- 40 दिनों तक चली सुनवाई, हिंदू और मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने रखी अपनी-अपनी दलीलें
- इलाहाबाद हाई कोर्ट के 30 सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई थीं 14 याचिकाएं
नई दिल्ली: अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के ऐतिहासिक जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में बुधवर को सुनवाई पूरी हो गई है. सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.सीजेआई अगले महीने 17 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं, संभावना है कि उससे पहले इस ऐतिहासिक मामले में फैसला आ सकता है. सीजेआई ने बुधवार को स्पष्ट कर दिया कि आज ही शाम पांच बजे तक सुनवाई पूरी होगी लेकिन एक घंटे पहले ही चार बजे सुनवाई पूरी हो गई.सीजेआई की अध्यक्षता वाली संवैधानिक बेंच ने संबंधित पक्षों को 'मोल्डिंग ऑफ रिलीफ' पर लिखित नोट रखने के लिए तीन दिन का अतिरिक्त समय दिया है. मोल्डिंग ऑफ रिलीफ में दोनों पक्षों की ओर से अपील के दौरान जो गुहार लगाई गई है उस गुहार से आगे-पीछे कुछ गुंजाइश बनती है क्या, इस संभावना को देखा जाता है.संवैधानिक बेंच में सीजेआई रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर शामिल हैं.
मुस्लिम पक्ष के वकील ने फाड़ा नक्शा
अयोध्या मामले में नियमित सुनवाई तय होने के बाद 40 दिनों तक हिंदू और मुस्लिम पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं. सुनवाई के 40 वें और आखिरी दिन बुधवार को मुस्लिम पक्ष के वकील ने हिंदू पक्ष की तरफ से जमा किये गये एक नक्शे को फाड़ दिया. इसके बाद दोनों पक्षों के वकीलों में तीखी नोकझोक भी हुई.सीजेआई गोगोई ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि हम सुनवाई को इस तरह से जारी नहीं रख सकते. लोग खड़े हो रहे हैं और बिना बारी के बोल रहे हैं. हम भी अभी खड़े हो सकते हैं और मामले की कार्यवाही को खत्म कर सकते हैं.
हिंदू महासभा के वकील ने रामजन्मभूमि का पुराना नक्शा पेश किया था
अखिल भारतीय हिंदू महासभा की तरफ से पेश हुए सीनीयर एडवोकेट विकास सिंह ने सुनवाई के 40वें दिन एक किताब व कुछ दस्तावेज के साथ विवादित भगवान राम के जन्म स्थान की पहचान करते हुए एक नक्शा जमा किया. मुस्लिम पक्ष की तरफ से पेश हुए सीनीयर एडवोकेट राजीव धवन ने दस्तावेज के रेकॉर्ड में नहीं होने की बात कहते हुए आपत्ति जताई. कोर्ट में दस्तावेज को फाड़ने की पांच जजों की बेंच से अनुमति मांगते हुए धवन ने कहा, 'क्या, मुझे इस दस्तावेज को फाड़ने की अनुमति है....यह सुप्रीम कोर्ट कोई मजाक नहीं और इसके बाद उन्होंने दस्तावेज के टुकड़े-टुकड़े कर दिए.'
सीजेआई ने हंगामे पर जताई नाराजगी
एडवोकेट धवन ने एडवोकेट सिंह द्वारा मामले से जुड़ी एक किताब जमा करने के प्रयास पर भी आपत्ति जताई. उन्होंने इसे प्रस्तुत करने पर तेज आवाज में आपत्ति जताई और इसका विरोध किया. कोर्ट ने धवन की आपत्तियों को दर्ज किया. एडवोकट सिंह ने कहा कि सीता रसोई व सीता कूप के नक्शे से जगह की पहचान होती है, जो कि भगवान राम की जन्मभूमि है. सीजेआई ने पाया कि यह सुनवाई के अनुकूल वातावरण नहीं है, खास तौर से मुस्लिम पक्ष का व्यवहार. सीजेआई ने कहा किजहां तक हम समझते हैं, बहस खत्म हो गई है.
नक्शा कुणाल किशोर की किताब का हिस्सा था
हिंदू महासभा के वकील विकास सिंह ने रिटायर्ड आईपीएस अफसर कुणाल किशोर की किताब अयोध्या रीविजिटेड को कोर्ट के सामने रखा. इसी किताब में वह नक्शा था जिसे धवन ने फाड़ा. नक्शा फाड़े जाने पर किताब के लेखक कुणाल किशोर ने कहा है कि धवन इंटेलेक्चुअल हैं. वह जानते हैं कि अगर नक्शा कोर्ट के सामने पेश होता तो उनका केस न के बराबर रह जाता. अगर धवन को दिक्कत थी तो उन्हें दिये गये समय में उसपर बात करनी चाहिए थी.
इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी गई है चुनौती
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को विवादित 2.77 एकड़ जमीन को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था. इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दायर की गईं थीं. सुप्रीम कोर्टने मई 2011 में हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने के साथ विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था. अब इन 14 अपीलों पर सुनवाई पूरी हो गई है और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है.
विवादित ज़मीन पर दावा छोड़ने को तैयार वफ्फ बोर्ड, तीन शर्तें रखी
अयोध्या मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की 40वें दिन की सुनवाई पूरी होने से पहले अयोध्या मध्यस्थता पैनल ने अपनी फाइनल रिपोर्ट पांच जजों की बेंच को जमा की. इस रिपोर्ट में समझौते का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा रखा गया था। लेकिन इस प्रस्ताव में सरकार के आगे तीन ऐसी शर्तें रखी गई जिससे देश के अन्य मुस्लमानों को इस समझौते पर एतराज न हो.
वक्फ बोर्ड की शर्तें
यूपी गर्वमेंट अवस्था में पड़ी 22 मस्जिदों का पुनर्निर्माण कराए, 1991 के धार्मिक उपासना अधिनियम को सख्ती से लागू किया जाए और मुसलमानों को केंद्र सरकार के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तहत सभी मस्जिदों का उपयोग करने की अनुमति दी जाए.
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी होने के साथ अयोध्या में हाइवे से लेकर सरयू नदी के पुल और शहर के आंतरिक मार्गों से लेकर रामकोट तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस के जवानों को तैनात कर दिया गया है. यूपी गर्वमेंट ने सभी पुलिस अफसरों को छुट्टी अगले आदेश तक कैंसिल कर दिये हैं.