बिहार: 32 साल पुराने केस में गिरफ्तारी के बाद बिगड़ी सांसद पप्पू यादव की तबीयत, IGIMS से PMCH और फिर IGIC रेफर
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की 32 साल पुराने मामले में गिरफ्तारी के बाद तबीयत बिगड़ गई। IGIMS से PMCH और फिर IGIC रेफर किए जाने के बीच इलाज में लापरवाही, सिविल ड्रेस में गिरफ्तारी और कानूनी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
- आधी रात की गिरफ्तारी से सियासत गरमाई
- इलाज में लापरवाही और कानूनी प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
- इलाज में लापरवाही के आरोप, स्ट्रेचर पर रात गुजारने का दावा
- कोर्ट में आज पेशी, जमानत पर टिकी निगाहें
पटना (Threesocieties.com Desk)। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया है। 32 साल पुराने एक मामले में शुक्रवार देर रात हुई गिरफ्तारी के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके चलते उन्हें पहले IGIMS, फिर PMCH और बाद में IGIC रेफर किया गया।
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बहुत शानदार बिहार पुलिस
— Pappu Yadav (@pappuyadavjapl) February 6, 2026
हम NEET छात्रा न्याय की लड़ाई लड़े
बिहार पुलिस के पेट में दर्द हो गया
हमें गिरफ्तार करने पटना आवास पहुंच गई
लेकिन इससे पप्पू यादव न झुकेगा न चुप होगा
बेईमानों की कारगुजारियों को बेनकाब करके
रहेंगे! जेल भेजो या,फांसी दो पप्पू रुकेगा नहीं
इस पूरी कार्रवाई को लेकर जहां विपक्ष ने सरकार और पुलिस पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं सांसद के समर्थकों ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है।
आधी रात की गिरफ्तारी, सिविल ड्रेस पर उठा सवाल
जानकारी के मुताबिक, पटना पुलिस शुक्रवार रात करीब 11.45 बजे उत्तरी मंदिरी स्थित सांसद के आवास पर पहुंची। करीब दो से ढाई घंटे तक पुलिस और समर्थकों के बीच तनाव बना रहा। पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के दौरान कई पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में थे, जो प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। गिरफ्तारी से पहले सांसद ने अपनी खराब तबीयत का हवाला देते हुए कार्रवाई का विरोध भी किया।
IGIMS से PMCH और फिर IGIC: इलाज को लेकर विवाद
गिरफ्तारी के बाद पुलिस सांसद को मेडिकल जांच के लिए IGIMS लेकर गई। पप्पू यादव के निजी सचिव और उनके आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से दावा किया गया कि:
पूरी रात बेड नहीं मिला
सांसद को स्ट्रेचर पर रखा गया
इलाज में गंभीर लापरवाही बरती गई
शनिवार सुबह उन्हें PMCH शिफ्ट किया गया, जहां से स्थिति को देखते हुए IGIC रेफर किया गया। इलाज को लेकर उठे सवालों ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
समर्थकों का हंगामा, सड़क पर लेटे लोग
गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस उन्हें वाहन में बैठाकर ले जाने लगी, तो पप्पू यादव भावुक हो गए और लड़खड़ाते नजर आए।यह दृश्य देखते ही समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा। कई समर्थक पुलिस वाहन के आगे सड़क पर लेट गए और नारेबाजी करने लगे।हालात काबू में लाने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी।
क्या है 32 साल पुराना मामला
पुलिस के अनुसार, मामला गर्दनीबाग थाना कांड संख्या 552/1995 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल ने आरोप लगाया था कि उनका मकान धोखाधड़ी से किराए पर लेकर उसे पप्पू यादव के कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया गया। मामले में लंबे समय से अदालती कार्यवाही चल रही थी। हाल ही में MP-MLA कोर्ट ने कुर्की का आदेश जारी किया था। कोर्ट में उपस्थित न होने पर गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ।
वकील ने उठाये कानूनी सवाल
पप्पू यादव के अधिवक्ता शिवनंदन भारती ने पुलिस कार्रवाई को कानून के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि: सांसद पहले से जमानत पर थे, धारा 82 की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, सीधे धारा 83 के तहत कुर्की और गिरफ्तारी की गई जो पूरी तरह अवैधानिक है।
कोर्ट में आज पेशी, जमानत या जेल का फैसला
अब सभी की निगाहें आज होने वाली कोर्ट पेशी पर टिकी हैं। पप्पू यादव की कानूनी टीम जमानत के लिए अर्जी दाखिल करेगी। अगर राहत नहीं मिली तो उन्हें जेल जाना पड़ सकता है, हालांकि स्वास्थ्य को देखते हुए कैदी वार्ड में रखने का विकल्प भी खुला है।
स्वास्थ्य बनाम कानून: सियासत के बीच फंसा मामला
एक तरफ कानून अपनी प्रक्रिया पूरी कर रहा है, तो दूसरी तरफ सांसद की बिगड़ती तबीयत और राजनीतिक आरोप इस केस को और जटिल बना रहे हैं।कोर्ट का फैसला न सिर्फ पप्पू यादव का भविष्य तय करेगा, बल्कि बिहार की राजनीति पर भी इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है।






