ममता को सबसे बड़ा सियासी झटका! TMC में बगावत , शत्रुघ्न सिन्हा-यूसुफ पठान समेत 19 MP के अलग होने का दावा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल। तृणमूल कांग्रेस में बगावत तेज हो गई है। शत्रुघ्न सिन्हा, यूसुफ पठान, सायोनी घोष समेत 19 सांसदों के अलग होने का दावा किया जा रहा है। 58 विधायक भी बागी खेमे में बताए जा रहे हैं, जिससे ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
HighLights
- TMC के सांसदों के बागी गुट में शत्रुघ्न सिन्हा,यूसुफ पठान और सायोनी घोष का नाम
- 58 विधायक पहले ही अलग गुट बनाने का दावा कर चुके हैं
- राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर ने छोड़ी पार्टी
- बागी नेताओं ने खुद को 'असली TMC' बताया
कोलकाता (Threesocieties.com Desk):पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर लंबे समय से सुलग रहा असंतोष अब खुली बगावत का रूप लेता दिखाई दे रहा है। पार्टी के अंदर जारी टूट ने मुख्यमंत्री और तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के सामने अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है।
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न्यूज एजेंसी IANS के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले बागी गुट ने 19 लोकसभा सांसदों की सूची जारी की है। दावा किया जा रहा है कि ये सांसद अब पार्टी नेतृत्व से अलग रुख अपना चुके हैं। इस सूची में आसनसोल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान, जादवपुर से सांसद सायोनी घोष और कोलकाता दक्षिण की सांसद माला रॉय जैसे बड़े नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
ममता की करीबी नेताओं के नाम से बढ़ी हलचल
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा सायोनी घोष के नाम को लेकर हो रही है, जिन्हें ममता बनर्जी का बेहद करीबी माना जाता रहा है। वहीं बॉलीवुड अभिनेता से राजनेता बने शत्रुघ्न सिन्हा और पूर्व भारतीय क्रिकेटर यूसुफ पठान का नाम भी कथित बागी सूची में सामने आने से बंगाल की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।काकोली घोष दस्तीदार ने इससे पहले दावा किया था कि उन्होंने 20 लोकसभा सांसदों के समर्थन वाला पत्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजा है। यदि यह दावा सही साबित होता है तो लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस की ताकत को बड़ा झटका लग सकता है।
राज्यसभा में भी झटका
बागावत का असर केवल लोकसभा तक सीमित नहीं है। राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी और राज्यसभा सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले सुखेंदु शेखर भी पार्टी छोड़ चुके हैं। लगातार दो राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे ने तृणमूल नेतृत्व की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।दावों के मुताबिक, लोकसभा में पार्टी के 28 सांसदों में से 20 और राज्यसभा के 13 सांसदों में से 2 सांसद अलग हो चुके हैं। यानी कुल 22 सांसदों के पार्टी से अलग होने की चर्चा है।
विधानसभा में भी कमजोर पड़ रही TMC
लोकसभा और राज्यसभा के साथ-साथ विधानसभा में भी तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगने का दावा किया जा रहा है। बागी खेमे के नेताओं का कहना है कि 80 में से 58 विधायक पहले ही अलग गुट के साथ हैं। विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि उनके साथ अब 64 विधायक हैं और जल्द ही बाकी विधायक भी समर्थन पत्र सौंपेंगे। उन्होंने साफ कहा कि उनका गुट किसी अन्य दल में विलय नहीं करेगा और वही "असली तृणमूल कांग्रेस" है।
इन सांसदों के नाम चर्चा में
शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल)
काकोली घोष दस्तीदार (बारासात)
जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार)
खलीलुर रहमान (जंगीपुर)
यूसुफ पठान (बहरामपुर)
अबू ताहिर खान (मुर्शिदाबाद)
पार्थ भौमिक (बैरकपुर)
बापी हलदार (मथुरापुर)
सायनी घोष (जादवपुर)
माला रॉय (कोलकाता दक्षिण)
मिताली बाग (आरामबाग)
दीपक अधिकारी / देव (घाटाल)
कालीपद सोरेन (झाड़ग्राम)
जून मालिया (मेदिनीपुर)
अरूप चक्रवर्ती (बांकुरा)
शर्मिला सरकार (बर्धमान पूर्व)
असित कुमार माल (बोलपुर)
शताब्दी रॉय (बीरभूम)
रचना बनर्जी (हुगली)
शताब्दी रॉय का नेतृत्व पर हमला
इस पूरे घटनाक्रम के बीच वरिष्ठ नेता शताब्दी रॉय ने भी पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि केवल दो सांसद पार्टी छोड़ते तो इसे व्यक्तिगत निर्णय माना जा सकता था, लेकिन बड़ी संख्या में नेताओं का असंतोष नेतृत्व की गंभीर विफलता को दर्शाता है।उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में अभिषेक बनर्जी और चुनावी रणनीतिकारों को अत्यधिक महत्व देने से जमीनी कार्यकर्ताओं और नेताओं की नाराजगी बढ़ी है, जिसका असर अब खुलकर सामने आ रहा है।
बंगाल की राजनीति पर क्या होगा असर?
यदि सांसदों और विधायकों के अलग होने के ये दावे आधिकारिक रूप से सही साबित होते हैं, तो यह तृणमूल कांग्रेस के इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट माना जाएगा। इससे न केवल पार्टी की संगठनात्मक ताकत प्रभावित होगी, बल्कि आने वाले चुनावों में बंगाल की राजनीतिक तस्वीर भी पूरी तरह बदल सकती है।फिलहाल पूरे राज्य की नजर इस बात पर टिकी है कि ममता बनर्जी इस संकट से निपटने के लिए क्या रणनीति अपनाती हैं और बागी नेताओं के अगले कदम क्या होंगे।






