- चारों जिलों में 3-4 अक्टूबर के लिए जारी किया ऑरेंज अलर्ट
- पटना में राहत व बचाव कार्य जारी
- डीएम का आदेश सभी स्कूल-कॉलेज बंद
पटना: बिहार में मौसम विभाग ने चार जिलों राजधानी पटना, बेगूसराय, खगड़िया और वैशाली जिलों में अगले 48 घंटे में भारी बारिश की आशंका के मद्देनजर अरेंज अलर्ट किया है. पहले से ही राज्य में बाढ़ व बारिश के कारण जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है.भारी बारिश की अलर्ट के मद्देनजर प्रशासन सतर्क हो गया है. पटना के डीएम ने सभी स्कूलों को तीन व चार अक्टूबर को बंद करने का आदेश दिये हैं.पुनपुन नदी का बांध भी टूटा गया है.संबंधित इलाके में बाढ़ की आशंका बढ़ गयी है.

भारी बारिश के मद्देनजर मौसम विभाग ने संबंधित जिलों के प्रशासन को अलर्ट रहने और राहत सामग्री की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिये हैं.राज्य में बाढ़ व बारिश के कारण रेल परिचालन पर भी असर पड़ा है.समस्तीपुर-दरभंगा रेल मार्ग पर रेलवे ट्रैक की जमीन धंसने के कारण ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया है.पटना के जलमग्न इलाकों से पानी निकालने का कार्य लगातार जारी है.बताया जा रहा है कि पटना के कंकड़बाग में कई इलाकों से पानी निकाल दिया गया है. राजेंद्र नगर के कई इलाकों में अभी भी पानी जमा हुआ है. लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.म्यूनिशिपल कॉरपोरेशन की टीम जलमग्न इलाकों से पानी को निकालने का प्रयास कर रही है.एसके पुरी इलाके में जल निकासी के बाद सफाई अभियान के साथ इलाके में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया गया है.

बिहार में पिछले तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन के अस्तव्यस्त होने के बीच अनेक हादसों में अब तक 42 लोगों की मौतहुई है.अन्य नौ लोग घायल हुए हैं.आपदा प्रबंधन मंत्री लक्ष्मेश्वर राय ने कहा है कि अत्याधिक बारिश के कारण 42 लोगों के मारे जाने और नौ लोगों के घायल होने की सूचना है.भारी वर्षा से भागलपुर में दस, गया में छह, पटना एवं कैमूर में चार-चार,खगड़िया एवं भोजपुर में तीन-तीन, बेगूसराय,नालंदा एवं नवादा में दो-दो, पूर्णिया, जमुई, अरवल, बांका,सीतामढी एवं कटिहार में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है.
सेंट्रल मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया

प्रशासन की ओर से पटना के बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार राहत अभियान चलाये जा रहे हैं. स्वयंसेवी संस्थाओं और सरकार की ओर से राहत सामग्री भी मुहैया कराई गई है. पटना साहिब के एमपी सेंट्रल मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को पटना के बाढ़ प्रभावित हिस्सों का दौरा करते हुए अधिकारियों को आम लोगों के लिए हर संभव मदद का इंतजाम करने का निर्देश दिया है.
सीएम ने किया प्रभावित इलाकों का दौरा

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने मंगलवार को पटना के जलमग्न हो गए इलाकों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये. सीएम ने जल निकासी के कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया.
मीडिया पर भड़के सीएम
पटना के बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा करने के बाद जब मीडिया ने सीएम नीतीश कुमार से शहर की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी तो वह भड़क गये. नीतीश ने कहा कि 'हम पूछ रहे हैं कि देश के कितने हिस्सों में पानी आया है और दुनिया के कितने हिस्सों में पानी आया है. सिर्फ पटना के कुछ मोहल्लों में पानी आया है, क्या वही समस्या है? ये दुनिया में कहां है और अमेरिका में क्या हुआ.आप लोगों को जो मन आए वह करिए,आप लोगों की कोई जरूरत नहीं है. आप लोग जनजागरण के लिए भी कोई काम नहीं करिएगा.'
