बांग्लादेश : 20 साल बाद सत्ता में लौटी BNP, 18 साल के निर्वासन से लौटे तारिक रहमान बन सकते हैं प्रधानमंत्री

बांग्लादेश के आम चुनाव में 20 साल बाद BNP की ऐतिहासिक वापसी। 18 साल के निर्वासन से लौटे तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे। अवामी लीग बाहर, जमात ने लगाए धांधली के आरोप

बांग्लादेश : 20 साल बाद सत्ता में लौटी BNP, 18 साल के निर्वासन से लौटे तारिक रहमान बन सकते हैं प्रधानमंत्री
राजनीति के नायक बने तारिक रहमान।
  • BNP के 20 साल का सूखा खत्म: सत्ता में शानदार वापसी

नई दिल्ली/ढाका(Threesocieties.com Desk)। बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। 20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद Bangladesh Nationalist Party (बीएनपी) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए सत्ता में वापसी कर ली है। छात्र आंदोलन के बाद 5 अगस्त 2024 को Sheikh Hasina की अगुवाई वाली सरकार के पतन के बाद हुए पहले आम चुनाव में जनता ने बीएनपी को दो-तिहाई बहुमत दिया है।

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299 सीटों पर चुनाव, BNP गठबंधन को 212 सीटें

18 साल के निर्वासन से लौटे पार्टी अध्यक्ष Tarique Rahman अब देश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं।  बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 299 संसदीय सीटों पर हुए चुनाव में बीएनपी और उसके सहयोगियों को 212 सीटें मिली हैं। सामान्य बहुमत के लिए 151 सीटें जरूरी थीं। पाकिस्तान के साथ निकटता रखने वाली Jamaat-e-Islami नीत गठबंधन को 77 सीटें मिलीं, जबकि छात्र आंदोलन से उभरी नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) महज 6 सीटों पर सिमट गई। Awami League इस चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकी, क्योंकि उस पर चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

18 महीने की अंतरिम सरकार का अंत

नई सरकार के गठन के साथ ही Muhammad Yunus के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का लगभग 18 महीने का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। यह चुनाव ऐसे समय हुआ, जब देश राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन ने सत्ता परिवर्तन की नींव रखी थी।

18 साल बाद स्वदेश वापसी, पहली बार पीएम पद की दौड़ में

60 वर्षीय तारिक रहमान दिसंबर में लंदन से ढाका लौटे थे। उन्होंने ढाका-17 और बोगुरा-6 सीटों से जीत दर्ज की है। वे पूर्व राष्ट्रपति Ziaur Rahman और पूर्व प्रधानमंत्री Khaleda Zia के पुत्र हैं। मां खालिदा जिया के निधन के बाद उन्होंने पार्टी की कमान संभाली थी। बीएनपी ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि जीत की स्थिति में तारिक रहमान को प्रधानमंत्री बनाया जाएगा। हालांकि पार्टी ने समर्थकों से संयम बरतने और जश्न न मनाने की अपील की है।

जनमत संग्रह में 60% समर्थन

13वें संसदीय चुनाव के साथ 84 सूत्रीय सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह भी कराया गया। करीब 60% मतदाताओं ने संवैधानिक संशोधन से जुड़े प्रस्तावों के पक्ष में मतदान किया। 12.7 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से लगभग 60% ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

हार के बाद धांधली के आरोप

जमात-ए-इस्लामी और एनसीपी ने मतगणना में हेरफेर और देरी के आरोप लगाए हैं। जमात ने चेतावनी दी है कि यदि जनादेश छीना गया तो वह बड़े पैमाने पर आंदोलन करेगी।

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर क्या असर?

बीएनपी की जीत पर भारत सहित अमेरिका, चीन और पाकिस्तान ने बधाई दी है। विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार के सामने आर्थिक पुनर्निर्माण, अल्पसंख्यक सुरक्षा और भारत-बांग्लादेश संबंधों को संतुलित रखने की बड़ी चुनौती होगी।

एक नजर में चुनाव

299 सीटों पर मतदान

151 सीटों पर बहुमत आवश्यक

350 सदस्यीय संसद (300 प्रत्यक्ष, 50 महिला आरक्षित)

50 दलों के 1755 उम्मीदवार

273 निर्दलीय प्रत्याशी

12.7 करोड़ मतदाता

राजनीतिक मायने

20 साल बाद बीएनपी की सत्ता में वापसी सिर्फ चुनावी जीत नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति में नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। छात्र आंदोलन के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों ने देश की सत्ता संरचना को पूरी तरह बदल दिया है।अब नजर इस बात पर है कि तारिक रहमान की अगुवाई में बांग्लादेश स्थिरता, आर्थिक सुधार और क्षेत्रीय संतुलन की दिशा में कितनी तेजी से कदम बढ़ाता है।