DGP नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: समय पर प्रस्ताव नहीं भेजने वाले राज्यों पर UPSC चला सकेगा अवमानना कार्यवाही

सुप्रीम कोर्ट ने DGP नियुक्ति में देरी पर सख्त रुख अपनाया है। समय पर प्रस्ताव न भेजने वाले राज्यों के खिलाफ अब UPSC अवमानना कार्यवाही शुरू कर सकेगा।

DGP नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: समय पर प्रस्ताव नहीं भेजने वाले राज्यों पर UPSC चला सकेगा अवमानना कार्यवाही
अब कार्यवाहक डीजीपी की नियुक्ति नहीं होगी।
  • कार्यवाहक DGP संस्कृति पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़
  • कहा– देरी के लिए जिम्मेदार अफसरों की तय होगी जवाबदेही

नई दिल्ली(Threesocieties.com Desk)। पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति में लगातार हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को कड़ी चेतावनी दी है। शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि राज्य सरकारें समय पर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को प्रस्ताव नहीं भेजती हैं, तो UPSC को सीधे अवमानना कार्यवाही शुरू करने का अधिकार होगा।

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गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कई राज्यों में नियमित DGP की जगह कार्यवाहक या एडहॉक DGP नियुक्त किए जाने की प्रवृत्ति पर गहरी नाराज़गी जताई। अदालत ने कहा कि यह व्यवस्था न केवल प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006) के ऐतिहासिक फैसले का उल्लंघन है, बल्कि इससे योग्य और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के अधिकार भी प्रभावित होते हैं।

 तीन महीने पहले प्रस्ताव भेजना अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि वर्ष 2018 के निर्देशों के अनुसार, किसी भी राज्य को अपने मौजूदा DGP के सेवानिवृत्त होने से कम-से-कम तीन महीने पहले UPSC को प्रस्ताव भेजना अनिवार्य है, ताकि आयोग समय रहते तीन वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल तैयार कर सके।लेकिन कई राज्यों द्वारा समय पर प्रस्ताव न भेजे जाने के कारण UPSC को मजबूरन कार्यवाहक DGP की व्यवस्था स्वीकार करनी पड़ रही है।

 UPSC की आपत्तियों को मिला समर्थन

UPSC ने अदालत को बताया कि देर से प्रस्ताव भेजे जाने के कारण कई योग्य अधिकारियों को DGP पद के लिए विचार किए जाने का अवसर ही नहीं मिल पाता। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने UPSC की चिंताओं का समर्थन करते हुए कहा— “हम UPSC द्वारा उठाई गई आपत्तियों से पूर्णतः सहमत हैं। प्रकाश सिंह मामले के निर्देशों का उल्लंघन न हो, इसके लिए UPSC को यह अधिकार दिया जाता है कि वह राज्यों को समय पर प्रस्ताव भेजने के लिए रिमाइंडर दे। यदि इसके बावजूद चूक होती है, तो UPSC इस न्यायालय में अवमानना याचिका दायर कर सकता है।”

तेलंगाना मामले में आया अहम आदेश

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने UPSC द्वारा दायर उस याचिका पर दिया, जो तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ थी। हाईकोर्ट ने राज्य में DGP चयन प्रक्रिया चार सप्ताह में पूरी करने का निर्देश दिया था।सुनवाई के दौरान CJI ने टिप्पणी की कि यदि UPSC की आपत्तियाँ पूरी तरह मान ली जातीं, तो तेलंगाना में कोई सक्रिय DGP ही नहीं बचता। साथ ही कोर्ट ने UPSC से यह भी पूछा कि उसने पहले राज्य सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका क्यों दायर नहीं की।

चार सप्ताह का अतिरिक्त समय, लेकिन चेतावनी बरकरार

अंततः सुप्रीम कोर्ट ने UPSC को हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि UPSC की आपत्तियाँ कहीं-न-कहीं राज्यों को नियमित DGP नियुक्त न करने में अप्रत्यक्ष रूप से मदद कर रही हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के मूल निर्देशों की भावना के खिलाफ है।अदालत ने यह भी माना कि तेलंगाना अकेला राज्य नहीं है—देश के कई अन्य राज्यों में भी DGP नियुक्ति में देरी कर कार्यवाहक DGP तैनात किए जा रहे हैं। भविष्य में ऐसी देरी पर सीधे जिम्मेदारी तय की जायेगी।