बाढ़ की चपेट में राज्य की 17 लाख आबादी, महामारी की आशंका
बाढ़ व जल जमाव के हालात में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है लेकिन लोगों की परेशानियां अभी भी बनी हुई है. सबसे बुरा हाल राजधानी पटना के निचले इलाके का है. पुनपुन नदी का जलस्तर में वृद्धि हो रही है. रिंग बांध टूटने से पुनपुन मुख्य बाजार सहित आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है.जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. राहत-बचाव कार्य नहीं होनें से लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है.पटना के करीब पुनपुन नदी का जलस्तर प्रति घंटे एक सेंटीमीटर की दर से बढ़ रहा है. केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, मंगलवार की शाम नदी का जलस्तर 53.82 मीटर रिकॉर्ड किया गया जो खतरे के निशान से 2.50 मीटर ऊपर है. फिलहाल नदी के उतर दिशा में पटना सुरक्षा बांध पूरी तरह सुरक्षित है.
बिहार में जलजमाव और बाढ़ की वजह से तीन दिन बाद भी स्थितियां जस की तस बनी हुई हैं.राज्य में सबसे बुरी स्थिति भागलपुर और पटना की है.भागलपुर के 265 गांव बाढ़ की चपेट में हैं.पटना टाउन के जल-जमाव वाले इलाकों में अब महामारी का खतरा उत्पन्न हो रहा है.भारी बारिश, बाढ़ व जल-जमाव की आपदा की चपेट में बिहार के 97 प्रखंडों के 786 गांवों की 17.09 लाख आबादी आई है. पटना, भागलपुर, भोजपुर, नवादा, नालंदा, खगडिय़ा, समस्तीपुर, लखीसराय, बेगूसराय, वैशाली, बक्सर, कटिहार, जहानाबाद, अरवल और दरभंगा मुख्य रूप से प्रभावित हुए हैं.पटना में महामारी की आशंका को देखते हुए फॉगिंग के साथ व्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया जा रहा है. फूड पैकेट्स में हैलोजन टैबलेट्स भी दिये जा रहे हैं. दो मेडिकल मोबाइल यूनिट भी लगाये गये हैं.
पटना में अभी भी फंसे हैं लाखों लोग
बारिश रुके हुए 36 घंटे से अधिक हो गए मगर राजेंद्रनगर, बहादुरपुर, सैदपुर और कंकड़बाग के हजारों लोग अब भी चार से पांच फीट पानी के बीच फंसे हैं. दिनभर में महज एक से डेढ़ फीट पानी ही निकल सका. जिला प्रशासन ने मंगलवार को 12 हजार से अधिक लोगों के रेस्क्यू करने का दावा किया. सेना के हेलीकॉप्टर से करीब 6200 फूड पैकेट जलप्लावित इलाकों में गिराये गये. पाटलिपुत्र कॉलोनी और राजीवनगर में भी चार से पांच फीट पानी जमा है.
19 राहत शिविर खोले गए, 1130 नावों से राहत की कोशिश
आपदा में फंसे लोगों की मदद के लिए 19 राहत शिविर, 226 सामुदायिक रसोई, 1130 नावों को काम पर लगाया गया है. मौसम विभाग के आंकड़ों के बताते हैं कि 27 से 29 सितंबर के बीच राज्य में औसतन कुल 207.6 मिमी बारिश बारिश हुई है. अकेले पटना जिले में इस अवधि में 255 मिमी और पटना शहर में 342.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई. तीन पंप सेट बिलासपुर से लाए गये हैं जो मंगलवार के से ही जलजमाव वाले क्षेत्र से पानी निकालने का काम शुरू कर दिया है.
सवालों के घेरे में नीतीश गर्वमेंट
पटना और अन्य इलाकों में बारिश के बाद बद इंतजामी को लेकर नीतीश कुमार की सरकार सवालों के घेरे में है. शहर के पॉश माने जाने वाले इलाकों में कई फीट पानी इकट्ठा है. गली-मुहल्लों में नाव चल रही है. बीजेपी ने भी बाढ़ से निपटने को लेकर नीतीश सरकार पर निशाना साधा है. सेंट्रल मिनिस्टर गिरिराज सिंह के बाद अब बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने पटना में बाढ़ और जलभराव को लेकर नीतीश सरकार पर प्रशासनिक अनदेखी का आरोप लगाया है.
