Ramadan 2026: 31 साल बाद फरवरी में रमजान, 19 फरवरी से पहला रोजा; जानें सहरी-इफ्तार का समय
Ramadan 2026 की शुरुआत 19 फरवरी से। 31 साल बाद फरवरी में रमजान का आगमन। जानें सहरी-इफ्तार का समय, शब-ए-बारात से ईद तक की पूरी इस्लामी टाइमलाइन।
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk)। पवित्र इस्लामी महीना Ramadan 2026 का आगाज़ चांद दिखने के साथ हो गया है। बुधवार शाम चांद नजर आने के बाद गुरुवार 19 फरवरी से पहला रोजा रखा जाएगा। इसी रात से मस्जिदों में तरावीह की नमाज शुरू हो गई।
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स्लामी विद्वानों ने रमजान की फजीलत और बरकतों पर प्रकाश डालते हुए सभी से अमन, भाईचारे और इंसानियत के साथ इबादत करने की अपील की।
19 फरवरी को पहला रोजा, नोट करें समय
तिथि दिन सहरी इफ्तार
19 फरवरी गुरुवार सुबह 5:40 बजे शाम 4:59 बजे
फरवरी में दिन छोटे होने के कारण सहरी और इफ्तार के बीच का समय अपेक्षाकृत कम रहेगा, जिससे रोजेदारों को शारीरिक रूप से कुछ सहूलियत मिलेगी।
31 साल बाद फरवरी में रमजान
इस्लामी कैलेंडर के अनुसार रमजान हर साल लगभग 10–11 दिन पहले आता है। करीब 33 वर्षों में यह सभी मौसमों का चक्र पूरा करता है।
1993: 23 फरवरी से रमजान
1994: 12 फरवरी से रमजान
1995: 1 फरवरी से रमजान
2026: 19 फरवरी से रमजान
इससे पहले 1995 में फरवरी में रमजान की शुरुआत हुई थी। अब लगभग 31 साल बाद फिर फरवरी में यह पवित्र महीना आया है।
रहमत, मगफिरत और निजात का महीना
रमजान को रहमत (कृपा), मगफिरत (क्षमा) और निजात (मुक्ति) का महीना कहा जाता है। इस दौरान 29 या 30 रोजे रखना हर बालिग मुसलमान पर फर्ज माना गया है।
मौलानाओं के अनुसार:
नेक अमल का सवाब 10 गुना तक बढ़ा दिया जाता है।
फर्ज अमल का सवाब 70 गुना तक मिलता है।
रोजा इंसान को सब्र, आत्मसंयम और इंसानियत की सीख देता है।
रोजा रखने से भूख-प्यास का एहसास होता है, जिससे गरीबों और जरूरतमंदों की मदद का जज्बा मजबूत होता है। यही वजह है कि रमजान में जकात और सदका देने की परंपरा भी बढ़ जाती है।
रमजान से पहले शब-ए-बारात
रमजान से पूर्व तीन फरवरी को Shab-e-Barat अकीदत के साथ मनाई जाएगी। इस दिन कब्रिस्तानों में फातिहा पढ़ी जाती है और मगफिरत की दुआ मांगी जाती है।
2030 और 2063 में बनेगा दुर्लभ संयोग
विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2030 और 2063 में एक ही सौर वर्ष में दो बार रमजान पड़ सकता है। 2030 में पहला रमजान जनवरी में और दूसरा दिसंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू होने की संभावना है।
अमन और इंसानियत का पैगाम
रमजान केवल इबादत का महीना नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, अनुशासन और समाज में सकारात्मक बदलाव का अवसर भी है। इस महीने में लोग बुराइयों से दूर रहकर नेक रास्ते पर चलने की कोशिश करते हैं। अंत में उलेमाओं ने दुआ की कि अल्लाह सभी को रमजान की बरकतों से नवाजे और मुल्क में अमन-चैन कायम रखे।
31 साल बाद अद्भुत संयोग, शब-ए-बारात से आशूरा तक की पूरी टाइमलाइन
लगभग 31 वर्ष बाद रमजान फरवरी माह में शुरू होगा, जिससे रोजेदारों को ठंडे मौसम और छोटे दिनों का लाभ मिलेगा। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार, 18 फरवरी कोचांद दिखने के साथ ही रमजान (Ramdan 2026) का आगाज हो गया। 19 फरवरी से पहला रोजा रखा जायेगा। इससे पूर्व वर्ष 1995 में 1 फरवरी से रमजान की शुरुआत हुई थी। इस्लामी विद्वान मौलाना के अनुसार, रमजान हर वर्ष लगभग 10–11 दिन पहले आता है और लगभग 33 वर्षों में सभी मौसमों का चक्र पूरा करता है। इसी कारण यह कभी भीषण गर्मी, कभी बरसात और कभी सर्दियों के मौसम में पड़ता है। मौलाना अहमद अली खान रजवी ने बताया कि फरवरी के तीसरे सप्ताह में पवित्र माह रमजान शुरू होने की प्रबल संभावना है।
इस बार रोजों के दौरान सहरी और इफ्तार के बीच का समय अपेक्षाकृत कम रहेगा, जिससे रोजेदारों को शारीरिक रूप से सहूलियत मिलेगी। रमजान की असल खूबसूरती मौसम में नहीं, बल्कि उस इबादत, इंसानियत और आत्मसंयम की ट्रेनिंग में है, जो इस पाक महीने को खास बनाती है। रमजान (Ramzan 2026) को लेकर मस्जिद कमेटियां भी सक्रिय हो गई हैं। तरावीह की नमाज के लिए हाफिजों से संपर्क किया जा रहा है और तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
रमजान से पहले शब-ए-बारात
रमजान से पूर्व शब-ए-बारात 3 फरवरी को अकीदत और इबादत के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर कब्रिस्तानों में फातिहा पढ़ी जाएगी और अल्लाह से मगफिरत की दुआ मांगी जायेगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2030 और 2063 में भी एक ही सौर वर्ष में दो बार रमजान पड़ने की दुर्लभ स्थिति बनेगी।
फरवरी में रमजान पड़ने की दुर्लभ घटनाएं
1965 : एक ही ग्रेगोरियन वर्ष में दो बार रमजान
1993 : 23 फरवरी से रमजान
1994 : 12 फरवरी से रमजान
1995 : 1 फरवरी से रमजान
2026 : 19 या 20 फरवरी से रमजान (मार्च में समाप्त)
प्रमुख इस्लामी तिथियां (संभावित)
3 फरवरी : शब-ए-बारात
19 फरवरी : रमजान की शुरुआत
17 मार्च : लैलतुल क़द्र
20/21 मार्च : ईद-उल-फितर
26 मई : यौम-ए-अरफा
27/28 मई : ईद-उल-अजहा
17/18 जून : इस्लामी नववर्ष (हिजरी)
25/26 जून : आशूरा






