झारखंड में अवैध खनन पर सियासी घमासान: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

झारखंड में बढ़ते अवैध खनन और कोयला चोरी के खिलाफ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य प्रसाद साहू ने केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की। बीसीसीएल प्रबंधन को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी, अधिकारी के ट्रांसफर से जांच पर उठे सवाल।

झारखंड में अवैध खनन पर सियासी घमासान: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र
आदित्य साहू (फाइल फोटो)।
  • हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला इलिगल माइनिंग का मामला

रांची (Threesocieties.com Desk)। झारखंड में बढ़ते अवैध खनन और कोयला चोरी के मामलों ने एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ा दिया है। झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य प्रसाद साहू ने राज्य में संगठित रूप से चल रहे अवैध खनन और कोयला चोरी पर गहरी चिंता जताते हुए केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी को पत्र लिखकर तत्काल और ठोस कार्रवाई की मांग की है।

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साहू ने अपने पत्र में विशेष रूप से भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के क्षेत्रों में संगठित गिरोहों द्वारा किए जा रहे अवैध खनन और कोयला चोरी की घटनाओं का उल्लेख किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा एजेंसियों के प्रयासों के बावजूद स्थानीय प्रशासन के अपेक्षित सहयोग के अभाव में इन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।

सुरक्षा अभियान पर प्रशासनिक उदासीनता का आरोप

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बीसीसीएल के महाप्रबंधक (सुरक्षा) हफीजुल कुरैशी द्वारा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के सहयोग से अवैध खनन और कोयला चोरी के खिलाफ अभियान चलाया गया था। लेकिन स्थानीय पुलिस प्रशासन की उदासीनता के कारण इस अभियान को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध खनन का नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि बिना प्रशासनिक और राजनीतिक संरक्षण के इस तरह की गतिविधियां संभव नहीं हैं।

हाईकोर्ट की शरण में बीसीसीएल

मामले की गंभीरता को देखते हुए बीसीसीएल प्रबंधन को झारखंड उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। याचिका दायर कर अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई और प्रशासनिक सहयोग की मांग की गई।

हालांकि, साहू ने आरोप लगाया कि याचिका दायर होने के कुछ ही दिनों के भीतर संबंधित अधिकारी का स्थानांतरण कर दिया गया, जिससे न्यायिक प्रक्रिया और चल रही जांच पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक बताया।

स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग

आदित्य साहू ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि अवैध खनन के खिलाफ चल रही कार्रवाई को कमजोर करना भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने जैसा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इससे न केवल सरकारी राजस्व को भारी नुकसान होगा, बल्कि क्षेत्र की कानून-व्यवस्था भी प्रभावित होगी।

राज्य की अर्थव्यवस्था पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड में कोयला अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। बीसीसीएल और अन्य कोल कंपनियों के माध्यम से राज्य को करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में अवैध खनन और कोयला चोरी से सरकारी खजाने को भारी नुकसान होता है। साथ ही, अवैध खनन से जुड़े गिरोह स्थानीय युवाओं को अपराध की ओर धकेलते हैं, जिससे सामाजिक ताना-बाना भी प्रभावित होता है।

निष्कर्ष

झारखंड में अवैध खनन और कोयला चोरी का मुद्दा अब प्रशासनिक दायरे से निकलकर राजनीतिक और न्यायिक स्तर तक पहुंच चुका है। केंद्रीय मंत्री को लिखे गए पत्र और हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र और राज्य सरकार इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाती हैं।