Dhanbad Nikay Chunav 2026: बिहार के वोटर लिस्ट में नाम, मेयर चुनाव लड़ने को ले फंसे ‘करोड़पति’ उम्मीदवार

Dhanbad Nagar Nikay Chunav 2026 में मेयर पद के एक करोड़पति उम्मीदवार का नाम बिहार की वोटर लिस्ट में होने से विवाद गहराया। दो राज्यों की वोटर लिस्ट में नाम होने पर कानूनी कार्रवाई की आशंका।

Dhanbad Nikay Chunav 2026: बिहार के वोटर लिस्ट में नाम, मेयर चुनाव लड़ने को ले फंसे ‘करोड़पति’ उम्मीदवार
भाजपा-कांग्रेस दोनों के संपर्क में नेताजी।
  • दो राज्यों की वोटर लिस्ट में नाम होने की चर्चा से बढ़ी टेंशन
  • विरोधी कर सकते हैं कानूनी कार्रवाई

धनबाद। (Threesocieties.com Desk)। धनबाद नगर निगम चुनाव–2026 को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नामांकन प्रक्रिया के चौथे दिन शनिवार को महापौर पद के लिए जहां आठ नए नामांकन पत्र बिके, वहीं पार्षद पद के लिए 75 नामांकन पत्रों की बिक्री हुई। इसी बीच मेयर पद के एक प्रमुख और करोड़ों की संपत्ति वाले उम्मीदवार को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है।

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सूत्रों के अनुसार, संबंधित उम्मीदवार का नाम बिहार के पैतृक गांव की वोटर लिस्ट में दर्ज है, जिससे वह फिलहाल धनबाद से मेयर पद के लिए नामांकन पत्र तक नहीं खरीद पा रहे हैं। जैसे ही यह जानकारी राजनीतिक गलियारों में फैली, विरोधियों ने मामले को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।

दो जगह वोटर लिस्ट में नाम, कानूनी पेंच में उम्मीदवार

जानकार सूत्रों का कहना है कि मेयर पद के इस उम्मीदवार का नाम बिहार की वोटर लिस्ट में होने की सूचना विरोधी खेमे तक पहुंच चुकी है। बिहार से संबंधित क्षेत्र की वोटर लिस्ट धनबाद मंगाई जा रही है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, जैसे ही उम्मीदवार धनबाद से मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल करेंगे, बिहार वाली वोटर लिस्ट सार्वजनिक कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की कोशिश की जायेगी। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, एक व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों की वोटर लिस्ट में दर्ज होना अवैध है। ऐसे मामलों में संबंधित मतदाता के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।

पैसे के बल पर राजनीति करने का आरोप

बताया जा रहा है कि मेयर पद के ये उम्मीदवार झारखंड और बिहार—दोनों राज्यों में पैसे के दम पर राजनीति करने की कोशिश कर चुके हैं। बीते 10 वर्षों से वह भाजपा और कांग्रेस—दोनों दलों से विधायक टिकट पाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें सफलता नहीं मिली है।सूत्र बताते हैं कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने बिहार से चुनाव लड़ने के उद्देश्य से वहां की वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराया था। टिकट हासिल करने के लिए कई हथकंडे अपनाए गए, लेकिन नतीजा शून्य रहा।

पहले भी लड़ चुके हैं चुनाव, जमानत तक नहीं बची

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि संबंधित नेता एक बार बिहार से विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें 10 हजार वोट भी नसीब नहीं हुए। वहीं, धनबाद विधानसभा चुनाव के दौरान भी टिकट पाने के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन वहां भी निराशा हाथ लगी।अब एक बार फिर वह धनबाद नगर निगम मेयर चुनाव में किस्मत आजमाने की तैयारी में हैं। समाजसेवा के नाम पर भोज और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित कर समर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अपेक्षित समर्थन अब तक नहीं मिल पा रहा है।

 धनबाद की वोटर लिस्ट में नाम नहीं!

सूत्रों के अनुसार, बिहार से चुनाव लड़ने की तैयारी के दौरान नेताजी ने धनबाद की वोटर लिस्ट से अपना नाम कटवा दिया था और बिहार में नाम जुड़वाया था।अब हालात यह हैं कि अगर धनबाद की वोटर लिस्ट में नाम है, तो बिहार में भी दर्ज है—जो कि कानूनन गलत है। ऐसे मामलों में चुनाव आयोग द्वारा कानूनी कार्रवाई संभव है।