धरती आबा को पूरे झारखंड का नमन: भगवान बिरसा मुंडा के 126वें शहादत दिवस पर उमड़ा जनसैलाब
झारखंड के महानायक ण बिरसा मुंडा के 126वें शहादत दिवस पर रांची से उलिहातू तक श्रद्धा का सैलाब उमड़ा। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जिला प्रशासन और हजारों लोगों ने धरती आबा को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके संघर्ष, बलिदान और उलगुलान आंदोलन को याद किया।
HighLights
- राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने कोकर स्थित समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित की
- जन्मस्थली उलिहातू में जिला प्रशासन की ओर से विशेष कार्यक्रम आयोजित
- युवाओं को बिरसा मुंडा के आदर्श अपनाने और शिक्षा को प्राथमिकता देने का संदेश
- जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए उनके संघर्ष को किया गया याद
रांची/खूंटी (Threesocieties.com Desk) : झारखंड के महानायक, जनजातीय अस्मिता के प्रतीक और उलगुलान आंदोलन के प्रणेता भगवान बिरसा मुंडा की 126वीं पुण्यतिथि पूरे राज्य में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। धरती आबा के शहादत दिवस पर राजधानी रांची से लेकर उनकी जन्मस्थली उलिहातू तक श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और हजारों लोगों ने उन्हें नमन करते हुए उनके संघर्ष और बलिदान को याद किया।
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रांची के कोकर स्थित भगवान बिरसा मुंडा की समाधि स्थल पर आयोजित विशेष श्रद्धांजलि सभा में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए भगवान बिरसा मुंडा द्वारा किए गए ऐतिहासिक संघर्ष को याद करते हुए कहा कि उनके विचार और आदर्श आज भी समाज को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान समाधि स्थल पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। ‘धरती आबा अमर रहें’ और ‘बिरसा मुंडा अमर रहें’ के नारों से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा। राज्य सरकार ने इस अवसर पर उनके सपनों के अनुरूप समृद्ध, विकसित और सशक्त झारखंड के निर्माण का संकल्प भी दोहराया।
उलिहातू में श्रद्धा का महासंगम

भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातू में भी शहादत दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।उपायुक्त मो. जावेद हुसैन एवं पुलिस अधीक्षक ऋषभ गर्ग ने भगवान बिरसा मुंडा की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद दोनों अधिकारियों ने बिरसा मुंडा कॉम्प्लेक्स पहुंचकर वहां स्थापित प्रतिमा पर भी पुष्पचक्र अर्पित किया।
संघर्ष और बलिदान की गाथा को किया याद
उपायुक्त मो. जावेद हुसैन ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा केवल झारखंड के नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। उन्होंने अपने साहस, संघर्ष और बलिदान से जनजातीय समाज में नई चेतना जगाई तथा स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की।उन्होंने कहा कि उलिहातू जैसी ऐतिहासिक धरती पर भगवान बिरसा मुंडा का जन्म होना पूरे राज्य और देश के लिए गर्व का विषय है। श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद उपायुक्त ने भगवान बिरसा मुंडा के वंशजों से मुलाकात कर उनके जीवन और संघर्षों की जानकारी ली।
शिक्षा से विकास का संदेश
कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने स्थानीय बच्चों से संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित रूप से विद्यालय जाने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अधिकारियों ने अभिभावकों से भी बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि शिक्षा ही समाज और क्षेत्र के सर्वांगीण विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है। जिला प्रशासन क्षेत्रीय विकास और जनहित के कार्यों के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहा है।
युवाओं को बिरसा के आदर्श अपनाने का आह्वान
पुलिस अधीक्षक ऋषभ गर्ग एवं उप विकास आयुक्त प्रवीण कुमार प्रकाश ने युवाओं से भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा का जीवन युवाओं में संघर्ष, नेतृत्व, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना पैदा करता है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी यदि धरती आबा के विचारों को अपनाए तो समाज में सकारात्मक बदलाव की नई शुरुआत हो सकती है।
25 वर्ष की उम्र में बन गए अमर
15 नवंबर 1875 को खूंटी जिले के उलिहातू गांव में जन्मे भगवान बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश शासन के अत्याचारों और शोषण के खिलाफ ऐतिहासिक उलगुलान आंदोलन का नेतृत्व किया था। उन्होंने आदिवासी समाज के अधिकारों, सम्मान और अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष किया। मात्र 25 वर्ष की आयु में 9 जून 1900 को रांची कारागार में उनका निधन हो गया, लेकिन उनका संघर्ष, त्याग और बलिदान आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। उनके विचार और आंदोलन आज भी जल, जंगल, जमीन और सामाजिक न्याय की लड़ाई को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर धनबाद डीसी आदित्य रंजन ने अर्पित किए श्रद्धासुमन

आदिवासी समाज के महान जननायक और स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की 126वीं पुण्यतिथि के अवसर पर मंगलवार को बैंक मोड़ स्थित उनकी आदमकद प्रतिमा पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन, नगर आयुक्त आशीष गंगवार, अनुमंडल दंडाधिकारी लोकेश बारंगे सहित कई अधिकारियों और गणमान्य लोगों ने भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धासुमन अर्पित किए।कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर धरती आबा बिरसा मुंडा के संघर्ष, त्याग और बलिदान को याद किया। उपस्थित लोगों ने उनके दिखाए मार्ग पर चलने और समाज के उत्थान के लिए कार्य करने का संकल्प भी लिया।
देश की संस्कृति और अस्मिता के महान रक्षक थे बिरसा मुंडा
श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद उपायुक्त आदित्य रंजन ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा केवल आदिवासी समाज ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संदेश देकर समाज को अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहने की सीख दी। उपायुक्त ने कहा कि बिरसा मुंडा ने लोगों को उनके कर्म और धर्म का महत्व समझाया तथा समाज में ज्ञान का प्रकाश फैलाने का कार्य किया। उन्होंने पारंपरिक भूमि अधिकारों, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्थाओं की रक्षा के लिए अंग्रेजी शासन के खिलाफ अदम्य साहस और संघर्ष का परिचय दिया।
आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं धरती आबा
उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा का जीवन आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके विचार सामाजिक न्याय, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव मार्गदर्शन देते रहेंगे। झारखंड सहित पूरे देश में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शहीद बिरसा मुंडा स्मारक स्मृति संचालन समिति के संयोजक महादेव हांसदा, नारायण महतो, अवध पासवान, किशोर मुर्मू, राम बाबू कुमार, जितेंद्र कुमार पासवान, रति उरांव, सुनील कुमार गुप्ता सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, स्थानीय नागरिक एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर आयोजित यह कार्यक्रम उनके संघर्ष, बलिदान और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए किए गए ऐतिहासिक योगदान को याद करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बना। उनके विचार आज भी समाज को एकजुटता, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रेरित करते हैं।
झारखंड में मनाया गया यह शहादत दिवस एक बार फिर इस बात का प्रमाण बना कि धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, प्रेरणा और संघर्ष की अमर पहचान हैं।






