नेपाल में बाढ़ की भारी तबाही, ₹45 हजार करोड़ की जरूरत; 16 लाख लोग प्रभावित
नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से 16 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। 1,377 मौतें और 5,130 लोग लापता हैं। पुनर्निर्माण के लिए ₹45 हजार करोड़ की जरूरत का अनुमान है।
HighLights:
- नेपाल के पुनर्निर्माण के लिए करीब ₹45 हजार करोड़ की जरूरत का अनुमान
- अनुमानित खर्च नेपाल की GDP के करीब 11% के बराबर
- बाढ़ और भूस्खलन से करीब 16 लाख लोग प्रभावित
- अब तक 1,377 लोगों की मौत, करीब 5,130 लोग लापता
काठमांडू (Threesocieties.com Desk): नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। घरों, सड़कों, पुलों और दूसरी जरूरी सुविधाओं को हुए नुकसान की भरपाई और पुनर्निर्माण के लिए करीब 7,233 करोड़ नेपाली रुपये यानी लगभग ₹45 हजार करोड़ की जरूरत का अनुमान लगाया गया है। यह राशि नेपाल की GDP के करीब 11% के बराबर बताई जा रही है।
बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल में करीब 16 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक 1,377 लोगों की मौत और करीब 5,130 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। आपदा के बाद राहत एवं बचाव अभियान के साथ अब बड़े स्तर पर पुनर्निर्माण की चुनौती नेपाल के सामने है।
पुनर्निर्माण पर खर्च होंगे ₹45 हजार करोड़
बाढ़ से क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करना नेपाल के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। अनुमानित रिकवरी लागत का बड़ा हिस्सा सड़क, पुल, बिजली और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से तैयार करने पर खर्च होगा। बाढ़ में करीब 7,570 निजी घर, 48 सरकारी इमारतें, 18 स्कूल और 7 स्वास्थ्य संस्थान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इससे प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन को पटरी पर लाने के लिए लंबे समय तक पुनर्निर्माण अभियान चलाना पड़ेगा।
545 लापता लोगों की तलाश में खोजी कुत्ते उतारे गए
नेपाल के अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में लापता लोगों की तलाश के लिए प्रशिक्षित खोजी कुत्तों को अभियान में लगाया गया है। राहत एवं बचाव दल सुरंगों, हेडवर्क्स और मलबे के बीच लापता लोगों को तलाश रहे हैं। बाढ़ के समय प्रोजेक्ट में कुल 1,433 लोग काम कर रहे थे। इनमें से 878 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि 545 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 9 दक्षिण कोरियाई, 34 चीनी और 50 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। राहत अभियान में नेपाली सेना, ड्रोन टीम, दक्षिण कोरियाई विशेषज्ञ और शेरपा रेस्क्यू टीम भी जुटी हुई हैं।
भारत ने नेपाल को भेजी 130 टन से ज्यादा राहत सामग्री
नेपाल के राहत और बचाव अभियान में भारत भी लगातार सहयोग कर रहा है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 26 अगस्त से अब तक आठ विशेष उड़ानों के जरिए 130 टन से ज्यादा राहत सामग्री नेपाल भेजी गई है। भारत ने राहत अभियान को मजबूत करने के लिए 54 विशेषज्ञों को भी नेपाल भेजा है। इनमें सुरंग और मलबे में फंसे लोगों को निकालने वाली विशेषज्ञ टीमें, मेडिकल विशेषज्ञ और फोरेंसिक कर्मी शामिल हैं। भारत की ओर से नेपाल को टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा मलबा हटाने और सुरंगों में बचाव अभियान के लिए गैस डिटेक्टर, ब्रीदिंग उपकरण, मड रेस्क्यू सूट, जनरेटर, लाइटिंग टावर और पानी निकालने वाले पंप भी भेजे गए हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च का बड़ा हिस्सा
आपदा के बाद नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्षतिग्रस्त इंफ्रास्ट्रक्चर को दोबारा खड़ा करने की है। अनुमानित पुनर्निर्माण लागत का करीब 75% हिस्सा बुनियादी ढांचे पर खर्च होने की बात सामने आई है। सड़क, पुल, बिजली व्यवस्था, सरकारी भवन, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और प्रभावित परिवारों के घरों को दोबारा बनाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी।
कई वर्षों तक जारी रह सकती है पुनर्निर्माण की चुनौती
नेपाल के लिए यह संकट केवल तत्काल राहत और बचाव तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने और हजारों लोगों के लापता होने के साथ-साथ भारी बुनियादी ढांचा नुकसान हुआ है। अब नेपाल सरकार के सामने प्रभावित लोगों को राहत देने के साथ-साथ सड़क, पुल, बिजली, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और घरों का पुनर्निर्माण करने की चुनौती है। अनुमानित ₹45 हजार करोड़ की लागत नेपाल की अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा दबाव डाल सकती है।विशेषज्ञों और राहत एजेंसियों के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और बुनियादी सेवाओं की बहाली में लंबा समय लग सकता है।
Anjala Kumar 



