पांच साल का इंतजार खत्म! झारखंड को मिला नया लोकायुक्त, जस्टिस अमिताभ गुप्ता संभालेंगे भ्रष्टाचार पर लगाम

झारखंड को 5 साल बाद नया लोकायुक्त मिला। राज्यपाल संतोष गंगवार ने जस्टिस अमिताभ गुप्ता को नियुक्त किया। करीब 3000 भ्रष्टाचार मामले लंबित, अब कार्रवाई तेज होने की उम्मीद।

पांच साल का इंतजार खत्म! झारखंड को मिला नया लोकायुक्त, जस्टिस अमिताभ गुप्ता संभालेंगे भ्रष्टाचार पर लगाम
जस्टिस अमिताभ गुप्ता (फाइल फोटो)।
  • झारखंड में लोकायुक्त की बहाली
  • अब भ्रष्टाचार के मामलों पर तेज होगी कार्रवाई

रांची (Threesocieties.com Desk): लगभग पांच साल के लंबे इंतजार के बाद झारखंड को आखिरकार नया लोकायुक्त मिल गया है। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार गुप्ता को झारखंड का नया लोकायुक्त नियुक्त किया है। इस संबंध में गुरुवार को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है।

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अब जल्द ही शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी होगी, जिसके बाद राज्य में लंबित भ्रष्टाचार मामलों पर कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है।

5 साल से खाली था पद, 3000 मामले पड़े हैं लंबित

झारखंड में लोकायुक्त का पद जून 2021 से खाली पड़ा था। इससे पहले डीएन उपाध्याय इस पद पर थे, जिनका कोरोना काल में निधन हो गया था। इस लंबे अंतराल के कारण राज्य में लगभग तीन हजार भ्रष्टाचार के मामले लंबित हो गए हैं। लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं होने को लेकर झारखंड उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई जारी है। सूत्रों के मुताबिक, 20 अप्रैल की सुनवाई से पहले ही सरकार ने नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली है।

कौन हैं जस्टिस अमिताभ गुप्ता?

न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार गुप्ता का न्यायिक करियर काफी लंबा और अनुभवपूर्ण रहा है।

1997 में न्यायिक सेवा में प्रवेश
संयुक्त बिहार में एडीजे के रूप में कार्य
धनबाद और दुमका में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
रांची में CBI के विशेष न्यायाधीश (पशुपालन मामले)
2013 में झारखंड उच्च न्यायालय के जज बने
30 मई 2021 को सेवानिवृत्त

सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने आरआरडीए ट्रिब्यूनल के चेयरमैन और झारखंड सरकार के विधि सचिव के रूप में भी सेवाएं दीं।

शिक्षा और शुरुआती जीवन
जन्म: 31 मई 1959
स्कूली शिक्षा: सेंट जेवियर्स स्कूल, साहिबगंज
स्नातक: हिंदू कॉलेज
स्नातकोत्तर और एलएलबी: दिल्ली विश्वविद्यालय
अब क्या बदलेगा?

लोकायुक्त की नियुक्ति के बाद राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी। लंबित केसों का निपटारा शुरू होगा। प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ेगी। यह नियुक्ति सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ गंभीरता को भी दर्शाती है।