IPS प्रवीण सूद ही रहेंगे CBI चीफ, राहुल गांधी की असहमति के बाद केंद्र ने बढ़ाया कार्यकाल
केंद्र सरकार ने CBI निदेशक प्रवीण सूद का कार्यकाल 24 मई 2027 तक बढ़ा दिया है। नए निदेशक के चयन पर राहुल गांधी की असहमति के बाद कैबिनेट नियुक्ति समिति ने यह फैसला लिया। जानिए पूरी राजनीतिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि।
- नए CBI डायरेक्टर पर नहीं बनी सहमति
- प्रवीण सूद का कार्यकाल 2027 तक बढ़ा
- राहुल गांधी की असहमति के बाद केंद्र का फैसला
- नियुक्ति समिति का बड़ा फैसला
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के निदेशक आईपीएस अधिकारी Praveen Sood का कार्यकाल केंद्र सरकार ने एक साल के लिए और बढ़ा दिया है। अब वह 24 मई 2027 तक देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी के प्रमुख बने रहेंगे। यह फैसला उस समय लिया गया, जब नए सीबीआई निदेशक के चयन को लेकर बनी उच्चस्तरीय समिति किसी नए नाम पर सहमति नहीं बना सकी।
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सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने सरकार की ओर से सुझाए गए किसी भी नाम पर सहमति नहीं दी। इसके बाद सरकार के पास मौजूदा निदेशक प्रवीण सूद को सेवा विस्तार देने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचा।
कैबिनेट नियुक्ति समिति ने जारी किया आदेश
बुधवार देर रात कैबिनेट की नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet) ने आधिकारिक आदेश जारी कर प्रवीण सूद के कार्यकाल विस्तार को मंजूरी दे दी। उनका मौजूदा कार्यकाल 24 मई 2026 को समाप्त हो रहा था, जिसे अब एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है। प्रवीण सूद अगस्त 2021 से सीबीआई निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वह कर्नाटक कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रहे हैं और राज्य के डीजीपी पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
पीएमओ में हुई बैठक में नहीं बनी सहमति
सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में सीबीआई निदेशक की नियुक्ति को लेकर अहम बैठक हुई थी। इस चयन समिति में प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश के प्रतिनिधि तथा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष शामिल होते हैं। बैठक के दौरान नए निदेशक के लिए कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों पर चर्चा हुई, लेकिन किसी एक नाम पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने प्रस्तुत नामों पर असहमति जताई, जिसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
पहले भी मिल चुका है एक्सटेंशन
प्रवीण सूद को तीन साल पहले सीबीआई निदेशक नियुक्त किया गया था। निर्धारित कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें पहले भी सेवा विस्तार दिया गया था। अब लगातार दूसरी बार उन्हें एक्सटेंशन मिला है। राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष इसे केंद्र सरकार की रणनीति बता रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि एजेंसी की कार्यप्रणाली में निरंतरता बनाए रखने के लिए यह फैसला जरूरी था।
क्यों अहम है CBI निदेशक की नियुक्ति?
सीबीआई निदेशक का चयन देश की सबसे संवेदनशील नियुक्तियों में माना जाता है। एजेंसी कई बड़े भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराध और हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच करती है। ऐसे में निदेशक की नियुक्ति पर राजनीतिक और प्रशासनिक सहमति बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।सीबीआई निदेशक का कार्यकाल सामान्यतः दो वर्ष का होता है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार सेवा विस्तार दे सकती है।






