• उपेंद्र कुशवाहा, अशोक चौधरी व जनक राम हैं गवर्नर कोटे से एमएलसी मनोनित

पटना। पटना हाईकोर्ट ने बिहार में गवर्नर कोटे से मनोनीत किये गये 12 एमएलसी के मनोनयन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित रख लिया। इन 12 एमएलसी में खान एवं भूतत्व मंत्री जनक राम और भवन निर्णाण मंत्री अशोक चौधरी के साथ ही जदूय संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी शामिल हैं। 

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मनोनयन तय मानक के अनुरूप नहीं  

सीनीयर एडवोकेट बसंत कुमार चौधरी की याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल एवं जस्टिस एस कुमार की बेंच ने सुनवाई की। याचिकाकर्ता के एडवोकेट का कहना था कि भारत के संविधान के प्रावधानों के तहत साहित्य, कलाकार, वैज्ञानिक,सामाजिक कार्यकर्ता व सहकारिता आंदोलन से जुड़े विशिष्ट लोगों का राज्यपाल कोटे से मनोनयन हो सकता है। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि एक सामाजिक कार्यकर्ता को काम का अनुभव, व्यवहारिक ज्ञान और विशिष्ट होना चाहिए। इन सब बातों को अनदेखा किया गया है। 

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संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है मनोनयन
बसंत कुमार चौधरी ने कोर्ट को बताया कि मनोनीत किये गये सदस्यों में कोई पार्टी का पदाधिकारी है, तो कोई कहीं का अध्यक्ष। जिन लोगों को मनोनीत किया गया है वे ना तो साहित्य की विधा से जुड़ें हैं और ना वैज्ञानिक और ना तो कलाकार हैं। यह संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है। ऐसा फैसला सभी मापदंडो को अनदेखा करते हुए लिया गया है। पिछ्ली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार के महाधिवक्ता से पूछा था कि क्या मनोनीत किये गये एमएलसी में राज्य के मंत्री पद पर है क्या? 
गवर्नर कोटे से मनोनित लीडर

गवर्नर कोटे से एमएलसी के रूप में खान एवं भूतत्व मंत्री जनक राम और भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी, जदयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा, डा. राम वचन राय, संजय कुमार सिंह, ललन कुमार सर्राफ, डा राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, संजय सिंह, देवेश कुमार, प्रमोद कुमार, घनश्याम ठाकुर और निवेदिता सिंह का मनोनयन किया गया है।