रांची की बेटी IPS अफसर स्वाति लकड़ा ने रचा इतिहास: देश की पहली ST महिला DG बनीं, तेलंगाना SPF की संभाली कमान
रांची की रहने वाली 1995 बैच की IPS अधिकारी स्वाति लकड़ा तेलंगाना में DG रैंक पर पदोन्नत होकर देश की पहली ST महिला DG बनीं। उन्होंने स्पेशल प्रोटेक्शन फोर्स के महानिदेशक के रूप में पदभार संभाल लिया है।
Highlights
- स्वाति लकड़ा तेलंगाना में DG रैंक पर पदोन्नत
- रांची के लॉरेटो कॉन्वेंट और JVM श्यामली की छात्रा रहीं
- महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘She Teams’ अभियान से बनीं पहचान
- झारखंड और आदिवासी समाज के लिए बनीं प्रेरणा
- महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘She Teams’ अभियान से बनाई अलग पहचान
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड की माटी में पली-बढ़ी और राजधानी रांची की गलियों से निकलकर देश की शीर्ष पुलिस सेवा तक पहुंचने वाली वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी स्वाति लकड़ा ने एक नया इतिहास रच दिया है। तेलंगाना कैडर की 1995 बैच की आईपीएस अधिकारी स्वाति लकड़ा को डायरेक्टर जनरल (DG) रैंक में पदोन्नत किया गया है। इसके साथ ही वह देश की पहली ऐसी अनुसूचित जनजाति (ST) महिला अधिकारी बन गई हैं, जिन्होंने पुलिस सेवा के इस सर्वोच्च पद तक पहुंचने का गौरव हासिल किया है।
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Called on the Hon'ble Chief Minister of Telangana, Sri A Revanth Reddy garu on my promotion in the rank of Director General of Police (DGP)@DGTSPF pic.twitter.com/r3lyZLAMNi
— Swati Lakra (@SwatiLakra_IPS) April 25, 2026
प्रोन्नति के तुरंत बाद उन्होंने तेलंगाना में स्पेशल प्रोटेक्शन फोर्स (SPF) के महानिदेशक के रूप में पदभार संभाल लिया है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल झारखंड, बल्कि पूरे देश के आदिवासी समाज और महिलाओं के लिए प्रेरणा का नया अध्याय लिख दिया है।
रांची से शुरू हुआ गौरवशाली सफर
स्वाति लकड़ा का जन्म और पालन-पोषण रांची में ही हुआ। उनके पिता दक्षिण पूर्व रेलवे में सिविल इंजीनियर थे, जिससे परिवार में शिक्षा, अनुशासन और सेवा भावना का मजबूत वातावरण रहा। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रांची के प्रतिष्ठित लॉरेटो कॉन्वेंट स्कूल से दसवीं तक पूरी की। इसके बाद 12वीं की पढ़ाई जवाहर विद्या मंदिर (JVM) श्यामली से की। छात्र जीवन से ही वह मेधावी और अनुशासित छात्रा के रूप में जानी जाती थीं। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली का रुख किया और देश के प्रतिष्ठित लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वीमेन से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
प्रशासनिक सेवा से गहरा जुड़ाव
स्वाति लकड़ा का परिवार प्रशासनिक सेवाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके पति बेनहूर महेश दत्ता एक्का भी तेलंगाना कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं। मायका और ससुराल—दोनों का रिश्ता रांची से ही जुड़ा है। यही कारण है कि देश के दूसरे राज्य में शीर्ष प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उनका झारखंड और रांची से गहरा भावनात्मक संबंध बना हुआ है।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनीं मिसाल
स्वाति लकड़ा को तेलंगाना में महिलाओं की सुरक्षा के लिए शुरू किए गए ‘She Teams’ अभियान के लिए विशेष पहचान मिली। इस पहल ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर अंकुश लगाने और उन्हें सुरक्षित वातावरण देने में बड़ी भूमिका निभाई।उनके नेतृत्व में तेलंगाना पुलिस ने तकनीक और जमीनी स्तर पर कई सुधार किए। उन्होंने पुलिसिंग को केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण से भी जोड़ा।
“मेहनत का कोई विकल्प नहीं” — स्वाति लकड़ा
एक बातचीत में स्वाति लकड़ा ने कहा कि अपने लंबे करियर में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन मेहनत, लगन और ईमानदारी से किया गया काम हमेशा सफलता दिलाता है। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा— “मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता। एक बार सफलता मिलने के बाद भी कर्तव्य पथ पर लगातार आगे बढ़ते रहना चाहिए। यही सच्ची संतुष्टि देता है।” उन्होंने यह भी कहा कि रांची उनकी जन्मस्थली है और उनका ससुराल भी यहीं है, इसलिए उनका झारखंड से जुड़ाव हमेशा बना रहेगा।
जेवीएम श्यामली में खुशी की लहर
स्वाति लकड़ा की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उनके पुराने विद्यालय जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली में खुशी का माहौल है। विद्यालय के प्राचार्य बीएन झा ने कहा कि स्वाति ने न केवल अपने परिवार, बल्कि अपनी मातृसंस्था और पूरे झारखंड का नाम रोशन किया है। उप-प्राचार्या अनुपमा श्रीवास्तव ने कहा कि स्वाति की सफलता हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।
आदिवासी समाज और महिलाओं के लिए प्रेरणा
स्वाति लकड़ा की यह पदोन्नति केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व और महिला सशक्तिकरण का भी मजबूत प्रतीक है। देश की पहली ST महिला DG बनना इस बात का संकेत है कि अब आदिवासी समाज की बेटियां भी देश की सर्वोच्च प्रशासनिक और सुरक्षा जिम्मेदारियों तक पहुंच रही हैं। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए यह संदेश है कि मेहनत, शिक्षा और समर्पण से हर ऊंचाई हासिल की जा सकती है।






