पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा धनबाद का वांटेड प्रिंस खान, ‘मेजर’ की गिरफ्तारी से हत्याओं का नेटवर्क बेनकाब

धनबाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई में प्रिंस खान गैंग के मास्टरमाइंड ‘मेजर’ की गिरफ्तारी के बाद सनसनीखेज खुलासे। दुबई से बनी हत्या की साजिश, पाकिस्तान में शरण और जैश-ए-मोहम्मद से संबंध की पुष्टि।

पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा धनबाद का वांटेड प्रिंस खान, ‘मेजर’ की गिरफ्तारी से हत्याओं का नेटवर्क बेनकाब
‘मेजर’ की गिरफ्तारी से खुला प्रिंस खान का पूरा नेटवर्क।

धनबाद (Threesocieties.com Desk): कोयलांचल में आतंक का दूसरा नाम बन चुके भगोड़े अपराधी हैदर अली उर्फ प्रिंस खान उर्फ छोटे सरकार के गैंग पर धनबाद पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा वार किया है। गैंग के ‘मास्टरमाइंड’ और प्रिंस खान के दाहिने हाथ माने जाने वाले सैयद अब्बास नकवी उर्फ सैफी उर्फ मेजर की गिरफ्तारी के बाद ऐसे खुलासे हुए हैं, जिसने पूरे आपराधिक नेटवर्क को हिलाकर रख दिया है।

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धनबाद पुलिस ने प्रिंस खान के सहयोगी मेजर को रिमांड पर लेकर पूछताछ की। मेजर को पुलिस ने दुबई भागने से पहले कोलकाता से गिरफ्तार किया था। पुलिस पूछताछ में मेजर ने न सिर्फ गिरोह के आर्थिक और तकनीकी तंत्र की परतें खोलीं, बल्कि प्रिंस खान के आतंकी कनेक्शन और उसके वर्तमान ठिकाने का भी खुलासा कर दिया। एसएसपी प्रभात कुमार ने प्रेस कांफ्रेस कर पुलिस रिमांड पर सैयद अब्बास नकवी उर्फ सैफी उर्फ मेजर से पूछताछ में मिली जानकारी के बारे में बताया। एसपी के अनुसार सैफी पिछले कई वर्षों से जिले में रंगदारी, गोलीबारी और बमबाजी जैसी वारदातों को अंजाम देने में सक्रिय था। पुलिस पूछताछ में मेजर ने लगभग तीन दर्जन मामलों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। 

सैफी ने पुलिस को बताया कि वह गैंग के लिए तकनीकी और वित्तीय मैनेजमेंट संभालता था – जैसे वर्चुअल नंबर उपलब्ध कराना, धमकी भरे कॉल करना, और रंगदारी की रकम को हवाला, बैंक ट्रांसफर और बिटकॉइन के जरिए प्रिन्स खान तक पहुंचाना। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि पुलिस दबाव के कारण प्रिन्स खान दुबई से भागकर पाकिस्तान में शरण लिए हुए है। वह प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ चुका है। मेजर ने बताया कि गैंग में दरार भी आ गई थी और पाकिस्तान जाने को लेकर मतभेद के बाद उसे गैंग से अलग कर दिया गया था।

पाकिस्तान में छिपा प्रिंस खान, आतंकी संगठन से गठजोड़

मेजर के मुताबिक, दुबई में बढ़ती पुलिस दबिश के बाद प्रिंस खान अवैध रूप से पाकिस्तान भाग गया है। वहां उसने प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से हाथ मिला लिया है। बताया गया कि एक पाकिस्तानी महिला की मदद से उसे वहां शरण मिली। यह खुलासा सुरक्षा एजेंसियों के लिए बेहद गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि इससे स्थानीय अपराध और अंतरराष्ट्रीय आतंक नेटवर्क के बीच कनेक्शन की पुष्टि होती है।

प्रिंस खान के ‘सफेदपोश’ कनेक्शन का खुलासा! नेताओं-मीडिया तक पहुंचा गैंग का नेटवर्क

