बोकारो ट्रेजरी स्कैम: 10 साल पहले रिटायर SI के नाम पर निकाले 4.29 करोड़, पत्नी के खाते में भेजता रहा पैसा
बोकारो ट्रेजरी स्कैम में CID की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। 2016 में रिटायर हुए सब इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह की जन्मतिथि और बैंक अकाउंट बदलकर 4.29 करोड़ रुपये की निकासी की गई। आरोपी अकाउंटेंट कौशल कुमार पांडेय अपनी पत्नी अन्नू पांडेय के खाते में सरकारी पैसा ट्रांसफर करता रहा।
HighLights:
- 2016 में रिटायर हुए सब इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह के नाम पर 2026 तक वेतन निकाला जाता रहा
- मुख्य आरोपी अकाउंटेंट कौशल कुमार पांडेय ने डिजिटल रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर जन्मतिथि बदल दी
- असली बैंक खाते की जगह पत्नी अन्नू पांडेय का बैंक अकाउंट सिस्टम में दर्ज किया गया
- तीन वित्तीय वर्षों में 4.29 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी हुई
- मामले की जांच CID कर रही है और विभागीय मिलीभगत की भी जांच जारी है
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड के बहुचर्चित बोकारो ट्रेजरी स्कैम की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की जांच में पता चला है कि इस करोड़ों रुपये के महाघोटाले को अंजाम देने के लिए एक ऐसे पुलिस अधिकारी के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, जो करीब दस साल पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके थे।
यह भी पढ़ें: बिहार: भरत तिवारी एनकाउंटर का सच खोलेगा मोबाइल? भोजपुर के भरत तिवारी की श्रद्धांजलि सभा 30 को
जांच एजेंसी के मुताबिक, झारखंड पुलिस के सब इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह जुलाई 2016 में सेवा से रिटायर हो चुके थे। नियम के अनुसार, उनके रिटायरमेंट के बाद वेतन भुगतान पूरी तरह बंद हो जाना चाहिए था। लेकिन बोकारो एसपी कार्यालय में तैनात अकाउंटेंट कौशल कुमार पांडेय ने सरकारी डिजिटल रिकॉर्ड में कथित रूप से ऐसी हेराफेरी की कि उपेंद्र सिंह सरकारी सिस्टम में मार्च 2026 तक कार्यरत कर्मचारी के रूप में दिखाई देते रहे।
जन्मतिथि बदलकर बढ़ा दी सेवा अवधि
CID की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने उपेंद्र सिंह की जन्मतिथि और सेवा से संबंधित दस्तावेजों में बदलाव कर उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि आगे बढ़ा दी। इस बदलाव के कारण सरकारी पोर्टल और ट्रेजरी सिस्टम में उपेंद्र सिंह सक्रिय कर्मचारी के रूप में दर्ज रहे और उनके नाम पर नियमित रूप से वेतन स्वीकृत होता रहा।
असली बैंक खाते की जगह पत्नी का खाता जोड़ा
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी कौशल कुमार पांडेय ने उपेंद्र सिंह के जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) नंबर SWN/POL/291 का इस्तेमाल किया। इसके बाद उनके वास्तविक बैंक खाते को सिस्टम से हटाकर अपनी पत्नी अन्नू पांडेय का बैंक खाता दर्ज कर दिया गया।इस हेराफेरी के कारण ट्रेजरी से निकलने वाला सरकारी पैसा सीधे आरोपी की पत्नी के खाते में पहुंचता रहा और विभागीय स्तर पर किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी।
तीन साल में ऐसे निकाले गए करोड़ों रुपये
CID की जांच में सामने आए आंकड़ों के अनुसार—
वित्तीय वर्ष 2023-24 में 3 किस्तों में 28,25,808 रुपये निकाले गए।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में 31 बार में 1,65,81,668 रुपये की निकासी हुई।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 2,35,63,531 रुपये अवैध रूप से ट्रांसफर किए गए।
इस तरह कुल मिलाकर 4 करोड़ 29 लाख रुपये से अधिक की राशि सरकारी खजाने से निकाल ली गई।
CID के निशाने पर सिस्टम और जिम्मेदार अधिकारी
इतने बड़े वित्तीय घोटाले के सामने आने के बाद अब CID इस बात की जांच कर रही है कि आखिर एक दशक तक सरकारी सिस्टम में यह फर्जीवाड़ा कैसे चलता रहा। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति का खेल था या फिर विभाग के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही या मिलीभगत भी इसमें शामिल थी।
डिजिटल निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
बोकारो ट्रेजरी स्कैम ने सरकारी वित्तीय निगरानी व्यवस्था और डिजिटल सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में सामने आए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह झारखंड के सबसे बड़े सरकारी वित्तीय घोटालों में से एक माना जाएगा।फिलहाल CID पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस महाघोटाले से जुड़े कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।






