राष्ट्र की सुरक्षा के लिए न किसी के दबाव में काम होगा, न किसी के प्रभाव में और न ही किसी अभाव में
करगिल विजय दिवस के कार्यक्रम में पीएम ने देशवासियों को दिया एकता का संदेश
नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा है कि प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा कि यह देश सबका है, सिर्फ किसी एक पंथ, जाति या भाषा बोलने वालों का नहीं है. पीएम ने देशवासियों से एकता की अपील करते हुए कहा, 'राष्ट्रनिर्माण के पथ पर हमें कुछ बातों का ध्यान रखना होगा. 1947 में क्या एक भाषा विशेष बोलेने वाले आजाद हुए थे? क्या एक पंथ के लोग आजाद हुए थे? क्या एक जाति के लोग आजाद हुए थे? जी नहीं, पूरे भारत के लोग आजाद हुए थे. जब हमने अपना संविधान लिखा तो क्या सिर्फ एक भाषा, एक पंथ या एक जाति के लोगों के लिए लिखा था? जी नहीं, हमने पूरे भारत के लिए लिखा था.' पीएम करगिल विजय के 20 साल पूरा होने के मौके पर दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे. इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में करगिल के नायकों की याद में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ-साथ डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह, आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत और रक्षा राज्यमंत्री श्रीपाद नाइक व शहीद हुए जवानों के परिवारों समेत अन्य लोगों ने शिरकत की.
पीएम ने युद्ध के नायकों को सलाम किया और शहीदों की शहादत का उल्लेख करते हुए लोगों को पीएम ने लोगों से शहीदों और उनकी माताओं से प्रेरणा लेने पीएम ने लोगों से शहीदों और उनकी माताओं से प्रेरणा लेने को कहा.
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समारोह में मोदी, राजनाथ व अन्य,[/caption]
शहीदों ने किसी खास तबके नहीं, देश के लिए दी थी कुर्बानी
पीएम ने शहीदों की मिसाल देते हुए कहा, '20 साल पहले हमारे 500 से अधिक वीर सेनानियों ने करगिल के बर्फीले तूफानों में कुर्बानियां किसके लिए दी थीं? वीर चक्र पाने वाले तमिलनाडु के रहने वाले बिहार रेजिमेंट के हीरो ऑफ बटालिक कहे जाने वाले मेजर सर्वानन ने किसके लिए वीरगति पाई थी? वीर चक्र पाने वाले दिल्ली के रहने वाले राजपूताना राइफल्स के कैप्टन हनीफुद्दीन ने किसके लिए कुर्बानी दी थी? परमवीर चक्र पाने वाले हिमाचल के रहने वाले कैप्टन बिक्रम बत्रा ने जब कहा था 'ये दिल मांगे मोर' तो उनका दिल किसके लिए मांग रहा था? उनका दिल एक भाषा, धर्म या जाति के लिए नहीं, पूरे भारत के लिए, मां भारती के लिए मांग रहा था.'
प्रण लें कि शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देंगे
पीएम ने कार्यक्रम के आखिर में कहा कि आइए हम सब मिलनकर ठान लें कि ये बलिदान, ये कुर्बानियां हम व्यर्थ नहीं होने देंगे. हम उनसे प्ररेणा लेंगे और उनके सपनों का भारत बनाने के लिए हम अपनी जिंदगी खपाते रहेंगे.'
राष्ट्र की सुरक्षा के लिए न किसी के दबाव में काम होगा, न किसी के प्रभाव में और न ही किसी अभाव में

पीएम ने करगिल युद्ध के शूरवीरों और शहीदों को याद करते हुए पाकिस्तान समेत पूरी दुनिया को संदेश दिया कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए बड़ा से बड़ा कदम उठाने से नहीं हिचकेगा. पीएम ने स्पष्ट किया कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए न किसी के दबाव में काम होगा, न किसी के प्रभाव में और न ही किसी अभाव में काम होगा. उन्होंने कहा कि चाहे अरिहंत के जरिए परमाणु त्रिकोण की स्थापना हो या फिर ए-सैट परीक्षण, हमने दबावों की परवाह किए बिना कदम उठाए हैं और उठाते रहेंगे। PM ने कहा कि गहरे समंदर से लेकर असीम अंतरिक्ष तक, जहां-जहां भी भारत के हितों की सुरक्षा की जरूरत होगी, भारत अपने सामर्थ्य का भरपूर उपयोग करेगा.
पीएम ने कहा कि करगिल के वक्त अटलजी ने कहा था कि हमारे पड़ोसी (पाकिस्तान) को लगता था कि करगिल को लेकर भारत प्रतिरोध करेगा, विरोध प्रकट करेगा और तनाव से दुनिया डर जायेगी. हस्तक्षेप करने के लिए, पंचायत करने के लिए कुछ लोग कूद पड़ेंगे और एक नई रेखा खींचने में वे सफल होंगे. लेकिन हम जवाब देंगे, प्रभावशाली जवाब देंगे, इसकी उम्मीद उनको नहीं थी. रोने-गिड़गिड़ाने के बजाय प्रभावी जवाब देने का यही रणनीतिक दबाव दुश्मन पर भारी पड़ गया.
