झारखंड में दारोगा से इंस्पेक्टर प्रमोशन पर HC की ब्रेक, वरीयता सूची पर उठा बड़ा सवाल
झारखंड हाई कोर्ट ने दारोगा से इंस्पेक्टर पद पर होने वाली प्रोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। 2017 की दारोगा बहाली की वरीयता सूची को लेकर उठे विवाद पर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
- 2017 दारोगा बहाली बना विवाद की जड़
- हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
- अगली सुनवाई तक इंस्पेक्टर प्रोन्नति पर रोक
- सीधी बहाली बनाम विभागीय परीक्षा
रांची (Threesocieties.com Desk) : झारखंड पुलिस महकमे में दारोगा (सब इंस्पेक्टर) से इंस्पेक्टर पद पर होने वाली प्रोन्नति प्रक्रिया पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। झारखंड हाई कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई करते हुए प्रोन्नति प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश दिया। मामला वर्ष 2017 की दारोगा बहाली और उससे जुड़ी वरीयता सूची में कथित विसंगतियों से जुड़ा है।
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राजधानी रांची स्थित झारखंड हाई कोर्ट में जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में इस मामले पर सुनवाई हुई। अदालत ने राज्य सरकार सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला वर्ष 2017 में हुई दारोगा नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा है। उस समय दो अलग-अलग माध्यमों से दारोगा बहाली की गई थी।
पहला, सीधी नियुक्ति (Direct Recruitment)
दूसरा, सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा (Limited Departmental Competitive Exam)
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सीधी नियुक्ति की प्रक्रिया पहले शुरू हुई थी, लेकिन बाद में तैयार की गई वरीयता सूची में विभागीय परीक्षा से चयनित अधिकारियों को ऊपर स्थान दे दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने इसे नियमों और सेवा शर्तों के खिलाफ बताते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा?
उत्तम तिवारी एवं अन्य की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया कि प्रोन्नति संबंधी वरीयता सूची तैयार करने में वरिष्ठता नियमों का पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन ने अदालत को बताया कि विभाग ने प्रोन्नति सूची में ऐसे अधिकारियों को प्राथमिकता दी है, जिनकी नियुक्ति प्रक्रिया बाद में हुई थी। इससे सीधे नियुक्त दारोगाओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई तक दारोगा से इंस्पेक्टर पद पर किसी भी तरह की प्रोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों से पूछा है कि वरीयता सूची किस आधार पर तैयार की गई और इसमें वरिष्ठता तय करने के लिए कौन से नियम अपनाए गए।
पुलिस विभाग में बढ़ सकती है हलचल
हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद झारखंड पुलिस मुख्यालय और गृह विभाग में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इस फैसले का असर बड़ी संख्या में उन दारोगाओं पर पड़ेगा जो इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति का इंतजार कर रहे थे। अगर अदालत अंतिम सुनवाई में वरीयता सूची में गड़बड़ी पाती है तो पूरी प्रोन्नति प्रक्रिया दोबारा तय करनी पड़ सकती है। इससे पुलिस विभाग में प्रशासनिक फेरबदल भी संभव है।
21 जुलाई पर टिकी निगाहें
अब सभी की नजरें 21 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। इस दौरान राज्य सरकार को अपना पक्ष रखना होगा और यह स्पष्ट करना होगा कि वरिष्ठता सूची तैयार करने में किन नियमों का पालन किया गया।






