झारखंड टेंडर घोटाला: 14 इंजीनियरों पर ED का शिकंजा, 90 करोड़ की काली कमाई जब्त करने की तैयारी
झारखंड के बहुचर्चित टेंडर कमीशन घोटाले में ED का बड़ा एक्शन। पूर्व मंत्री आलमगीर आलम से जुड़े 14 इंजीनियरों की संपत्ति जब्ती की तैयारी, 90 करोड़ की अवैध कमाई का खुलासा।
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में बहुचर्चित टेंडर कमीशन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। ग्रामीण कार्य विभाग से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल मामले में ED ने पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के करीबियों पर शिकंजा कसते हुए अब 14 चार्जशीटेड इंजीनियरों की चल-अचल संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
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जांच एजेंसी के मुताबिक, इन इंजीनियरों ने टेंडर आवंटन के बदले कमीशन वसूली कर न केवल अवैध संपत्ति अर्जित की, बल्कि उस राशि को विभागीय अधिकारियों और मंत्री स्तर तक पहुंचाने में भी भूमिका निभाई।
कमीशन के खेल का पूरा नेटवर्क उजागर
ED की जांच में खुलासा हुआ है कि ग्रामीण कार्य विभाग, ग्रामीण विकास विशेष क्षेत्र और झारखंड राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण में टेंडर पास कराने के लिए ठेकेदारों से करीब 3% कमीशन लिया जाता था। इस रकम का बंटवारा भी तय था:
1.35% हिस्सा तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम तक पहुंचता था
0.65% से 1% विभागीय सचिव स्तर पर जाता था
बाकी राशि मुख्य अभियंताओं और अन्य इंजीनियरों में बांटी जाती थी
90 करोड़ की अवैध संपत्ति का खुलासा
ED ने अपनी चार्जशीट में बताया है कि करीब 3048 करोड़ रुपये के टेंडर आवंटन में इस संगठित रैकेट के जरिए लगभग 90 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति बनाई गई। अब तक ED 44 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर चुकी है। 38 करोड़ रुपये नकद भी बरामद किए जा चुके हैं।अब अगला टारगेट इन 14 इंजीनियरों की संपत्तियां हैं।
इन इंजीनियरों पर गिरी गाज
जिन 14 इंजीनियरों की संपत्ति खंगाली जा रही है, उनमें शामिल हैं: सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता: सिंगराई टुटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, कार्यपालक अभियंता: संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राज कुमार टोप्पो, अशोक कुमार गुप्ता, सिद्धांत कुमार, अनिल कुमार. सहायक अभियंता: राम पुकार राम, रमेश ओझा, पूर्व अधीक्षण अभियंता/मुख्य अभियंता: उमेश कुमार।
कैसे खुला पूरा घोटाला
इस पूरे घोटाले की शुरुआत एक छोटे केस से हुई थी। जूनियर इंजीनियर सुरेश प्रसाद वर्मा को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। इसके बाद एसीबी जमशेदपुर ने छापेमारी में तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम के ठिकाने से 2.67 करोड़ रुपये नकद बरामद किए। यहीं से ED की एंट्री हुई और जांच में एक बड़े संगठित कमीशन रैकेट का पर्दाफाश हुआ।
अब भी जेल में कई बड़े आरोपी
इस मामले में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल सहित कई आरोपी अभी भी जेल में बंद हैं। ED अब तक कुल 36 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
आगे क्या?
सूत्रों के अनुसार, ED जल्द ही PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग) के तहत इन इंजीनियरों की संपत्तियों को अटैच (जब्त) करने की औपचारिक कार्रवाई शुरू कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह झारखंड के सबसे बड़े टेंडर घोटालों में एक ऐतिहासिक कार्रवाई मानी जाएगी।






