तेलंगाना: गोदावरी पर बनी कालेश्‍वरम लिफ्ट सिंचाई प्रोजेक्ट का काम पूरा, तीन स्टेट के CM ने किया उद्घाटन

  • वर्ल्ड की सबसे बड़ी सिंचाई प्रोजेक्ट है
  • इससे तीन राज्यों को पीने के पानी और सिंचाई के लिए पानी की किल्लत से छुटकारा मिलेगा
  • गोदावरी नदी का पानी समुद्रतल से 100 मीटर लिफ्ट कर मेडिगड्डा बांध तक पहुंचाया जायेगा
  • यहां से पानी को 6 स्टेज तक लिफ्ट किया जायेगा और कोंडापोचम्मा सागर पहुंचाया जायेगा
  • योजना से करीब 45 लाख एकड़ जमीन पर दो फसलों के लिए सिंचाई की व्यवस्था मिलेग
हैदराबाद: वर्ल्ड की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई प्रोजेक्ट गोदावरी नदी पर बनकर तैयार हो चुकी है. आंध्र प्रदेश व तेलंगाना के गवर्नर नरसिंहम गुरु, तेलंगान के सीएम के चंद्रशेखर राव, आंध्र प्रदेश के सीएम वाईएस जगनमोहन रेड्डी और महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार दोपहर एक साथ इस परियोजना का उद्घाटन किया. इस परियोजना का नाम कलेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना है. तेलंगाना सरकार ने गोदावरी नदी पर दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई योजना का निर्माण कराया है. इस परियोजना में 22 पंप हाउस है जिससे एक दिन में तीन टीएमसी पानी लेने की योजना है. इस परियोजना के तहत गोदावरी नदी का पानी समुद्रतल से 100 मीटर लिफ्ट कर मेडिगड्डा बांध तक पहुंचाया जायेगा. यहां से पानी को 6 स्टेज तक लिफ्ट किया जायेगा और कोंडापोचम्मा सागर पहुंचाया जायेगा, जिसकी ऊंचाई 618 मीटर है. इस परियोजना के पहले चरण में मेदिगड्डा, अन्नाराम, सुंडिला पंप हाउस पानी को लिफ्ट करने के लिए आंशिक रूप से तैयार किए गए हैं. दूसरे चरण में दुनिया का सबसे बड़ा भूमिगत पंप हाउस है, जो हर रोज दो टीएमसी पानी पंप करने की क्षमता रखता है. महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि कलेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना महाराष्ट्र की जनता द्वारा तेलंगाना की जनता को दिया गया एक उपहार है. तेलंगाना सरकार ने रिकॉर्ड समय में इसका निर्माण कार्य पूरा कराया है. तेलंगाना राज्य के लिए यह परियोजना बड़ी कामयाबी है. 24 माह में दुनिया की सबसे बड़ी इस सिंचाई परियोजना को पूरा किया गया है. इस परियोजना के तहत गोदावरी नदी के पानी को पहले ही मेदिगड्डा पंप हाउस तक पहुँचाया जा चुका है. मोटरों का स्विच ऑन करने पर पानी फिर से गोदावरी नदी में पहुंचाया जा सकता है, जो डिलीवरी सीटर (भूमिगत पाइप) से होते हुए ऊपरी धारा पर स्थित अन्नाराम बैराज तक पहुँचता है. परियोजना के निर्माण में लगी कंपनी MEIL के अनुसार अभी तक पूरी दुनिया में इस तरह की विशाल लिफ्ट परियोजना का निर्माण नहीं हो सका है. यह पूरी दुनिया में अव्वल और सबसे विशाल लिफ्ट परियोजना है. इस परियोजना में हर रोज 3 टीएमसी पानी पंप करने के लिए 7152 मेगावाट बिजली की जरुरत होगी. पहले चरण के तौर पर 4992 मेगावाट बिजली का इस्तेमाल 2 टीएमसी पानी पंप करने के लिए किया जा रहा है. बिजली की बुनियादी जरूरतों के लिहाज से सभी काम पूरे हो चुके हैं. पम्पिंग घरों से जुड़े सिविल कार्य को रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया है.मेडीगड्डा, अन्नाराम और सुंडिला पंप हाउस के लिए कुल 43 मशीनें स्थापित की गई हैं, प्रत्येक की क्षमता 40 मेगावाट है. लिंक -1 के ये तीन पंप हाउस लगभग 1720 मेगावाट बिजली की खपत करते हैं। पैकेज -8 में भूमिगत पंप हाउस में 7 इकाइयां (मशीनें) होंगी, जिनमें से 5 मशीनें प्रति दिन 2 टीएमसी पानी पंप (लिफ्ट) करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. इनमें से हरेक मशीन की क्षमता 139 मेगावाट है. ऐसी बड़ी पंपिंग मशीनें दुनिया में कहीं नहीं हैं. यह अंडरग्राउंड पंप हाउस कुल 973 मेगावाट बिजली की खपत करता है. विशेषता इस पंप हाउस की विशिष्टता इसकी दो जुड़ी सुरंगें हैं, जिसे 10.5 मीटर व्यास के साथ जमीन को खोदकर बनाया गया है. आम तौर पर इन्हें बाईं और दाईं सुरंग कहा जाता है. जिसमें हरेक की लंबाई 4133 मीटर है. इन दोनों सुरंगों के लिए लाइनिंग का काम भी खत्म हो गया है। इस पंप हाउस के अलावा इसका सर्ज पूल भी दुनिया में सबसे बड़ा है. ऐसा पहली बार है कि जमीन के भीतर इस तरह के निर्माण को अंजाम दिया गया है. एक पंप हाउस के आकार के बारे में सोचें तो इसकी गहराई 330 मीटर, चौड़ाई 25 मीटर और ऊंचाई 65 मीटर है. प्रोजेक्ट के काम जो पानी पंप किया जाना है वह सबसे पहले सर्ज पूल तक पहुंचता है, जिसमें पंपिंग के लिए भारी मात्रा में पानी होना जरूरी है. पानी की इतनी बड़ी मात्रा को बनाए रखने के लिए तीन सर्ज पूलों का निर्माण किया गया है. 200x20x67.8 मीटर आयामों के साथ मुख्य सर्ज पूल का निर्माण और 60x20x69.5 मीटर्स के साथ एक अलग से सर्ज पूल का काम पहले ही पूरा हो चुका है. 115x25x64.75 मीटर्स आयामों के साथ जमीन के नीचे 189.5 मीटर्स के दूसरे चरण के पंपिंग स्टेशन का काम भी पूरा हो चुका है. ट्रांसफॉर्मर की खाड़ी का निर्माण पंप हाउस के नीचे किया जाता है, जो जमीन की सतह से 330 मीटर नीचे है. जमीन के नीचे 138 मीटर की दूरी पर वर्टिकल पंप स्थापित करना इस परियोजना की बड़ी खासियत है. पंप मोटर में से हरेक का वजन 2376 मीट्रिक टन है, और यह हर एक इकाई के आकार को दर्शाता है.