धनबाद: केंदुआ में ‘जमीन के नीचे मौत’! धनबाद-बोकारो रोड 2 फीट धंसी, जहरीली गैस से बड़ा खतरा—इलाका सील
धनबाद के केंदुआ में धनबाद-बोकारो मुख्य सड़क दो फीट धंस गई। जहरीली गैस रिसाव और भूधंसान के बढ़ते खतरे के बीच प्रशासन ने रास्ता बंद कर दिया है, इलाके में दहशत।
धनबाद(Threesocieties.com Desk): कोयलांचल क्षेत्र में एक बार फिर से खतरे की घंटी बज गई है। बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे केंदुआ स्थित धनबाद-बोकारो मुख्य सड़क अचानक लगभग दो फीट तक धंस गई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
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घटना पुराना महाप्रबंधक आवास के पास हुई है—वही इलाका जहां पहले भी जहरीली गैस रिसाव की घटना सामने आ चुकी है। ऐसे में इस भूधंसान ने संभावित बड़े हादसे की आशंका और बढ़ा दी है।
आवागमन पूरी तरह बंद, रूट डायवर्ट
सड़क धंसने के तुरंत बाद केंदुआडीह थाना पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए पूरे इलाके को सील कर दिया। सड़क के दोनों ओर बैरिकेडिंग लगा दी गई है। धनबाद-बोकारो मार्ग पर आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया। वाहनों को केंदुआ पुल – पुराना थाना मोड़ होते हुए डायवर्ट किया जा रहा है।
जमीन में दरारें, लोगों में दहशत
घटना के बाद आसपास के इलाकों में लंबी-लंबी दरारें उभरने लगी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दरारों का दायरा लगातार बढ़ रहा है, जिससे: मकानों के गिरने का खतरा, अचानक बड़े भूधंसान की आशंका व जान-माल के नुकसान का डर। इलाके में भय का माहौल बना हुआ है।
CISF और BCCL की तैनाती
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए CISF जवानों को तैनात किया गया है। BCCL (भारत कोकिंग कोल लिमिटेड) की टीम ने इलाके की घेराबंदी शुरू कर दी है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे थे, जिससे लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है।
खनन गतिविधियों पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने इस घटना के पीछे भूमिगत कोयला खनन को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि लगातार माइनिंग से जमीन अंदर से खोखली हो गई है, जिससे बार-बार धंसान हो रहा है।
पहले भी मिल चुके हैं संकेत
6 अप्रैल को इसी इलाके में तीन दुकानों में दरारें पड़ी थीं। दुकानों को खाली कराकर मिट्टी भराई कराई गई थी। इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
जहरीली गैस का पुराना खतरा
दिसंबर 2025 में इसी क्षेत्र में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस रिसाव से कई लोगों की मौत हो चुकी है। तब से जमीन के अंदर नाइट्रोजन गैस की भराई लगातार की जा रही है। लेकिन गैस रिसाव पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाया है।
बड़ा सवाल: कब रुकेगा यह खतरा?
लगातार हो रही घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि केंदुआ और आसपास के इलाकों में भूमिगत खतरा अभी भी बरकरार है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह भूधंसान किसी बड़े हादसे में बदल सकता है।
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