तमिलनाडु का 100 साल पुराना घर बना परिवारों का सेतु, 30 कमरों में गूंजा 300 रिश्तेदारों का मिलन
तमिलनाडु के कराईकुडी में 100 साल पुराने 30 कमरों वाले पैतृक घर की शताब्दी पर 300 से अधिक रिश्तेदार एकत्र हुए। दुबई, मलेशिया और कनाडा से भी परिवार के सदस्य पहुंचे।
नई दिल्ली। तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के कराईकुडी में स्थित एक एकड़ में फैला 30 कमरों वाला 100 साल पुराना पैतृक घर एक बार फिर रिश्तों की मजबूती का गवाह बना। इस ऐतिहासिक घर की शताब्दी के अवसर पर देश-विदेश में बसे परिवार के 300 से अधिक सदस्य एक साथ जुटे। दुबई, मलेशिया और कनाडा से भी रिश्तेदार इस खास मौके पर शामिल हुए।
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वेलंगुडी गांव में स्थित यह भव्य घर 1922 से 1926 के बीच पेरियान्नन अंबालम और उनके छोटे भाई सुब्बैया अंबालम द्वारा बनवाया गया था। एक एकड़ भूमि पर बने इस पैतृक भवन में 30 कमरे और चार रसोईघर हैं, जो उस दौर की वास्तुकला और संयुक्त परिवार की सोच को दर्शाते हैं।
विदेशों में बसे, लेकिन जड़ों से जुड़े
इस शताब्दी समारोह में कुल 65 परिवारों ने भाग लिया। परिवार के सदस्य थिरुग्नानन ने बताया कि हमने सटीक गिनती नहीं की, लेकिन पैतृक घर के सामने खिंची सामूहिक तस्वीर में लगभग 300 लोग नजर आते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों की इच्छा थी कि यह घर सौ साल बाद भी मजबूती से खड़ा रहे और परिवार को एकजुट रखे—और आज वह सपना साकार होता दिख रहा है।
घर नहीं होता, तो शायद यह मिलन भी नहीं
दुबई में रहने वाले चौथी पीढ़ी के सदस्य सरवनन सोलैमलाई ने कहा कि अगर यह घर नहीं होता, तो शायद परिवार के सभी सदस्य इस तरह जुड़े नहीं रहते। उन्होंने ही घर के जीर्णोद्धार की पहल की और भव्य शताब्दी समारोह का आयोजन किया।सरवनन ने बताया कि वर्ष 2016 में एक पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान तय किया गया था कि 100 साल पूरे होने पर इसे यादगार तरीके से मनाया जायेगा।
पीढ़ियों को जोड़ता एक घर
यह पैतृक घर सिर्फ ईंट-पत्थर की संरचना नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा, संस्कृति और पारिवारिक एकता का प्रतीक बन चुका है। बदलते समय और विदेशों में बसने के बावजूद, यह घर आज भी परिवार को एक सूत्र में बांधे हुए है।






