Dhanbad: मांदर की थाप पर झूमा पुलिस महकमा, सरहुल में SSP प्रभात कुमार ने दिया समरसता का संदेश

धनबाद पुलिस लाइन में सरहुल पर्व धूमधाम से मनाया गया। SSP प्रभात कुमार समेत पुलिस अधिकारी मांदर की थाप पर झूमते नजर आए और समाज में शांति व समरसता का संदेश दिया।

Dhanbad: मांदर की थाप पर झूमा पुलिस महकमा, सरहुल में SSP प्रभात कुमार ने दिया समरसता का संदेश
मांदर की थाप पर झूमते एसपी प्रभात कुमार व अन्य।

धनबाद (Threesocieties.com Desk): कोयला राजधानी धनबाद के पुलिस लाइन में आदिवासी समाज के प्रमुख पर्व सरहुल का आयोजन पूरे उत्साह, श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। इस मौके पर पुलिस विभाग का पूरा परिसर सांस्कृतिक रंग में रंगा नजर आया।

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कार्यक्रम में धनबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रभात कुमार खुद शामिल हुए और उन्होंने पूजा-अर्चना कर जिले में शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

 पूजा-अर्चना से हुई शुरुआत

पुलिस लाइन स्थित पुलिस केंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। सरहुल पर्व, जो प्रकृति और सृष्टि के प्रति आदिवासी समाज की आस्था का प्रतीक है, उसे पूरे सम्मान के साथ मनाया गया। SSP प्रभात कुमार ने इस अवसर पर सभी पुलिस कर्मियों को सरहुल की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व हमें प्रकृति से जुड़ने और सामाजिक समरसता बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

मांदर की थाप पर झूमे अधिकारी और जवान

पूजा के बाद कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह उत्सव में बदल गया। ढोल-नगाड़ों और खासकर मांदर की थाप पर पुलिस अधिकारी और जवान खुद को थिरकने से नहीं रोक सके। इस दौरान SSP प्रभात कुमार भी मांदर बजाते नजर आए, जिसका वीडियो और दृश्य पूरे आयोजन का आकर्षण बन गया। पारंपरिक गीतों और नृत्य ने माहौल को जीवंत और ऊर्जा से भर दिया।

भाईचारे और एकता का संदेश

इस मौके पर मौजूद अधिकारियों—SP ट्रैफिक, DSP साइबर समेत कई वरीय पदाधिकारियों ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन पुलिस बल के बीच आपसी तालमेल, भाईचारा और एकता को मजबूत करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और समाज में सौहार्द का प्रतीक है।

 मिलकर मनाई खुशियां

कार्यक्रम के अंत में सभी पुलिसकर्मियों और अधिकारियों ने एक-दूसरे को सरहुल की शुभकामनाएं दीं और इस पारंपरिक त्योहार की खुशियों को साझा किया। धनबाद पुलिस लाइन में मनाया गया यह सरहुल उत्सव न केवल सांस्कृतिक रूप से समृद्ध रहा, बल्कि इसने सामाजिक समरसता और एकता का मजबूत संदेश भी दिया।