धनबादः झामुमो का 54वां स्थापना दिवस पर सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा संदेश: बाहर से आकर बसे लोग भी हैं झारखंडी

झामुमो के 54वें स्थापना दिवस पर धनबाद में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बड़ा बयान—बाहर से आकर बसे लोग भी झारखंडी। जानें स्थापना दिवस समारोह की पूरी खबर।

धनबादः झामुमो का 54वां स्थापना दिवस पर सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा संदेश: बाहर से आकर बसे लोग भी हैं झारखंडी
समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व अन्य।

धनबाद (Threesocieties.com Desk)। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बुधवार को धनबाद के ऐतिहासिक रणधीर वर्मा स्टेडियम (गोल्फ ग्राउंड) में अपना 54वां स्थापना दिवस पूरे जोश और शक्ति प्रदर्शन के साथ मनाया। इस मौके पर मुख्यमंत्री और झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता को संबोधित करते हुए कई अहम राजनीतिक और सामाजिक संदेश दिए।

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन धनबाद हवाईपट्टी पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। 4 फरवरी 1973 को इसी धरती पर झामुमो की स्थापना हुई थी और आज उसी ऐतिहासिक स्थल पर हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में पार्टी ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया।

‘बाहर से आकर बसे लोग भी झारखंडी’—सीएम का बड़ा बयान

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि झारखंड सिर्फ मूलवासियों और आदिवासियों का ही नहीं, बल्कि उन सभी लोगों का है जो बाहर से आकर यहां बसे और इस मिट्टी को अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने कहा— “जन्म देने वाली मां से पालन करने वाली मां का दर्जा बड़ा होता है। जो लोग बाहर से आकर यहां बसे हैं, वे भी आज खुद को झारखंडी कहने में गर्व महसूस करते हैं।” यह बयान झामुमो की बदली हुई राजनीतिक सोच और समावेशी रणनीति को दर्शाता है।

‘जोहार’ अब झारखंड तक सीमित नहीं

सीएम सोरेन ने कहा कि ‘जोहार’ अब सिर्फ झारखंड का अभिवादन नहीं रहा, बल्कि देश-दुनिया में इसकी पहचान बनी है। उन्होंने कहा—“लंदन में भी लोग जोहार बोल रहे हैं। यह हमारी संस्कृति और सम्मान का प्रतीक बन चुका है।”

दिशोम गुरु शिबू सोरेन को किया याद

हेमंत सोरेन ने झामुमो के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि 4 फरवरी सिर्फ स्थापना दिवस नहीं, बल्कि गुरुजी के सपनों को पूरा करने का संकल्प लेने का दिन भी है। गौरतलब है कि 4 अगस्त 2025 को शिबू सोरेन का निधन हुआ था।

झारखंड आंदोलन और बलिदान का जिक्र

सीएम ने भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, बिनोद बिहारी महतो और ए.के. राय जैसे महान नेताओं को याद करते हुए कहा कि इन्हीं के बलिदान से झारखंड को अलग पहचान मिली। उन्होंने कहा कि झारखंड ने पूरे देश को चलाने में योगदान दिया, लेकिन बदले में यहां के लोगों को गरीबी, शोषण और अशिक्षा ही मिली। इसी अन्याय के खिलाफ अलग राज्य का आंदोलन शुरू हुआ।

भाजपा पर निशाना, झामुमो की सत्ता वापसी का दावा

हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य गठन के बाद कहा गया कि “ये लोग राज्य नहीं चला सकते”, लेकिन 15-16 साल बाद झामुमो ने भाजपा से सत्ता छीनकर यह साबित कर दिया कि झारखंड को उसके अपने लोग ही बेहतर चला सकते हैं।

‘अबुआ सरकार’ की उपलब्धियां गिनाईं

मुख्यमंत्री ने कहा कि अबुआ सरकार बनने के बाद—

बंद पड़े स्कूल दोबारा खोले गये

शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया

बच्चे विदेशों तक पढ़ाई के लिए जा रहे हैं

26 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई

हालांकि उन्होंने माना कि कुपोषण जैसी समस्याओं से पूरी तरह बाहर निकलने में अभी समय लगेगा।

स्थानीयों के हक की बात, 75% आरक्षण कानून का जिक्र

धनबाद के संदर्भ में सीएम ने आउटसोर्सिंग के जरिए बाहरी लोगों की भर्ती पर चिंता जताई और कहा कि राज्य सरकार ने 75 प्रतिशत स्थानीय आरक्षण का कानून बनाया है, ताकि रोजगार में स्थानीय युवाओं का हक सुरक्षित रहे।

‘गांव भी हमारा, शहर भी हमारा’—कार्यकर्ताओं को संदेश

सीएम ने कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा— “गांव भी हमारा, शहर भी हमारा—कोई कोना नहीं छोड़ना है। बड़ी मुश्किल से राज्य और सत्ता मिली है, इसे झारखंड विरोधी ताकतों के हाथ में दोबारा नहीं जाने देना है।” उन्होंने निकाय चुनाव और आगामी पंचायत चुनावों में पूरी ताकत झोंकने का आह्वान किया।

अग्निवीर योजना पर बड़ी घोषणा

मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि अग्निवीर योजना के तहत यदि झारखंड के किसी जवान की मृत्यु होती है, तो उसके आश्रित को झारखंड सरकार नौकरी देगी।

महंगाई पर चिंता

अंत में मुख्यमंत्री ने बढ़ती महंगाई पर चिंता जताते हुए कहा कि इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है और सरकार इसे कम करने के लिए प्रयासरत है।

समारोह में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, योगेंद्र महतो, एमएलए मथुरा प्रसाद महतो, बिनोद कुमार पांडेय, जिला अध्यक्ष लखी सोरेन, सचिव मन्नु आलम, मुकेश सिंह, चंद्र शेखर अग्रवाल समेत अन्य मौजूद थे।