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        HighLights

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  • विधि विभाग ने रविवार रात आधिकारिक अधिसूचना जारी की
  • राजीव रंजन ने निजी कारणों का हवाला देकर छोड़ा पद
  • सरकारी वकीलों की टीम में बदलाव को लेकर भी चर्चा तेज
  • 2020 से झारखंड के महाधिवक्ता थे राजीव रंजन

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से इस समय एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार के विधि विभाग ने रविवार देर रात अधिसूचना जारी कर राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) पद पर बड़ा बदलाव कर दिया है। वर्तमान महाधिवक्ता राजीव रंजन का इस्तीफा स्वीकार करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रोशितस्य रॉय को झारखंड का नया महाधिवक्ता नियुक्त किया गया है।

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विधि विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार भारत के संविधान के अनुच्छेद 165(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल ने यह निर्णय लिया है। रोशितस्य रॉय को उनके पदभार ग्रहण करने की तिथि से अगले आदेश तक झारखंड राज्य का महाधिवक्ता नियुक्त किया गया है।

राज्यपाल की मंजूरी के बाद जारी हुई अधिसूचना

रविवार रात जारी सरकारी अधिसूचना में बताया गया कि राजीव रंजन द्वारा 14 जून को दिया गया त्यागपत्र तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है। इसके साथ ही झारखंड उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता रोशितस्य रॉय को राज्य का नया महाधिवक्ता नियुक्त किया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य की कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामले उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं।

निजी कारणों का दिया हवाला

जानकारी के अनुसार राजीव रंजन ने अपने इस्तीफे में निजी कारणों का उल्लेख किया है। हालांकि राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में उनके इस्तीफे को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, सरकारी अधिवक्ताओं की टीम में बदलाव को लेकर महाधिवक्ता कार्यालय और सरकार के बीच लंबे समय से संवाद चल रहा था। महाधिवक्ता कार्यालय ने नई सूची भी भेजी थी, लेकिन उस पर अपेक्षित निर्णय नहीं लिया जा सका था।

2020 में बने थे महाधिवक्ता

गौरतलब है कि झामुमो-नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के गठन के बाद 7 फरवरी 2020 को राजीव रंजन को झारखंड का महाधिवक्ता नियुक्त किया गया था। उस समय सरकार ने उनके नाम की आधिकारिक अधिसूचना भी जारी की थी। वर्ष 2024 में नई सरकार बनने के बाद उन्होंने औपचारिक रूप से इस्तीफा दिया था, लेकिन सरकार ने उन्हें अगले आदेश तक कार्य जारी रखने को कहा था। इसके बावजूद नई सरकार की ओर से उनकी पुनर्नियुक्ति की अधिसूचना जारी नहीं की गई थी।

क्या सरकारी तंत्र से नाराज थे महाधिवक्ता?

राजनीतिक और कानूनी गलियारों में चर्चा है कि राजीव रंजन कुछ प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर असंतुष्ट थे। बताया जाता है कि कई जिलों के उपायुक्त महत्वपूर्ण मामलों में शपथपत्र तैयार करने के लिए महाधिवक्ता कार्यालय से समन्वय नहीं कर रहे थे और सीधे अपने स्तर पर दस्तावेज भेज रहे थे। इसी बीच यह भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से संपर्क के बाद उन्होंने मुख्य सचिव अविनाश कुमार से मुलाकात की और उसके बाद इस्तीफा देने का निर्णय लिया। हालांकि इन चर्चाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सुप्रीम कोर्ट में सक्रिय हो सकते हैं राजीव रंजन

सूत्रों के अनुसार महाधिवक्ता पद छोड़ने के बाद राजीव रंजन अब दिल्ली में अपनी कानूनी गतिविधियों को विस्तार दे सकते हैं। उन्होंने राजधानी दिल्ली में अपना कार्यालय भी स्थापित किया है और लंबे समय से सर्वोच्च न्यायालय में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे थे।

रोशितस्य रॉय के सामने बड़ी जिम्मेदारी

नवनियुक्त महाधिवक्ता रोशितस्य रॉय झारखंड उच्च न्यायालय के प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं में गिने जाते हैं। राज्य सरकार की ओर से उन्हें ऐसे समय में यह जिम्मेदारी सौंपी गई है जब कई संवेदनशील कानूनी, प्रशासनिक और नीतिगत मामलों में सरकार को मजबूत कानूनी पक्ष रखने की आवश्यकता है। उनकी नियुक्ति को राज्य सरकार के कानूनी ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।