धनबाद: गोविंदपुर में 40 एकड़ जमीन पर टेक्सटाइल पार्क बनाया जायेगा. झरिया कोयलांचल से आग व भूधंसान के का्रण विस्थापित होनेवाले दस हजार लोगों को टेक्सटाइल पार्क में रोजगार दिया जायेगा.झरिया मास्टर प्लान के तहत विस्थापित होने वाले लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की संभावना पर हुई बैठक में डीसी ने यह जानकारी दी.
झरिया के त्वरित पुनर्वास के मसले पर समाहरणालय सभागार में डीएमसी व टेक्सटाइल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई. बैठक में यह बात आई कि रोजगार मुख्य कारण है जिसके कारण हजारों लोग झरिया को छोड़ना नहीं चाहते. डीसी अमित कुमार ने कहा कि झरिया रीहैबिलिटेशन सबसे बड़ी चुनौती है. यहां के लगभग एक हजार परिवारों की चार-पांच लाख की आबादी को विभिन्न क्षेत्रों में पुनर्वासित करना है,जिनके लिए रोजगार सबसे बड़ी समस्या है.इन्हीं लोगों की आजीविका का सृजन करने के लिए इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट पर फोकस करना है. इसलिए यहां टैक्सटाइल इंडस्ट्री को एक इकोनामिक बेस के तौर पर तैयार करना है.सी अमित कुमार ने कहा कि सरकार चाहती है कि झरिया की दो लाख से अधिक आबादी के रोजगार को को ध्यान में रखकर ही टेक्सटाइल्स पार्क की स्थापना हो.मांग के अनुसार इंडस्ट्री स्थापित करने के लिए गोविंदपुर के पास जियाडा की 40 एकड़ जमीन पर वर्क स्टेशन तैयार किया जायेगा. जिसमें टैक्सटाइल इंडस्ट्री को स्थापित करने के लिए सारी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होंगी. कम समय में प्रोजेक्ट धरातल पर होगा.
डीसी ने कहा कि यहां टेक्स्टाइल इंडस्ट्री को स्थापित करने के लिए मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने काफी दिलचस्पी दिखाई है. उन्होंने बहुत सारे स्टेकहोल्डर्स को भी इंडस्ट्री स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया है. मेयर इस दिशा में काफी रुचि ले रहे हैं, जिस कारण झरिया रिहैबिलिटेशन के तहत पुनर्वासित किये गये लोगों के लिए रोजगार का सृजन होगा. डीएमसी में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को टेक्सटाइल्स उद्योग से सीधे जोड़ा गया है. डीएमसी की टेक्सटाइल पार्क की स्थापना में अहम भूमिका होगी. बैठक में कोलकाता से आये टेक्सटाइल उद्योग के प्रतिनिधि तमल शाह, आशीष वाजपेयी और बसंत गोयनका ने प्रजेंटेशन दिया.बैठक में स्टेक होल्डर्स तमल शाह ने कहा टेक्स्टाइल इंडस्ट्री में झरिया रिहैबिलिटेशन के तहत पुनर्वासित 10 हजार लोगों को रोजगार देना होगा.
मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने कहा कि यहां से उत्पाद को निर्यात करने की पर्याप्त संभावना है. टेक्सटाइल पार्क से तैयार कपड़े मात्र पांच घंटे में कोलकाता बंदरगाह तक भेजे जा सकेंगे. झारखंड सरकार की टेक्सटाइल नीति ऐसी है कि कोई भी उद्योग तेजी से तरक्की करेगा. टेक्सटाइल्स उद्योग को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए. बैठक में उद्योग विभाग के रविशंकर प्रसाद, डीएमसी कमिशनर चंद्र मोहन कश्यप, एसी श्याम नारायण राम, डीआरडीए के डायरेक्टर संजय भगत, अपर नगर आयुक्त संदीप कुमार भी उपस्थित थे