वासेपुर का भगोड़ा बदमाश प्रिंस खान के सहयोगी सैयद अब्बास नकवी उर्फ सैफी उर्फ मेजर से पूछताछ के बाद पुलिस ने दावा किया है कि गैंग ने दहशत फैलाने के लिए मीडिया और कुछ प्रभावशाली लोगों का भी इस्तेमाल किया। मेजर ने पुलिस पूछताछ में बताया कि कुछ लोग प्रिंस खान से आर्थिक रूप से लाभान्वित हो रहे थे और अप्रत्यक्ष रूप से गिरोह के लिए काम कर रहे थे। इसके अलावा उसने यह भी कहा कि गैंग के तार कुछ सफेदपोश और राजनीतिक व्यक्तियों से भी जुड़े हुए हैं। पुलिस अब इन सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है।

एसएसपी प्रभात कुमार ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया को प्रिंस खान गिरोह, उसकी करतूतों और उसके मददगारों के बारे में जानकारी दी एसएसपी ने बताया कि प्रिंस खान के तार मीडिया और राजनीतिक दलों से भी जुड़े हैं। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं बताया। वहीं, लोग जानना चाहते हैं कि किन दलों के किन नेताओं से प्रिंस के संबंध जुड़े हैं। एसएसपी ने बताया कि रिमांड पर पूछताछ के दौरान मेजर ने अपने खिलाफ दर्ज करीब तीन दर्जन आपराधिक मामलों में प्रत्यक्ष संलिप्तता स्वीकार की। इसके साथ ही उसने कई अन्य मामलों में भी अपनी अप्रत्यक्ष भूमिका का खुलासा किया। धनबाद और आसपास के इलाकों में रंगदारी, गोलीबारी और बमबाजी की अधिकांश घटनाओं के पीछे प्रिंस खान गिरोह की सुनियोजित रणनीति काम कर रही थी, जिसमें उसकी भूमिका भी बेहद अहम थी।

संगठित अपराध का माडल: टारगेट से वसूली तक पूरी चेन
मेजर ने पूछताछ में बताया कि गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। सबसे पहले जिले के बड़े व्यवसायियों, डाक्टरों, ठेकेदारों और अन्य सक्षम लोगों को चिन्हित किया जाता था। इसके बाद उनके बारे में पूरी जानकारी जुटाई जाती थी, खासकर कहां रहते हैं, क्या कारोबार है, आर्थिक स्थिति क्या है। तमाम जानकारी के बाद गिरोह के सदस्य उनसे संपर्क साधते थे और मोबाइल काल, वर्चुअल नंबर या अन्य माध्यमों से धमकी देकर रंगदारी की मांग की जाती थी। रकम वसूलने के बाद उसे अलग-अलग माध्यमों से सुरक्षित तरीके से प्रिंस खान तक पहुंचाया जाता था। इस पूरे नेटवर्क में मेजर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी। वह न सिर्फ टारगेट तय करने में शामिल था, बल्कि गिरोह के सदस्यों को हथियार उपलब्ध कराना, वसूली गई रकम का प्रबंधन करना, अपराधियों को सुरक्षित ठिकाना देना और पूरे आपरेशन को समन्वित करना भी उसके जिम्मे था।

डिजिटल और फाइनेंशियल सिस्टम संभालता था मेजर
पूछताछ में यह भी सामने आया कि गैंग का तकनीकी और वित्तीय संचालन पूरी तरह मेजर के हाथ में था। वह वर्चुअल नंबर उपलब्ध करवाता था, जिनके जरिए रंगदारी के लिए काल की जाती थी ताकि पुलिस ट्रेस न कर सके। मोबाइल फोन और इंटरनेट के माध्यम से धमकी भरे संदेश भेजना भी उसी का काम था। सबसे अहम भूमिका उसकी पैसे के ट्रांजेक्शन में थी। उसने बताया कि रंगदारी की रकम को सीधे प्रिंस खान तक पहुंचाने के लिए बैंक खातों, हवाला, बिटकाइन और एटीएम में नकद जमा जैसे कई तरीकों का इस्तेमाल किया जाता था। पूछताछ में उसने 100 से अधिक बैंक खातों की जानकारी दी है, जिनके जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ। पुलिस अब इन खातों की गहराई से जांच कर रही है। मेजर ने यह भी बताया कि प्रिंस खान और उसके परिवार के सदस्य ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, इसलिए शुरुआत में उन्हें तकनीकी और वित्तीय मामलों में काफी परेशानी होती थी। इसी वजह से मेजर धीरे-धीरे उसका सबसे भरोसेमंद और करीबी सहयोगी बन गया।

