धनबाद: दूरस्थ गांवों में पहुंचे DC आदित्य रंजन, संध्या चौपाल में सुनी जनता की आवाज; आत्मनिर्भर गांव बनाने पर जोर
धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन ने तोपचांची प्रखंड के दूरस्थ नेरो पंचायत में संध्या चौपाल लगाकर ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने जल संरक्षण, बिरसा हरित ग्राम योजना, बागवानी, पशुपालन और आत्मनिर्भर गांव के निर्माण पर जोर दिया।
- तोपचांची के नेरो पंचायत में ग्रामीणों से सीधा संवाद
- जल संरक्षण, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन को बताया विकास की कुंजी
धनबाद (Threesocieties.com Desk): जिले के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन ने सोमवार को तोपचांची प्रखंड के नेरो पंचायत का दौरा किया। उन्होंने यहां आयोजित संध्या चौपाल में हिस्सा लेकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को करीब से समझा।
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इस दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और अंचल अधिकारी (CO) भी मौजूद रहे। चौपाल में गड़ीडीह, रंगरंगी, निमडीह, अमराडीह और मदनपुर सहित कई गांवों के ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंचे। ग्रामीणों ने अलग-अलग स्थानों पर बुके देकर उपायुक्त का स्वागत किया और पूरे उत्साह के साथ पंचायत का भ्रमण कराया।
गांवों के विकास में सामूहिक भागीदारी जरूरी
संध्या चौपाल को संबोधित करते हुए उपायुक्त आदित्य रंजन ने कहा कि गांवों के समग्र विकास के लिए सामूहिक भागीदारी सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि सिर्फ सरकारी योजनाएं बना देने से विकास संभव नहीं होता, बल्कि गांव के लोगों की सक्रिय भागीदारी और जागरूकता से ही वास्तविक बदलाव आता है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे जल संरक्षण को प्राथमिकता दें और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करें। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जल संकट बड़ी चुनौती बन सकता है, इसलिए अभी से गांवों में जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत बागवानी को बढ़ावा
उपायुक्त ने बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत बागवानी को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय का मजबूत साधन बन सकती है। फलदार पौधों की खेती से गांवों की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है और ग्रामीण आत्मनिर्भर बन सकते हैं। उन्होंने पशुपालन और मत्स्य पालन को भी आजीविका के मजबूत विकल्प के रूप में अपनाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि कृषि के साथ-साथ इन क्षेत्रों में काम कर ग्रामीण अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
सरकारी योजनाएं कागजों में नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए
उपायुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य सिर्फ योजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ सही लोगों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसी भी ग्रामीण को जानकारी के अभाव में सरकारी योजना से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पंचायत स्तर पर योजनाओं की नियमित निगरानी हो और जरूरतमंद परिवारों तक समय पर लाभ पहुंचाया जाए।
मॉडल गांव बनाने की तैयारी
दौरे के दौरान उपायुक्त ने कुछ गांवों को मॉडल गांव के रूप में विकसित करने की योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि कुछ गांवों में बेहतर विकास मॉडल तैयार किया जाता है, तो अन्य पंचायतें भी उससे प्रेरणा लेंगी और पूरे जिले में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नेरो पंचायत के किसी भी टोले को गोद नहीं लिया गया है। यह दौरा केवल पंचायत की वास्तविक स्थिति को समझने, विकास की संभावनाओं का आकलन करने और आवश्यकताओं की पहचान के लिए किया गया है।
जनप्रतिनिधियों के साथ होगी समीक्षा बैठक
चौपाल में जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी पर उपायुक्त ने कहा कि जल्द ही विधायक, मुखिया और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर विकास कार्यों की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समन्वय से ही योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव है। ग्रामीणों ने भी उपायुक्त के इस सीधे संवाद को सकारात्मक पहल बताते हुए उम्मीद जताई कि अब गांवों की समस्याओं का समाधान तेजी से होगा।
धनबाद के दूरस्थ गांवों तक प्रशासन की यह पहुंच न केवल विकास को नई दिशा दे रही है, बल्कि ग्रामीणों में भरोसा भी मजबूत कर रही है कि सरकार उनकी दहलीज तक पहुंच रही है।