पीएम ने कहा कि कारगिल विजय दिवस के इस अवसर पर आज हर देशवासी शौर्य और राष्ट्र के लिए समर्पण की एक प्रेरणादायक गाथा का स्मरण कर रहा है. आज के इस अवसर पर मैं उन सभी शूरवीरों को श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं जिन्होंने करगिल की चोटी से तिरंगे को उतारने के षड्यंत्र को असफल किया. अपना रक्त बहाकर जिन्होंने सर्वस्व न्यौछावर किया, उन शहीदों और उन्हें जन्म देने वाली वीर माताओं को भी मैं नमन करता हूं. जम्मू-कश्मीर के सभी नागरिकों का भी अभिनंदन, जिन्होंने राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाया. 20 वर्ष पहले करगिल की चोटियों पर जो विजय गाथा लिखी गई, वह हमारी पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी. यह शाम उत्साह भी भरती है, विजय का विश्वास भी भरती है और त्याग व तपस्या के प्रति श्रद्धा भाव भी रखती है. करगिल में विजय भारत के संकल्पों की जीत थी, करगिल में विजय भारत के सामर्थ्य और संयम की जीत थी, करगिल में विजय भारत की मर्यादा और अनुशासन की जीत थी. करगिल में विजय प्रत्येक देशवासी की उम्मीदों और कर्तव्यपरायणता की जीत थी.
पीएम ने कहा कि युद्ध सरकारें नहीं लड़तीं, युद्ध पूरा देश लड़ता है. सरकारें आती-जाती रहती हैं लेकिन देश के लिए जो जीने और मरने की परवाह नहीं करते, वे अजर-अमर होते हैं. सैनिक आज के साथ ही आने वाली पीढ़ी के लिए अपना जीवन बलिदान करते हैं. हमारा आने वाला कल सुरक्षित रहे, इसलिए वह अपना आज स्वाहा कर देता है. सैनिक जिंदगी और मौत में भेद नहीं करते. उनके लिए तो कर्तव्य ही सबकुछ होता है. देश के पराक्रम से जुड़े इन जवानों के जीवन सरकारों के कार्यकाल से बंधे नहीं होते. शासक और प्रशासक कोई भी हो सकता है, परंतु पराक्रमी और उनके पराक्रम पर हर हिंदुस्तानी का हक होता है.
शहीद की कहानी सुन पीएम अपनी आंसू नहीं रोक सके

कार्यक्रम में पीएम मोदी भावुक हो गये और अपने आंसू नहीं रोक सके
कारगिल विजय दिवस के 20 साल पूरा होने पर इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में एक पल ऐसा भी आया जब पीएम मोदी भावुक हो गए और अपनी आंखों में आंसू नहीं रोक सके. कार्यक्रम के दौरान करगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस पर 'इमोर्टल्स ऑफ करगिल' नाम की शॉर्ट फिल्म भी दिखाई गई. उस वक्त स्टेडियम में मौजूद सभी लोगों की आंखें नम और सीना फक्र से चौड़ा हो गया जब युवाओं की एक टीम ने करगिल युद्ध में शहीद हुए लांस नायक बच्चन सिंह की दास्तां को भावभंगिमाओं के जरिए बताया. लांस नायक बच्चन सिंह ने करगिल युद्ध के दौरान तोरोलिंग की पहाड़ी पर अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था. खास बात यह है कि आज उनके बेटे लेफ्टिनेंट हितेश अपने पिता की ही बटालियन में अफसर हैं. जब वह अपनी मां कमलेश बाला के साथ मंच पर आये तो पीएम मोदी के साथ-साथ सेना प्रमुख जनरल रावत भी आंखों से आंसू नहीं रोक पाये.
कारगिल युद्ध में शहीद हुए एक जवान की आखिरी चिट्ठी को पढ़ते हुए एक डांस ग्रुप ने प्रस्तुति दी थी. इस प्रस्तुति के बाद पीएम मोदी की आंखें नम हो गईं. डांस ग्रुप ने अपने इस परफॉर्मेंस के अंत में दिखाया कि शहीद ने अपनी पत्नी से बेटे को भी भारतीय सेना में भेजने का वादा किया था. उनकी पत्नी ने वादा पूरा करते हुए बेटे को देश की सेवा के लिए सीमा पर भेजने में रत्ती भर भी संकोच नहीं किया. इस प्रस्तुति के खत्म होने के बाद शहीद की पत्नी और भारतीय सेना में जवान उनका बेटा मंच पर आए. इसे देखकर पीएम मोदी भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गये.
डांस ग्रुप द्वारा दी गई यह प्रस्तुति कारगिल युद्ध में शहीद हुए लांस नायक बचन सिंह की चिट्ठी पर दी गई थी. शहीद बचन सिंह का बेटा लेफ्टिनेंट हितेश अपनी मां कामेश बाला के साथ मौजूद रहे. हितेश भी उसी बटालियन को सेवा दे रहे हैं, जिसे युद्ध के दौरान उनके पिता ने सेवा दी थी. कुमार जब छह साल के थे, तो उनके पिता शहीद हो गये थे. उनका सपना अपने पिता की तरह बनना और सेना में शामिल होकर अपने राष्ट्र की सेवा करना था. वह 9 जून, 2018 को, उनके पिता के निधन के ठीक 19 साल बाद वे सेना में लेफ्टिनेंट बनकर शामिल हो गये.
उल्लेखनीय है कि 20 साल पहले 26 जुलाई 1999 को भारत ने कारगिल युद्ध में विजय हासिल की थी. इस दिन को हर वर्ष विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है. लगभग दो महीने तक चला यह युद्ध भारतीय सेना के साहस और जांबाजी का ऐसा उदाहरण है.लगभग 18 हजार फीट की ऊंचाई पर कारगिल में लड़ी गई इस जंग में देश ने 527 से ज्यादा वीर योद्धाओं को खोया था, वहीं 1300 से ज्यादा घायल हुए थे.