इंटरनेशनल नेटवर्क का खुलासा
मेजर ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि पुलिस का दबाव बढ़ने के बाद प्रिंस खान के लिए दुबई में रहना मुश्किल हो गया था। गिरफ्तारी के डर से वह अवैध रूप से पाकिस्तान भाग गया। उसने बताया कि प्रिंस खान को पाकिस्तान भागने में उसके घर में काम करनेवाली एक पाकिस्तानी नौकरानी ने मदद की। वर्तमान में वह पाकिस्तान में उसी के घर में रह रहा है।  अभी वह प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ चुका है। यह खुलासा धनबाद पुलिस के लिए बेहद गंभीर है, क्योंकि इससे इस पूरे गिरोह के अंतरराष्ट्रीय आतंकी कनेक्शन की आशंका मजबूत हुई है।

मीडिया और सफेदपोशों का इस्तेमाल
पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह ने दहशत फैलाने के लिए मीडिया और कुछ प्रभावशाली लोगों का भी इस्तेमाल किया। मेजर ने पुलिस को बताया है कि कुछ लोग प्रिंस खान से आर्थिक रूप से लाभान्वित हो रहे थे और अप्रत्यक्ष रूप से गिरोह के लिए काम कर रहे थे। उसने यह भी कहा कि गैंग के तार कुछ सफेदपोश और राजनीतिक व्यक्तियों से भी जुड़े हुए हैं। पुलिस अब इन सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है।

मेजर और प्रिंस के बीच विवाद
मेजर ने बताया कि पिछले कुछ समय से उसका और प्रिंस खान का संबंध खराब हो गया था। पाकिस्तान जाने के मुद्दे पर दोनों के बीच मतभेद हुआ। इसके बाद प्रिंस खान ने उसकी जगह अपने रिश्तेदार आदिल को गिरोह में अहम जिम्मेदारी दे दी। मेजर ने यह भी कहा कि प्रिंस खान उसे हमेशा नौकर की तरह समझता था, जिससे वह नाराज था और वर्ष 2025 में उसने अलग होकर खुद रंगदारी का काम शुरू कर दिया।

चर्चित अपराधों में संलिप्तता का खुलासा
मेजर ने कई बड़े और चर्चित मामलों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। इनमें शामिल इसराफिल लाला के घर बमबाजी माडर्न टायर दुकान पर गोलीबारी, शाही दरबार रेस्टोरेंट पर फायरिंग, क्लीनिक लैब पर हमला,अप्सरा ड्रेसेस दुकान पर गोलीबारी, संवेदक रामनरेश सिंह के घर पर फायरिंग के अलावा उसने कई हत्याकांडों का भी खुलासा किया है।

2018 में कुसुंडा फाटक के पास रंजीत सिंह की गोलीमारकर हत्या,
2021: जमीन विवाद में लाला खान पर गोलीबारी
2023: उपेंद्र सिंह की हत्या जिसमें मृतक की पत्नी की संलिप्तता का भी दावा
2024: मो. शहाबुद्दीन सिद्दीकी की हत्या, जेल से बना अपराध का नेटवर्क

मेजर ने बताया कि जब वह और गिरोह के अन्य सदस्य झारखंड के विभिन्न जेल धनबाद, चाईबासा, पलामू और हजारीबाग में बंद था तब उन्होंने अलग-अलग इलाकों के अपराधियों से संपर्क बनाया। इन्हीं संपर्कों का इस्तेमाल बाद में शूटर और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए किया गया था।

मेजर ही था गैंग का ‘ब्रेन’,करोड़ों की कमाई का निवेश

कम पढ़े-लिखे प्रिंस खान और उसके परिवार के लिए मेजर ही पूरा सिस्टम चलाता था। वर्चुअल नंबर से रंगदारी कॉल, हवाला, बिटकॉइन और बैंक ट्रांसफर से पैसों का लेनदेन, 100 से ज्यादा बैंक खातों का इस्तेमाल। पुलिस अब इन खातों और लेनदेन की गहराई से जांच कर रही है। मेजर ने बताया कि रंगदारी के जरिए कमाए गए करोड़ों रुपये को जमीन और अन्य व्यवसायों में निवेश किया गया है। इन निवेशों में परिवार और करीबी सहयोगियों का इस्तेमाल किया गया है ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके। पुलिस अब इन संपत्तियों की पहचान कर साक्ष्य जुटाने में लगी है।

दुबई में बनी थी नन्हें हत्यांकांड की योजना,पत्नी ने सुपारी देकर कराई उपेंद्र सिह की मर्डर !

