम और तेज हो गया। राजनीतिक गलियारों में इसे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC के लिए अब तक का सबसे बड़ा आंतरिक संकट माना जा रहा है।

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TMC ने किया विरोध

दूसरी ओर, TMC नेतृत्व ने बागी सांसदों के कदम का कड़ा विरोध किया है। पार्टी सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपकर बागी गुट को मान्यता नहीं देने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि किसी भी विधायी दल का अस्तित्व उसकी मूल राजनीतिक पार्टी से जुड़ा होता है। कोई भी सांसदों का समूह समानांतर पार्टी या गुट बनाकर स्वतंत्र मान्यता का दावा नहीं कर सकता। पार्टी ने बागी सांसदों के खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग भी उठाई है।

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चुनाव चिन्ह पर भी दावा

बागी गुट के नेताओं ने संकेत दिए हैं कि वे TMC के चुनाव चिन्ह 'जुड़वा फूल' पर भी दावा ठोक सकते हैं। सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि अब यह तय करने का अधिकार अदालत के पास होगा कि असली TMC कौन है।

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बंगाल की राजनीति में बढ़ेगी हलचल

यदि बागी सांसदों का दावा सही साबित होता है तो यह ममता बनर्जी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका होगा। TMC के पास वर्तमान में लोकसभा में 28 सांसद हैं। इनमें से 20 सांसदों के अलग होने का दावा पार्टी की संसदीय ताकत को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।इसके अलावा राज्यसभा और पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आगामी चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।

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अब सबकी नजर स्पीकर और अदालत पर

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि लोकसभा स्पीकर बागी सांसदों के दावे पर क्या फैसला लेते हैं और चुनाव आयोग तथा अदालत इस विवाद को किस तरह देखते हैं। आने वाले दिनों में यह मामला राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।बंगाल की सियासत में शुरू हुई यह उठापटक संसद के मॉनसून सत्र से पहले विपक्षी राजनीति के लिए भी नई चुनौती बनकर उभर रही है।