‘एकला चलो’ की रणनीति पर कांग्रेस: पश्चिम बंगाल में TMC-BJP को देगी सीधी टक्कर, केरल में लेफ्ट से दूरी का बड़ा दांव

कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 अकेले लड़ने का फैसला किया है। वामपंथी दलों और तृणमूल कांग्रेस से गठबंधन समाप्त कर पार्टी ने केरल चुनाव को ध्यान में रखते हुए नई रणनीति अपनाई है।

‘एकला चलो’ की रणनीति पर कांग्रेस: पश्चिम बंगाल में TMC-BJP को देगी सीधी टक्कर, केरल में लेफ्ट से दूरी का बड़ा दांव
पश्चिम बंगाल में 2026 चुनाव अकेले लड़ेगी कांग्रेस ।
  • वामपंथी दलों और तृणमूल कांग्रेस से गठबंधन समाप्त 
  • केरल चुनाव में भाजपा के राजनीतिक विमर्श को रोकने की रणनीति

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk)। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा मोड़ लेते हुए कांग्रेस ने वर्ष 2026 का विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का फैसला कर लिया है। लंबे समय से चले आ रहे वामपंथी दलों के साथ गठबंधन को समाप्त करते हुए पार्टी ने यह भी साफ कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) से किसी तरह का तालमेल नहीं होगा। इस फैसले के साथ कांग्रेस ने बंगाल में ‘एकला चलो’ की रणनीति पर लौटने का ऐलान कर दिया है।

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कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने बंगाल कांग्रेस के अधिकांश नेताओं की राय पर मुहर लगाते हुए यह निर्णय लिया। पार्टी का मानना है कि गठबंधनों के कारण न सिर्फ जमीनी स्तर पर संगठन कमजोर हुआ, बल्कि कार्यकर्ताओं का मनोबल भी लगातार गिरता गया।

 बंगाल की सभी 294 सीटों पर चुनाव लड़ेगी कांग्रेस

बंगाल कांग्रेस के प्रभारी और पार्टी महासचिव गुलाम अहमद मीर ने घोषणा की कि कांग्रेस राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। उन्होंने कहा कि गठबंधन के प्रयोग से पार्टी को कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिला, उलटे संगठनात्मक नुकसान जरूर हुआ।गुलाम अहमद मीर ने स्पष्ट किया कि अकेले चुनाव लड़ने से पार्टी कैडर में नई ऊर्जा आएगी और संगठन को दोबारा मजबूत करने का मौका मिलेगा।

कांघ्रेस हाईकमान की बैठक में लगी मुहर

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास 10 राजाजी मार्ग पर हुई अहम बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार, वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी, और राज्य से कांग्रेस के एकमात्र सांसद ईशा खान चौधरी समेत कई दिग्गज नेता मौजूद थे।

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में अधिकांश नेताओं ने साफ कहा कि बंगाल की जमीनी राजनीति में कांग्रेस को दोबारा खड़ा करने के लिए एकला चलो नीति बेहद जरूरी है।

 TMC के खिलाफ नाराजगी, BJP की सीमित स्वीकार्यता

पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ कांग्रेस पर्यवेक्षक सुदीप राय बर्मन ने भी इस रणनीति का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि राज्य में ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी है, लेकिन भाजपा को अभी पूरे प्रदेश में व्यापक स्वीकार्यता नहीं मिली है। ऐसे में कांग्रेस के लिए राजनीतिक स्पेस बन सकता है।

 केरल चुनाव भी बड़ी वजह

कांग्रेस के इस फैसले के पीछे केरल विधानसभा चुनाव भी एक अहम कारण माना जा रहा है। पार्टी नहीं चाहती कि भाजपा, कांग्रेस और लेफ्ट को “एक ही सिक्के के दो पहलू” के रूप में पेश करे। बंगाल में लेफ्ट से दूरी बनाकर कांग्रेस ने केरल में भाजपा के इस राजनीतिक विमर्श की धार कुंद करने की रणनीति अपनाई है।

 लेफ्ट की साख पर सवाल

बैठक में कुछ नेताओं ने यह मुद्दा भी उठाया कि माकपा के प्रदेश नेतृत्व और विवादित नेताओं से जुड़ी हालिया घटनाओं ने वामपंथी दलों की साख को नुकसान पहुंचाया है। हालांकि अधीर रंजन चौधरी ने गठबंधन जारी रखने की सलाह दी, लेकिन बहुमत की राय के आगे उनकी बात नहीं मानी गई।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा कि पार्टी नेतृत्व की मंजूरी के बाद कांग्रेस बंगाल में पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेगी और अधीर रंजन चौधरी को चुनावी चेहरे के रूप में आगे किया जाएगा।

 2021 की हार से सबक

गौरतलब है कि 2021 विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए किसी झटके से कम नहीं था। वामपंथी दलों के साथ गठबंधन के बावजूद पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी थी, जबकि 2016 में कांग्रेस ने 44 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभाई थी।