मेजर से पूछताछ में कई हाई-प्रोफाइल मामलों से पर्दा उठा है। नन्हे खान हत्याकांड की साजिश दुबई में रची गई थी। उपेंद्र सिंह हत्याकांड (2023) में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सैफी के अनुसार पत्नी ने ही अपराधियों के साथ मिलकर उपेंद्र की हत्या कराई। रंजीत सिंह (2018) और लाला खान (2021) पर हमले: प्रिंस खान और मेजर की सीधी भूमिका थी। शहर के कई प्रतिष्ठानों पर फायरिंग में भी गैंग की संलिप्तता सामने आई है।शाही दरबार रेस्टोरेंट, मॉडर्न टायर और क्लीनिक लैब जैसे प्रतिष्ठानों पर हुई गोलीबारी में भी मेजर सीधे तौर पर शामिल था।

सफेदपोश और मीडिया कनेक्शन की भी जांच

मेजर ने बताया कि दहशत फैलाने के लिए कुछ मीडिया कर्मियों और प्रभावशाली लोगों का भी सहारा लिया जाता था। पुलिस अब इन ‘सफेदपोश’ चेहरों की भूमिका की जांच में जुटी है।

गैंग में दरार, अलग हो गया ‘मेजर’

2025 से ही मेजर और प्रिंस खान के बीच मतभेद शुरू हो गए थे।

प्रिंस के पाकिस्तान भागने का फैसला
रिश्तेदार आदिल को प्राथमिकता देना

इन कारणों से मेजर ने अपना अलग गिरोह बना लिया था।

डरपोक और नशे का आदी बताया प्रिंस खान

मेजर के मुताबिक: 2023 में जेल के अंदर अमन सिंह की हत्या की खबर सुनकर प्रिंस खान बेहोश हो गया था। वह नशीली दवाओं का आदी है। नशे की हालत में कई अपराधों को अंजाम देता था

प्रिंस खान को अब नहीं मिल रहे हैं नये शूटर 

सैफी ने खुलासा किया है कि पुलिस की लगातार छापेमारी और गिरफ्तारियों के कारण प्रिंस खान को अब नए शूटर नहीं मिल रहे हैं। वह भोले-भाले युवाओं को पैसों का लालच देकर अपराध कराता है। पकड़े जाने पर उन्हें उनके हाल पर छोड़ देता है। फिलहाल गिरोह का संचालन दुबई से ही प्रिंस खान का बड़ा भाई गोपी खान, रिश्तेदार आदिल, ऋत्विक खान और प्रिंस की दोनों पत्नियां कर रही हैं। प्रिंस खान के भारत में रह रहे दो भाई एवं अन्य रिशेतदार भी उसके गैंग को मदद पहुंचा रहे हैं। 

सैफी के अनुसार कुछ माह पहले तक धनबाद से लगभग एक करोड़ रुपये हर महीने रंगदारी वसूल रहा था, वर्तमान में रंगदारी की राशि काफी कम हो गयी है। एसएसपी ने बताया कि अभी भी धनबाद के कई हिस्सों से व्यपारियों द्वारा प्रिंस खान को रुपये भेजे जा रहें हैं। उन्होंने कहा कि अब प्रिंस खान को रुपये भेजना बंद करें, क्योंकि अब आप प्रिंस खान को पैसे भेजते हैं तो समझिए आप एक आतंकवादी को आर्थिक मदद पहुंचा रहे हैं।

पुलिस की अगली बड़ी कार्रवाई की तैयारी

धनबाद पुलिस अब:

100 बैंक खातों की जांच
निवेश की गई जमीनों का ट्रैक
गैंग के मददगारों की पहचान

पर तेजी से काम कर रही है। जल्द ही और बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।