धनबाद: कचरे से होगा CNG का उत्पादन, सिंफर ने लगाया बायो-CNG प्लांट, 10 टन अपशिष्ट से बनेगी हर दिन गैस

धनबाद में सिंफर ने 3 घन मीटर क्षमता वाला बायो-CNG प्लांट स्थापित किया है। नगर निगम और खाद्य अपशिष्ट से प्रतिदिन करीब 10 टन कचरे का संसाधन कर गैस उत्पादन होगा। डॉ. वीए सेल्वी के नेतृत्व में यह परियोजना स्वच्छता और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है।

धनबाद: कचरे से होगा CNG का उत्पादन, सिंफर ने लगाया बायो-CNG प्लांट, 10 टन अपशिष्ट से बनेगी हर दिन गैस
डॉ वीए सेल्वी के नेतृत्व में कचरा प्रबंधन समाधान।

धनबाद (Threesocieties.com Desk)। बढ़ती आबादी और तेजी से बढ़ते कचरे के बीच धनबाद को स्वच्छ और ऊर्जा संपन्न बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल हुई है। केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान (सिंफर) ने अपने परिसर में 3 घन मीटर क्षमता वाला बायो-सीएनजी प्लांट स्थापित किया है। इस पायलट प्रोजेक्ट के जरिए नगर निगम क्षेत्र और खाद्य अपशिष्ट से बायो-सीएनजी का उत्पादन किया जायेगा।

यह भी पढ़ें: हजारीबाग जमीन घोटाला: कारोबारी बिनय सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बेल, पत्नी स्निग्धा पर भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक

यह परियोजना न केवल कचरा प्रबंधन की समस्या को कम करेगी बल्कि शहर को स्वच्छ ऊर्जा का विकल्प भी उपलब्ध कराएगी। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।

 कैसे बनेगी कचरे से CNG?

सिंफर द्वारा स्थापित प्लांट में कचरे को वैज्ञानिक प्रक्रिया से गुजारा जायेगा—

अपशिष्ट को पहले डंपिंग यार्ड में रखा जायेगा।

छोटे कचरे को हैमर मिल और बड़े कचरे को बायो ग्राइंडर में डाला जायेगा।

इसके बाद स्लरी तैयार की जायेगी।

स्लरी को पंप के जरिए फीड टैंक से डाइजेस्टर में भेजा जायेगा।

एनेरोबिक डाइजेशन प्रक्रिया से रॉ बायोगैस तैयार होगी।

गैस क्लीनिंग सिस्टम में कार्बन डाईऑक्साइड को मीथेन से अलग किया जायेगा।

अंत में शुद्ध मीथेन को कंप्रेस कर बायो-CNG में बदला जायेगा।

इस प्लांट से प्रतिदिन लगभग 10 टन निगम व खाद्य अपशिष्ट को संसाधित कर गैस उत्पादन संभव है। हालांकि यह अपशिष्ट की गुणवत्ता और नमी पर निर्भर करेगा।

डॉ. वीए सेल्वी के नेतृत्व में नई ऊर्जा क्रांति

इस परियोजना का नेतृत्व वरिष्ठ प्रधान विज्ञानी डॉ. वीए सेल्वी कर रही हैं। वे नवीकरणीय ऊर्जा और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश की अग्रणी वैज्ञानिकों में शामिल हैं। डॉ. सेल्वी वर्तमान में 24 शोध परियोजनाओं की प्रधान अन्वेषक हैं। इनमें शामिल हैं—

सूक्ष्मजीव मार्ग से कार्बन डाईऑक्साइड अवशोषण

कोयले का जैवमेथेनीकरण

नगरपालिका ठोस अपशिष्ट से जैव इथेनॉल उत्पादन

माइक्रोबियल ईंधन सेल

खान अपशिष्ट से दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का जैव-खनन

स्मार्ट एल्गल लिक्विड ट्री (SALT) परियोजना

25 पेटेंट, 80 से अधिक शोध पत्र

डॉ. सेल्वी ने IIT खड़गपुर और IISc बैंगलोर से उच्च शिक्षा प्राप्त की है।
उनकी उपलब्धियां—

25 पेटेंट/कॉपीराइट आवेदन

80+ राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र

15 अंतरराष्ट्रीय जर्नल की समीक्षक

105 से अधिक छात्रों का मार्गदर्शन

गेल (इंडिया) लिमिटेड व एनसीएल जैसी कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग

उन्हें गेट फेलोशिप, अपराजिता पुरस्कार, महिला गौरव पुरस्कार सहित कई राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं।

 शहर को क्या होगा फायदा

 कचरा प्रबंधन की समस्या में कमी
स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा का विकल्प
 पर्यावरण प्रदूषण में कमी
 कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद
 स्थानीय स्तर पर ऊर्जा आत्मनिर्भरता

यह पहल धनबाद को "कचरे से ऊर्जा" मॉडल की दिशा में आगे बढ़ाने वाली साबित हो सकती है। यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो भविष्य में बड़े पैमाने पर ऐसे प्लांट स्थापित किए जा सकते हैं।

 निष्कर्ष

धनबाद में सिंफर द्वारा स्थापित बायो-CNG प्लांट शहर के लिए पर्यावरण और ऊर्जा दोनों मोर्चों पर गेम-चेंजर साबित हो सकता है। कचरे को समस्या नहीं, संसाधन में बदलने की यह पहल झारखंड के अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है।