रांची: दुमका में बीजेपी की जीत के चाणक्य बने जियाडा डायरेक्टर सत्येंद्र कुमार

  • गांव-गांव तक बूथ लेवल के बीजेपी कार्यकतार्ओं को जोड़ा
  • सीएम व संगठन का टास्क पूरा कर दिया रिजल्ट
  • 14 बार अलग-अलग चुनाव के प्रभारी रहे जिसमें पार्टी जीती
रांची: बीजेपी कैंडिडेट सुनील सोरेन ने दमुका से झारखंड के एक्स सीएम, आठ-आठ बार एमपी रहे शिबू सोरेन उर्फ गुरुजी को 30 हजार से ज्यादा वोटों से पराजित कर दिया है. जियाडा डायरेक्टर सत्येंद्र कुमार ने सुनील सोरेन की जीत में चाणक्य की भूमिका निभायी है. जेएमएम को उसके गढ भी झटका देकर संथाल की राजनीति में नये सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है. सत्येंद्र कुमार सीएम के गृह जिला जमशेदपुर से संगठन प्रभारी हैं. राज्य में श्री कुमार ही एक ऐसे लीडर हैं जिसे जिला प्रभारी के साथ-साथ किसी लोकसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया था. दुमका जैसे लोकसभा क्षेत्र में बीजेपी का कमल खिलाने की जिम्मेवारी सौंपी गयी थी. दुमका में 20 साल पहले बाबूलाल मरांडी ने शिबू सोरेन को हराकर जीत हासिल कर सेंट्रल में मिनिस्टर बने थे. अलग राज्य बनने पर बालूलाल को बीजेपी ने झारखंड का पहला सीएम बनाया. सीएम बनने के बाद बाबूलाल लोकसभा की सदस्यता छोड़ दी थी. बाबूलाल अभी बीजेपी से अलग होकर अपनी जेविएम पार्टी बना ली है. संयोग है कि शिबू सोरेन को हराने वाले बाबूलाल बीजेपी के खिलाफ थे. जेएमएम-जेविएम, कांग्रेस व आरजेडी गठबंधन कर चुनाव लड़ रही थी. बाबूलाल दुमका में शिबू सोरेन के लिए वोट मांगने भी गये थे. बीजेपी के दुमका लोकसभा प्रभारी सत्येंद्र कुमार पिछले पांच माह से लगातार क्षेत्र में भ्रमणशील थे. गांव व बूथ लेवल पर कार्यकर्तओं को सक्रिय कर पार्टी व सरकार की नीतियों को लोगों के बच पहुंचाने में लगे थे. मिनिस्टर लुईस मरांडी व रणधीर सिंह के साथ एक्स मिनिस्टर सत्यानंद झा बाटुल का दुमका लोकसभा एरिया में पूरा सहयोग मिल रहा था. सीएम व पार्टी की भी दुमका पर विशेष नजर थी. सीएम खुद लगातार दुमका का चुनावी दौरा कर सत्येंद्र कुमार से फीडबैक व संगठन की कमियां व समस्या दूर करने की दिशा में काम करवाते रहे. इसी का परिणाम है कि जियाडा डायरेक्टर ने अपनी सांगठनिक क्षमता के भरपुर उपयोग कर पार्टी नेताओं व वर्करों की मदद से दमका सीट पर सुनील सोरेन को जीत दिलवाने में अहम भूमिका निभायी. बीजेपी सूत्रों का कहना है कि पार्टी के धनबाद जिला अध्यक्ष रहे सत्येंद्र कुमार की सांगठनिक क्षमता का लीडर से लेकर वर्कर तक कायल हैं. पहले 13 बार वह लोकसभा, विधानसभा, नगर निगम व लोकसभा के प्रभारी रह चुके हैं. सबी 13 चुनावों में उनके प्रभारी वाले एरिया में पार्टी की जीत हुई है. दुमका उनका 14 वां चुनाव प्रभार था जहां से इस बार पार्टी को जीत मिली. सत्येंद्र कुमार पहले प्रोफेसर रीता वर्मा के लोकसभा चुनाव प्रभारी, पीएन सिंह के विधानसभा, लोकसभा चुनावा प्रभारी, कुंती देवी के झरिया विधानसभा के प्रभारी, संजीव सिंह के प्रभारी, मेयर रही इंदू देवी व वर्तमान मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल के भी चुनाव प्रभारी रह चुके हैं. सत्येंद्र कुमार पिछले कुछ सालों से संगठन में हाशिये पर थी. गुटीय राजनीति के कारण वह उपेक्षित थे. सीएम रघुवर दास की पहल पर सत्येंद्र कुमार को सांगठनिक जिम्मेवारी मिली और वह पहले की तरह पार्टी के लिए काम कर रहे हैं. झरिया में रंग लायी एमएलए संजीव के वाइफ रागिनी की सक्रियता [caption id="attachment_31667" align="alignnone" width="200"] रागिनी सिंह .[/caption] बीजेपी झरिया एमएलए संजीव सिंह की वाइफ रागिनी सिेह की सक्रियता झरिया विधानसभा क्षेत्र में रंग लायी. बीजेपी को पिछली बार से लगभग 20 हजार ज्यादा वोट मिले. झरिया में एक लाख वोटिंग की टारगेट थी. एक लाख से कुछ कम वोट पार्टी को झरिया विधानसभा क्षेत्र में मिली है. संजीव के जेल में रहने के कारण रागिनी को मैदान में उतरा पड़ा. रागिनी सीएम की मौजूदगी में पीएन सिंह की नॉमिनेशन के दिन बीजेपी ज्वाइन की थी. वह लगातार झरिया के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में एक्टिव थी. रागिनी बीजेपी प्रसिडेंट अमित शाह, होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह व सीएम रघुवर दास के साथ चुनावी सभा में भाग ली. मंच पर रही और भाषण भी दी थी. बीजेपी की राजनीति में 22 दिन में वह वर्करों के बीच लोकप्रिय हो गयी है.