मुंबई: दागर नगर हवेली के एमपी मोहन देलकर ने होटल में पंखे से लटककर दी जान, सुसाइड नोट बरामद

मुंबई। दमन और दीव के एमपी मोहन डेलकर(58) मुंबई के एक होटल में पंखे से लटकर जान दे दी है। दादर नगर हवेली के निर्दलीय एमपी डेलकर की बॉडी सोमवार को मरीन ड्राइव के एक होटल में मिला। पुलिस की  शुरुआती जांच में खुदकुशी की बात सामने आ रही है।

मुंबई: दागर नगर हवेली के एमपी मोहन देलकर ने होटल में पंखे से लटककर दी जान, सुसाइड नोट बरामद
  • पुलिस को गुजराती भाषा में लिखा हुआ सुसाइड नोट मिला

मुंबई। दमन और दीव के एमपी मोहन डेलकर(58) मुंबई के एक होटल में पंखे से लटकर जान दे दी है। दादर नगर हवेली के निर्दलीय एमपी डेलकर की बॉडी सोमवार को मरीन ड्राइव के एक होटल में मिला। पुलिस की  शुरुआती जांच में खुदकुशी की बात सामने आ रही है।

गुजराती में सूइसाइड नोट, बड़े नेताओं के नाम का जिक्र
बताया जाता है कि गुजराती में लिखे सूइसाइड नोट में मोहन देलकर ने बड़े नेताओं के नामों का भी जिक्र किया है। देलकर की सूइसाइड नोट में यह भी जिक्र है कि बड़े नेता उन्हें अपमानित करते थे। साथी और पक्षपात का भी शिकार हुए हैं। फिलहाल इस मुद्दे पर पुलिस की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
मोहन डेलकर सात बार दमन ओर दीव से एमपी चुने गये थे। वह पीएम मोदी और अमित शाह के समर्थक थे।  मोदी सरकार की नीतियों का अक्सर समर्थन करते दिखते थे। वह प्रखर वक्ता थे और अपने क्षेत्र के विकास को लेकर अक्सर प्रमुखता से अपनी बात संसद में रखते थे।वर्ष 1989 में वे कांग्रेस के टिकट पर एमपी बने थे। फिर 1991, 1996 में भी वे कांग्रेस के एमपी बने। हालांकि साल 1998 में उन्होंने बीजेपी का दामन थामा और एमपीबने। जिसके बाद साल 1999 में उन्होंने निर्दलीय एमपीके रूप में कमान संभाली। इसके अलावा वे 2004 और 2019 में भी निर्दलीय एमपी रहे हैं।
सात बार लोकसभा एमपी रहे
दादरा और नगर हवेली के एमपी मोहन देलकर की सुसाइड के पीछे की वजह का अभी तक पता नहीं चल पाया है। हालांकि पुलिस घटनास्थल पर मौजूद है और मामले की जांच कर रही है।दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव के केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली की लोकसभा सीट से मोहन देलकर एमपीके रूप में काम करने वाले एक स्वतंत्र राजनेता थे। मोहन संजीबाई देलकर का जन्म 19 दिसंबर 1962 को सिलवासा में हुआ था।
आदिवासियों के लिया किया संघर्ष
मोहन देलकर ने सिलवासा में एक ट्रेड यूनियन नेता के रूप में अपना करियर शुरू किया था। उन्होंने यहां अलग-अलग कल-कारखानों में काम करने वाले आदिवासी लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई और संघर्ष किया।मोहन देलकर ने आदिवासियों के लिए 1985 में आदिवासी विकास संगठन शुरू किया। 1989 में वे दादरा और नगर हवेली निर्वाचन क्षेत्र से 9वीं लोकसभा के लिए एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुने गये।1999 और 2004 के चुनाव में भी मोहन देलकर लोकसभा पहुंचे। हालांकि इस दौरान उन्होंने निर्दलीय और भारतीय नवशक्ति पार्टी (बीएनपी) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था।
2020 में जदयू में हुए शामिल
चार फरवरी 2009 को मोहन देलकर एक बार फिर कांग्रेस में फिर से शामिल हो गये लेकिन वह लोकसभा नहीं पहुंच सके। इसके बाद 2019 में उन्होंने खुद को कांग्रेस पार्टी से अलग कर लिया।  निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुने गये। हालांकि 2020 में वह जेडीयू में शामिल हो गये।