पश्चिम बंगाल: कोयला घोटाले पर ईडी का बड़ा एक्शन: अनूप माजी उर्फ लाला की 100 करोड़ से ज्यादा संपत्ति जब्त
ईडी ने कोयला माफिया अनूप माजी उर्फ लाला की 100.44 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड में अवैध खनन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में अब तक 322.71 करोड़ की संपत्ति अटैच। हवाला नेटवर्क और 2742 करोड़ की कमाई का बड़ा खुलासा।
- 2742 करोड़ की कमाई का खुलासा
- 100.44 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त
रांची (Threesocieties.com Desk)। कोयला घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (प्रवर्तन निदेशालय) ने बड़ा कदम उठाते हुए कोयला माफिया अनूप माजी उर्फ लाला और उसके सहयोगियों से जुड़ी 100.44 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त कर ली है। यह कार्रवाई ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीजहोल्ड क्षेत्र में अवैध खनन और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है।
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ईडी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पोस्ट के जरिए अधिकृत बयान जारी कर इसकी पुष्टि की। एजेंसी के अनुसार, इस मामले में अब तक कुल 322.71 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की जा चुकी है।
आठ जनवरी को कोलकाता और दिल्ली में छापेमारी
इससे पहले 8 जनवरी को ईडी ने कोलकाता और दिल्ली में आरोपितों से जुड़े 10 परिसरों पर छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान जब्त दस्तावेज और डिजिटल सबूतों से अपराध की आय से अर्जित संपत्तियों की विस्तृत जानकारी मिली।
2742 करोड़ की अवैध कमाई का खुलासा
ईडी की जांच में सामने आया कि अनूप माजी उर्फ लाला के नेतृत्व वाले सिंडिकेट ने बड़े पैमाने पर अवैध खनन और कोयले की चोरी कर लगभग 2742 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की। जांच के दौरान जब्त रजिस्टर, डिजिटल रिकॉर्ड, टैली डेटा और व्हाट्सऐप कम्युनिकेशन के विश्लेषण से संगठित नकदी लेन-देन और हवाला चैनलों के जरिए लेयरिंग का खुलासा हुआ।
“लाला पैड” से चलता था अवैध ट्रांसपोर्ट सिस्टम
जांच में पता चला कि अनूप माजी सिंडिकेट द्वारा नकली परिवहन चालान जारी किए जाते थे, जिन्हें आमतौर पर “लाला पैड” कहा जाता था। ये चालान फर्जी फर्मों के नाम पर टैक्स इनवॉइस की तरह इस्तेमाल होते थे। ट्रांसपोर्टरों को 10 या 20 रुपये का नोट दिया जाता था, जिसकी फोटो ट्रक की नंबर प्लेट के पास रखकर खींची जाती थी। यह फोटो व्हाट्सऐप के जरिए रास्ते में मौजूद अधिकारियों को भेजी जाती थी, जो संकेत होता था कि वाहन को न रोका जाए।
हवाला नेटवर्क से चलता था पूरा खेल
ईडी ने खुलासा किया कि पूरे घोटाले का संचालन हवाला नेटवर्क के जरिये किया जा रहा था। लेन-देन के दौरान भेजने वाला एक यूनिक कोड साझा करता था, जो अक्सर किसी करेंसी नोट का सीरियल नंबर होता था। भुगतान के समय वही नोट दिखाकर पहचान सत्यापित की जाती थी। इस तरह बिना किसी औपचारिक बैंकिंग रिकॉर्ड के करोड़ों रुपये का लेन-देन किया जाता था।
कंपनियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
अस्थायी रूप से जब्त की गई संपत्तियों में शाकंभरी इस्पात एंड पावर लिमिटेड और गगन फेरोटेक लिमिटेड जैसी बेनिफिशियरी कंपनियों के नाम पर अचल संपत्ति, फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड निवेश शामिल हैं। ईडी के अनुसार, स्टील और आयरन सेक्टर की कुछ कंपनियों ने अवैध रूप से खनन किए गए कोयले को नकदी में खरीदकर अपराध से हुई कमाई को वैध दिखाने में मदद की।
ईडी की जांच जारी
ईडी का कहना है कि वह इस आर्थिक अपराध की हर परत को खोल रही है, ताकि असली लाभार्थियों की पहचान की जा सके और अवैध कमाई के पूरे नेटवर्क को उजागर किया जा सके। जांच के दायरे में हवाला ऑपरेटर, बिचौलिये और फर्जी कंपनियों से जुड़े अन्य लोग भी हैं। कोयला घोटाले में यह अब तक की बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है, जिससे अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग के नेटवर्क पर शिकंजा कसता दिख रहा है।






