धनबाद में ‘अपनों’ के खिलाफ मोर्चा! कोयला-लोहा तस्करी पर सत्ताधारी नेताओं का सड़क संग्राम

धनबाद में अवैध कोयला, लोहा, बालू, पशु और मछली तस्करी के खिलाफ सियासत गरम। झामुमो विधायक मथुरा प्रसाद महतो के बेटे दिनेश महतो ने आंदोलन का ऐलान किया, प्रशासन पर निष्क्रियता के आरोप।

धनबाद में ‘अपनों’ के खिलाफ मोर्चा! कोयला-लोहा तस्करी पर सत्ताधारी नेताओं का सड़क संग्राम
दिनेश महतो ने खोला मोर्चा।

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धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद कोयलांचल में इन दिनों अवैध कोयला, लोहा, बालू, पशु और मछली तस्करी को लेकर सियासत चरम पर है। हैरानी की बात यह है कि इस बार विरोधी दल नहीं, बल्कि सत्ताधारी गठबंधन के नेता ही इसके खिलाफ सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। इससे राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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पहले निरसा में अभियान, अब बाघमारा में आंदोलन का ऐलान

झामुमो गठबंधन सरकार को समर्थन दे रही भाकपा माले के निरसा विधायक अरूप चटर्जी पहले ही सड़कों पर उतरकर अवैध कोयला और लोहा लदे वाहनों के खिलाफ अभियान चला चुके हैं। अब झामुमो विधायक मथुरा प्रसाद महतो के पुत्र और युवा नेता दिनेश महतो ने भी मोर्चा खोल दिया है।

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दिनेश महतो ने बांस कपूरिया भेलाटांड़ स्थित स्व. प्यारेलाल उद्यान में समर्थकों के साथ बैठक कर जिलेभर में व्यापक आंदोलन की रणनीति बनाई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब स्थानीय लोगों के साथ मिलकर तस्करी के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे।

इन इलाकों में तस्करी ‘हॉटस्पॉट’

दिनेश महतो के मुताबिक, बाघमारा, झरिया, तेतुलमारी, राजगंज, गोविंदपुर, तोपचांची, टुंडी और पूर्वी टुंडी समेत कई थाना क्षेत्रों में अवैध तस्करी बड़े पैमाने पर चल रही है।

कोयला तस्करी: तेतुलमारी, झरिया, गोविंदपुर और बाघमारा बने हॉटस्पॉट
रूट: राजगंज होते हुए तोपचांची के रास्ते बिहार, यूपी सहित अन्य राज्यों में सप्लाई
बालू खनन: बराकर और दामोदर नदी से अवैध उत्खनन
पशु तस्करी: निरसा, गोविंदपुर और राजगंज के रास्ते बंगाल तक नेटवर्क

सरकार को नुकसान, अपराध में बढ़ोतरी का आरोप

दिनेश महतो ने कहा कि इस अवैध तस्करी से राज्य सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है। साथ ही, जिले में आपराधिक घटनाओं में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले में निष्क्रिय बना हुआ है, जिससे तस्करों का मनोबल बढ़ रहा है।

खुद कार्रवाई की चेतावनी

दिनेश महतो ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए, तो वे खुद सड़कों पर उतरकर तस्करी में लगे वाहनों को पकड़ेंगे और पुलिस को सौंपेंगे। उन्होंने साफ कहा: “अगर इस दौरान कानून-व्यवस्था की कोई समस्या होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।”

सियासी संदेश क्या है?

धनबाद में सत्ताधारी दल के नेताओं द्वारा ही तस्करी के खिलाफ आंदोलन की घोषणा कई सवाल खड़े कर रही है—

क्या सरकार के अंदर ही सिस्टम पर भरोसा कम हो रहा है?
क्या यह अंदरूनी राजनीतिक दबाव की रणनीति है?
या फिर जनता के बीच मजबूत संदेश देने की कोशिश?

फिलहाल इतना तय है कि आने वाले दिनों में धनबाद की सियासत और गर्म होने वाली है।

मुख्य विपक्षी दल भाजपा के जिले के नेताओं की चुप्पी !

हालांकि राज्य के मुख्य विपक्षी दल भाजपा के जिले के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी को लेकर तरह-तरह की चर्चा है। भाजपा के जिले के नेता इस मामले में हाल के महीनों में खुलकर विरोध नहीं करते हैं। आरोप लगता है कि इलिगल कोल कारोबार से बड़ी संख्या में भाजपा समर्थक जुड़े हुए हैं। इस कारण लोकल लीडर मौन रहते हैं।