गिरिराज का बिहार गर्वमेंट पर निशाना
सेंट्रल मिनिस्टर गिरिराज सिंह ने मंगलवार को बेगुसराय में बिहार गर्वमेंट को निशाने पर लेते हुए कहा था कि प्रभाविक इलाकों में राहत व्यवस्था कागजों में सिमटी हुई है. प्रशासन के लिए बाढ़ उत्सव के समान है. विभागीय प्रावधान की आड़ में मानवीय संवेदना के साथ मजाक किया जा रहा है.पटना में जलप्रलय प्राकृतिक आपदा नहीं सरकार की चूक है और यह व्यवस्था की अव्यवस्था है. गिरिराज ने कहा कि तीन अगस्त को बाढ़ पूर्व तैयारी को लेकर जिला प्रशासन ने पुख्ता व्यवस्था का दावा किया था.लेकिन, बाढ़ आने पर सारी तैयारियों की पोल खुल गई.
प्रशासनिक लापरवाही: संजय जयसवाल
बीजेपी अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि प्राकृतिक आपदा पर किसी का बस नहीं होता है पर 24 घंटे बारिश रुक जाने के बाद भी पानी का नहीं निकलना यह बताता है कि प्रशासनिक लापरवाही जरूर हुई है. इस पूरे प्रकरण में जो प्रशासनिक अधिकारी दोषी हैं,उन पर कार्रवाई अवश्य होनी चाहिए.सभी राहत कार्य में लगे जनता ,कार्यकर्ताओं और संघ के स्वयंसेवकों को धन्यवाद जो इस विषम परिस्थिति में मदद पहुंचा रहे हैं . माननीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय जी को और केंद्र सरकार को भी धन्यवाद कि उन्होंने 20 एनडीआरएफ की टीम बिहार में भेजी है. बिहार सरकार ने भी केंद्र सरकार के साथ मिलकर कोल इंडिया और विभिन्न स्तर से अलग से मोटर का प्रबंध किया.पर इस पूरे प्रकरण प्रकरण में जो प्रशासनिक अधिकारी दोषी हैं उन पर कार्यवाही अवश्य होनी चाहिए.
सांसद, विधायकों की स्थिति जनप्रतिनिधि के नाते बहुत अच्छी तरह समझ सकता हूं. सांसद और तीनों विधायक लगातार मेहनत कर रहे हैं पर नालों की उगाही और संप मोटर का काम नहीं करने मे उनकी कोई भूमिका होती नहीं है .कल नित्यानंद राय जी से मिलकर लौटा और आज माननीय मंत्री सुरेश शर्मा जी के साथ पार्टी कार्यालय में पटना के हालात पर विस्तृत चर्चा किया . 5:00 बजे शाम को विधायकों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ भी अफसरों की बैठक हुई.
संजय जायसवाल ने अपने फेसबुक पर लिखा है कि वर्ष 2017 की बाढ़ में 24 घंटे में हमने जिला पदाधिकारी के साथ मिलकर चंपारण के सभी गांवों में खाने की व्यवस्था शुरू करा दी थी. लेकिन पटना में राहत सामग्री आज जाकर ठीक हुई है. अभी आपदा में पहला कार्य इन सब चीजों से निजात का ही होना चाहिए पर 10 दिनों बाद इसकी समीक्षा होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई भी बिहार सरकार को करना चाहिए, जिसके लिए मैं भी उच्च स्तर पर बात करूंगा.'
कई दिनों से घर में कैद महिला को किया गया रेस्क्यू, फूट-फूटकर रोने लगी
पटना के कंकड़बाग इलाके में एक महिला को रेस्क्यू कर बाहर निकाला गया तो उनके आंसू निकल आये.महिला परेशानी के बारे में पूछे जाने पर दिक्कतों को याद करके फूट-फूटकर रोने लगी.