Dhanbad Mayor Election 2026: “चुनाव या सामाजिक विभाजन?” मेयर प्रत्याशी को ले कृष्णा अग्रवाल ने लगाये आरोप
धनबाद मेयर चुनाव 2026 को लेकर भाजपा में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष कृष्णा अग्रवाल ने विधायक राज सिन्हा पर राजनीतिक साजिश के गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे चुनावी समीकरण और तेज हो गए हैं।
- धनबाद मेयर चुनाव में बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
धनबाद। धनबाद नगर निगम चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। भाजपा नेता एवं धनबाद जिला मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष,सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता कृष्णा अग्रवाल ने पांच व सात फरवरी को सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मेयर पद के उम्मीदवारों को लेकर लिया गया हालिया निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि “सुनियोजित राजनीतिक साजिश” का हिस्सा है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि धनबाद विधायक राज सिन्हा की रणनीति के तहत निवर्तमान महापौर चंद्रशेखर अग्रवाल को हराने के उद्देश्य से उनके ही समाज से दूसरे प्रत्याशी संजीव अग्रवाल को मैदान में उतारा गया है, जिससे पारंपरिक मतदाताओं में विभाजन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
भाजपा के समर्थन निर्णय के बाद बदले समीकरण
धनबाद नगर निगम चुनाव में भाजपा द्वारा संजीव अग्रवाल को समर्थन देने के बाद स्थानीय राजनीति में लंबे समय से चल रही गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पार्टी के भीतर कई प्रभावशाली नेताओं के बीच समन्वय के बजाय वर्चस्व की राजनीति हावी होती जा रही है, जिसका असर सीधे चुनावी रणनीति पर दिखाई दे रहा है।
कृष्णा अग्रवाल ने अपने बयान में कहा कि चंद्रशेखर अग्रवाल तीन दशकों से अधिक समय तक भाजपा में सक्रिय रहे हैं और पिछले चुनाव में पार्टी समर्थन न मिलने के बावजूद अपने दम पर जीत दर्ज कर चुके हैं। उनके अनुसार, इस बार भी उन्हें हराने के लिए योजनाबद्ध तरीके से राजनीतिक समीकरण बनाये गये हैं।
मारवाड़ी समाज में बढ़ी दुविधा
इस घटनाक्रम के बाद मारवाड़ी समाज और व्यवसायी वर्ग में भी दुविधा की स्थिति पैदा होने की बात कही जा रही है। कृष्णा अग्रवाल का आरोप है कि धनबाद, चास और चिरकुंडा समेत कई नगर निकायों में समाज के अनुभवी प्रत्याशियों की उपेक्षा की जा रही है, जिससे पार्टी की आंतरिक राजनीति और अधिक उजागर हो रही है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
धनबाद की राजनीति में सांसद, विधायक और अन्य प्रभावशाली राजनीतिक केंद्रों के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा और गुटीय खींचतान को भी इस पूरे विवाद की प्रमुख वजह माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के अंदरूनी मतभेदों का असर नगर निगम चुनाव के परिणामों पर भी पड़ सकता है।
जनता के फैसले पर टिकी नजर
मेयर चुनाव को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सबकी नजर मतदाताओं पर टिकी है। स्थानीय राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि अंततः चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि यह मुकाबला विकास बनाम रणनीति का रहा या फिर गुटीय राजनीति का असर ज्यादा प्रभावी साबित हुआ।धनबाद नगर निगम चुनाव 2026 के आगे बढ़ने के साथ-साथ राजनीतिक बयानबाजी और रणनीतिक समीकरणों में और तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।






