NEET में फेल, बन गया ‘ब्रिगेडियर’! फर्जी वर्दी पहनकर घूम रहा था युवक, सेना की पूछताछ में निकला बड़ा फर्जीवाड़ा

शाहजहांपुर में NEET में असफल युवक आर्यन वर्मा सेना का फर्जी ब्रिगेडियर बनकर घूमता मिला। पूर्व सैनिकों की शिकायत पर गिरफ्तारी हुई। दिल्ली में बनी फर्जी वर्दी, नकली आईडी कार्ड और आतंकी कनेक्शन की जांच में जुटी आर्मी इंटेलिजेंस।

NEET में फेल, बन गया ‘ब्रिगेडियर’! फर्जी वर्दी पहनकर घूम रहा था युवक, सेना की पूछताछ में निकला बड़ा फर्जीवाड़ा
सीने पर वर्दी, कंधे पर अशोक स्तंभ और साथ में बाउंसर।

     HighLights

  • शाहजहांपुर के आर्यन वर्मा को फर्जी सैन्य अधिकारी बनकर घूमने के आरोप में गिरफ्तार 
  • निजी कार पर सेना का झंडा और प्रतीक चिन्ह लगाकर शहर में दिखाता था रौब
  • दो किराए के बाउंसरों को NSG कमांडो बताकर साथ रखता था साथ
  • दिल्ली में बनवाई थी फर्जी वर्दी, आईडी कार्ड और नियुक्ति पत्र
  • आर्मी इंटेलिजेंस आतंकी और विदेशी एजेंसियों से संभावित संबंधों की कर रही है जांच 

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सेना, पुलिस और स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया। NEET परीक्षा में असफल होने के बाद एक युवक ने खुद को भारतीय सेना का ब्रिगेडियर बताकर ऐसा जाल बुना कि परिवार, रिश्तेदार और शहर के कई लोग उसके झांसे में आ गए। हालांकि उसकी यह कहानी ज्यादा दिन नहीं चल सकी और पूर्व सैनिकों की सतर्कता के चलते उसका पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया।

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आरोपी की पहचान शाहजहांपुर के दुर्गा इन्क्लेव निवासी आर्यन वर्मा के रूप में हुई है। वह खुद को चंडीगढ़ कमांड अस्पताल में तैनात ब्रिगेडियर बताता था। सेना जैसी वर्दी, कंधों पर ब्रिगेडियर के बैज, हाथ में बैटन और कार पर सेना का झंडा लगाकर वह शहर में घूमता था। उसके साथ दो बाउंसर भी रहते थे जिन्हें वह एनएसजी कमांडो बताता था।

पूर्व सैनिकों को हुआ शक, ऐसे खुली पोल

स्थानीय पूर्व सैनिक सुदेश मिश्रा और सतीश चौहान को आर्यन की गतिविधियों पर लंबे समय से संदेह था। उन्हें आश्चर्य हुआ कि एक कथित ब्रिगेडियर निजी कार पर सेना का झंडा और प्रतीक चिन्ह लगाकर क्यों घूम रहा है। इसके बाद उन्होंने सैन्य अधिकारियों के सहयोग से एक योजना बनाई।

आर्यन को शहीद संग्रहालय में युवाओं को प्रेरक संबोधन देने के बहाने बुलाया गया। वहां सेना के अधिकारियों ने उससे पूछताछ शुरू की। जब उसने खुद को चंडीगढ़ कमांड अस्पताल में तैनात ब्रिगेडियर बताया तो अधिकारियों ने वीडियो कॉल के माध्यम से संबंधित सैन्य अधिकारियों से उसकी पहचान कराई, लेकिन कोई भी उसे नहीं पहचान सका। लगातार पूछताछ के बाद आर्यन ने स्वीकार कर लिया कि वह सेना का अधिकारी नहीं है और लंबे समय से लोगों को धोखा दे रहा था।

NEET में असफलता के बाद शुरू हुआ फर्जीवाड़ा

जांच में सामने आया कि आर्यन ने 12वीं के बाद कोटा में रहकर NEET की तैयारी की थी। दो बार प्रयास के बावजूद सफलता नहीं मिलने पर वह दिल्ली चला गया। वहीं उसने सैन्य भर्ती की तैयारी शुरू करने की बात परिवार को बताई। जनवरी 2026 में उसने अपने माता-पिता को फोन कर दावा किया कि उसका चयन सेना में ब्रिगेडियर के पद पर हो गया है और उसकी पोस्टिंग चंडीगढ़ कमांड अस्पताल में हुई है। कुछ दिनों बाद वह सैन्य वर्दी पहनकर घर पहुंचा और फर्जी नियुक्ति पत्र व पहचान पत्र दिखाकर सभी का विश्वास जीत लिया।

दिल्ली में बनवाई वर्दी और नकली दस्तावेज

पुलिस जांच में पता चला है कि आर्यन ने अपने बिहार निवासी दोस्त मयंक राज की मदद से दिल्ली में सेना जैसी वर्दी, फर्जी नियुक्ति पत्र, विजिटिंग कार्ड और पहचान पत्र तैयार करवाए थे। उसके विजिटिंग कार्ड पर "सशस्त्र सुरक्षा बल चिकित्सा महाविद्यालय, पुणे" और "कमांड अस्पताल, पंचकूला" जैसे विवरण दर्ज थे। वहीं गुरुग्राम के एक साइबर कैफे से रक्षा मंत्रालय के नाम पर फर्जी आईडी कार्ड भी तैयार कराया गया था।

किराए के बाउंसरों को बताता था NSG कमांडो

आर्यन ने अपनी सुरक्षा के नाम पर दो बाउंसर भी रखे थे। वह उन्हें लोगों के सामने एनएसजी कमांडो बताता था। जांच में दोनों युवक सामान्य बाउंसर निकले, जिन्हें प्रतिदिन मानदेय देकर रखा गया था। कार चालक के पास भी रक्षा मंत्रालय का कथित पहचान पत्र मिला, जिसकी सत्यता की जांच की जा रही है।

आतंकी कनेक्शन की भी जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्मी इंटेलिजेंस और पुलिस संयुक्त रूप से जांच कर रही हैं। सुरक्षा एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं आरोपी का संबंध किसी विदेशी खुफिया एजेंसी, आतंकी संगठन या किसी बड़े नेटवर्क से तो नहीं है। आर्यन से बरामद पिस्टल की भी जांच की जा रही है। आरोपी इसे एयर पिस्टल बता रहा है, जबकि पुलिस इसकी तकनीकी जांच करा रही है।

दिल्ली और गुरुग्राम पहुंचेगी जांच

सदर बाजार पुलिस ने मामले में विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जल्द ही पुलिस टीम दिल्ली और गुरुग्राम जाकर उन लोगों से पूछताछ करेगी जिन्होंने वर्दी, फर्जी दस्तावेज और पहचान पत्र तैयार किए थे। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि ऐसे फर्जी दस्तावेज अब तक कितने लोगों को उपलब्ध कराए गए हैं और उनका कहीं दुरुपयोग तो नहीं हुआ है।

जेल भेजा गया आरोपी

पूछताछ पूरी होने के बाद शनिवार को आर्यन वर्मा को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।यह मामला न केवल फर्जी पहचान बनाकर लोगों को गुमराह करने का है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े करता है। इसलिए सेना और पुलिस दोनों एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुटी हुई हैं।