गुमशुदा बच्ची केस में हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन: 5 IPS और 5 पुलिस अफसर जांच के घेरे में, SC से भी नहीं मिली राहत
झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला जिले की गुमशुदा बच्ची मामले में पुलिस की लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। 5 IPS अधिकारियों और कई जांच अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
HighLights
- 2018 से 2022 के बीच तैनात 5 IPS अधिकारियों की भूमिका की होगी जांच
- 5 सब-इंस्पेक्टर और अन्य जांच अधिकारियों को भी जांच के दायरे में लाया गया
- राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
- कोर्ट ने गृह विभाग के प्रधान सचिव और डीजीपी से रिपोर्ट मांगी
- 2020 से लापता बच्ची का अब तक नहीं लगा कोई सुराग
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड के गुमला जिले से एक बच्ची के रहस्यमय ढंग से लापता होने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने मामले की जांच में बरती गई कथित लापरवाही को देखते हुए वर्ष 2018 से 2022 के बीच गुमला में पदस्थापित रहे पांच आईपीएस अधिकारियों और कई जांच अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच कराने का निर्देश दिया है।
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इस मामले में राज्य सरकार को उस समय बड़ा झटका लगा जब सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। इसके बाद राज्य सरकार को अपनी याचिका वापस लेनी पड़ी।
सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 12 मई को गृह विभाग के प्रधान सचिव और राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया था कि मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश में कोई बदलाव करने से इनकार कर दिया। इसके बाद सरकार ने अपनी याचिका वापस ले ली।
क्या है पूरा मामला?
गुमला जिले की रहने वाली चंद्रमुनि उरांव ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपनी गुमशुदा बच्ची की तलाश कराने की मांग की है। याचिका के अनुसार वर्ष 2020 में उनकी बच्ची अचानक लापता हो गई थी।मामले में गुमला के एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना में कांड संख्या 03/2020 दर्ज किया गया था। लेकिन कई वर्षों के बाद भी बच्ची का कोई पता नहीं चल सका। इसी को लेकर हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच प्रक्रिया और कार्रवाई पर गंभीर नाराजगी जताई है।
इन IPS अधिकारियों की होगी जांच
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जिन आईपीएस अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी, उनमें शामिल हैं:
अंशुमन कुमार (IPS)
अश्विनी कुमार सिन्हा (IPS)
अंजनी कुमार झा (IPS)
एच.पी. जनार्दनन (IPS)
डॉ. एहतशाम वकारिब (IPS)
ये सभी अधिकारी वर्ष 2018 से 2023 के बीच अलग-अलग समय में गुमला जिले में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर कार्यरत रहे हैं।
जांच अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार
अदालत ने केवल वरिष्ठ अधिकारियों तक ही जांच सीमित नहीं रखी है, बल्कि केस की जांच से जुड़े पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। जिन अधिकारियों को जांच के दायरे में लाया गया है, उनमें शामिल हैं:
एएसआई राजेश कुमार तिवारी
सब-इंस्पेक्टर प्रेम सागर सिंह
रवि होनहागा
आकाश कुमार पांडेय
महेंद्र महतो
वर्तमान जांच अधिकारी राहुल कुमार दसौंधी
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि किसी गुमशुदा बच्चे के मामले में पुलिस की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अदालत का मानना है कि यदि शुरुआती स्तर पर गंभीरता से जांच की जाती, तो संभवतः मामले में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती थी।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद गृह विभाग और डीजीपी कार्यालय को संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए विस्तृत जांच करनी होगी। जांच रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।यह मामला अब केवल एक गुमशुदगी का नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस जवाबदेही और कानून व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। अदालत की निगरानी में चल रही इस सुनवाई पर पूरे राज्य की नजर बनी हुई है।






