हजारीबाग वन भूमि घोटाला: IAS विनय चौबे पर ACB की चार्जशीट, 50+ बैंक ट्रांजैक्शन औरअवैध जमाबंदी का खुलासा
हजारीबाग वन भूमि घोटाले में निलंबित IAS विनय कुमार चौबे के खिलाफ ACB ने 14 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। 50 से अधिक बैंक लेन-देन और 5 प्लॉट की अवैध जमाबंदी का खुलासा।
- 14 पन्नों की चार्जशीट में 13 गवाह, करोड़ों के लेनदेन का जिक्र
रांची (Threesocieties.com Desk)। हजारीबाग के बहुचर्चित वन भूमि घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे के खिलाफ 14 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है। एसीबी ने हजारीबाग स्थित विशेष अदालत में यह चार्जशीट दाखिल करते हुए 13 गवाहों की सूची भी सौंपी है।
यह भी पढ़ें: ईशान किशन की ‘सीक्रेट’ लव स्टोरी आई सामने: छह साल की डेटिंग के बाद शादी की चर्चा तेज
जांच एजेंसी के मुताबिक, चौबे ने अपने उपायुक्त कार्यकाल (2010-2013) के दौरान वन विभाग की जमीन की अवैध जमाबंदी कराने के लिए दबाव बनाया था।
अवैध जमाबंदी के लिए दबाव बनाने का आरोप
एसीबी की चार्जशीट में कहा गया है कि हजारीबाग के तत्कालीन उपायुक्त के रूप में कार्यरत रहते हुए विनय कुमार चौबे ने अधीनस्थ अधिकारियों पर दबाव डालकर वन भूमि की जमाबंदी कराई। गवाहों की सूची में उस समय के अंचल अधिकारी, राजस्व कर्मचारी, एसीबी के डीएसपी सहित अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हैं।
जांच में सामने आया है कि जिन जमीनों की जमाबंदी कराई गई, वे गैरमजरूआ खास जंगल झाड़ी के रूप में दर्ज थीं। नियमों के मुताबिक, वन संरक्षण अधिनियम के तहत केंद्र सरकार की अनुमति के बिना ऐसी जमीन का उपयोग गैर-वानिकी कार्यों के लिए नहीं किया जा सकता।
सहयोगी और परिवार के बीच करोड़ों का लेनदेन
चार्जशीट में यह भी दावा किया गया है कि वन भूमि की खरीद चौबे के सहयोगी विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह के नाम पर की गई थी। एसीबी के अनुसार, विनय चौबे और विनय सिंह के बीच व्यावसायिक संबंध थे। जांच में यह भी पाया गया कि चौबे की पत्नी स्वप्ना संचिता, उनके साले शिपिज त्रिवेदी और अन्य पारिवारिक सदस्यों तथा विनय सिंह की कंपनी के बीच 50 से अधिक बैंकिंग लेन-देन हुए।इन ट्रांजैक्शनों में करोड़ों रुपये के आदान-प्रदान के सबूत अदालत में पेश किए गए हैं। एसीबी ने इन वित्तीय लेनदेन को मामले का अहम साक्ष्य बताया है।
पांच प्लॉटों की अवैध जमाबंदी, 2013 में हुई थी रद्द
चार्जशीट के अनुसार, चौबे के कार्यकाल के दौरान वन विभाग की जमीन के पांच प्लॉटों की अवैध तरीके से जमाबंदी की गई थी।मामला उजागर होने के बाद वर्ष 2013 में इन सभी अवैध जमाबंदियों को रद्द कर दिया गया था। एसीबी की प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद 25 सितंबर 2025 को सरकार से अभियोजन की अनुमति ली गई और एसीबी हजारीबाग थाना कांड संख्या 11/25 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
आगे क्या?
अब विशेष अदालत में मामले की सुनवाई होगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह झारखंड प्रशासनिक सेवा से जुड़े बड़े भ्रष्टाचार मामलों में एक अहम उदाहरण साबित हो सकता है। वन भूमि से जुड़े मामलों में नियमों की अनदेखी और सत्ता के दुरुपयोग को लेकर यह केस प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी बन सकता है।






