रांची: एक्स डीजीपी दिनेश कुमार पांडेय की वाइफ पूनम पांडेय द्वारा 38.91 लाख रुपये में कांके अंचल के चामा मौजा के खाता संख्या-87 में खरीदी गयी 51.09 डिसमिल जमीन गैर मजरुआ (जीएम) जमीन है. इस जमीन की खरीद-बिक्री नहीं हो सकती. जिला प्रशासन द्वारा जांच में यह खुलासा हुआ है. एक्स डीजीपी की वाइफ के नाम खरीदी गयी 51.09 डिसमिल जमीन की जमाबंदी रद्द की जायेगी. रांची के डीसी राय महिमापत रे ने कहा कि इस सिलसिले में जांच कमिटी की रिपोर्ट आ गई है. जिला प्रशासन अब जमीन पर बने मकान के मालिकों को पहले नोटिस भेजेगा. फिर जमाबंदी रद्द करने के बाद रजिस्ट्री रद्द करने की प्रक्रिया शुरू होगी. बाद में जमीन पर हुए निर्माण को अतिक्रमण मानकर हटाया जा सकता है.
उल्लेखनीय है कि डीके पांडेय डीजीपी पोस्ट से 31 मई को रिटायर्ड हो चुके हैं. एक्स डीजीपी की वाइफ द्वारा जीएम लैंड की जमीन खरीद गल तरीके से म्यूटेशन कराने का मामला प्रकाश में आने के बाद रांची के डीसी राय महिमापत रे जांच के लिए एक कमेटी बनाकर मामले की जांच करायी. कमेटी में एलआरडीसी मनोज कुमार रंजन और कांके के सीओ अनिल कुमार को शामिल किया गया था. कमेटी ने डीसी को मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. कमेटी की रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि जिस जमीन को एक्स डीजीपी की वाइफ ने खरीदी है और उस पर आलीशान बिल्डिंग बनवाया है, वह जमीन गैर मजरूआ है. इस जमीन की खरीद-बिक्री नहीं हो सकती है.
जांच में इस बात की भी पुष्टि हुई है कि गलत तरीके से गैर मजरुआ जमीन की रजिस्ट्री की गयी है. जांच कमेटी ने डीसी को सौंपी गयी रिपोर्ट में जमीन की जमाबंदी रद्द करने की अनुशंसा की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे में जमीन पर जो बिल्डिंग बनायी गयी है उसे अतिक्रमण माना जायेगा. सरकारी कागजात में यह जमीन गैरमजरुवा नेचर की है. आरोप है कि गैरमजरुवा जमीन की रजिस्ट्री और म्यूटेशन करा कर रैयती प्लॉट में तब्दील कर दिया गया. जमीन की रजिस्ट्री और म्यूटेशन तब हुई है, जब झारखंड के डीजीपी थे. रजिस्ट्री और म्यूटेशन फाइननेंसियल इयर 2018-19 के हुआ है. जिला रांची, अंचल का नाम कांके, हल्का-03 और मौजा चामा, खाता संख्या 87 और प्लॉट संख्या 1232, कुल जमीन 50.90 डिममिल, इस भूखंड की खरीद पूनम पांडेय यानी झारखंड के एक्स डीजीपी डीके पांडेय की वाइफ पूनम पांडेय के नाम पर रजिस्ट्री की गयी है.
बताया जाता है कि एक साल से कांके स्थित चामा में जीएम लैंड पर पुलिस हाउसिंग कॉलोनी बनाका बोर्ड लगाकर निर्माण कार्य किया जा रहा है. कॉलोनी को बाउंडरी से घेरा गया है. खाता नंबर 87, प्लॉट नंबर 1232 जो एक जीएम लैंड पर एक्स डीजीपी डीके पांडेय का आलीशान बंगला बन कर लगभग तैयार है.डीजीपी के कारण कथित पुलिस हाउसिंग कॉलोनी के लिए एक पुलिस पिकेट भी वहीं खोल दिया जाता है. कहा जाता है कि पिकेट लॉ कॉलेज के लिए है, लॉ कॉलेज रिंग रोड के दूसरी तरफ है.
दर्जन भर आइपीएस व कई पुलिस अफसर समेत दो दर्जन लोगों ने फर्जी तरीके से रजिस्ट्री व म्यूटेशन कराया
कांके अंचल के चामा मौजा के खाता संख्या-87 में एक्स डीजीपी की वाइफ समेत दर्जन भर आइपीएस, जूनियर पुलिस अफसर व कारोबारियों ने खाता नंबर 87 से जमीन खरीदी है. यहां जमीन खरीदने वाले आइपीएस डीके पांडेय के करीबी रहे हैं. श्री पांडेय के कार्यकाल में इन अफसरों की चलती रही है. जीएम लैंड की जमीन को फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन और म्यूटेशन करा कर उस जमीन को रैयती बना चुके हैं. यह खाता ही जीएम लैंड है. जो जमीन न तो खरीदी जा सकती है और न ही बेची जा सकती है.
जिन्होंने जीएम लैंड की जमीन खरीदी
अमोद कुमार, पिता राम नारायण शर्मा
पूनम पांडेय, पति डीके पांडेय
सुलभा सिंह, पति शशि शेखर
मंजुला प्रभा, पति धीरेंद्र कुमार सिंह
शोभा सिंह, पति किशोर चंद्रा
शिव शंकर प्रसाद शर्मा, पिता कमलेश्वर प्रसाद शर्मा
अंजना नारायण, पति कुमार सुधाकर नारायण
माधवी सिंह, शिव शंकर सिंह
ब्रिजेंद्र कुमार सिंह, चंद्रेश्वर सिंह
तलकेश्वर राम, जगलाल राम
उमरावती देवी, पति बर्मा दयाल
उमरावती देवी, पिता बर्मा दयाल
गायत्री देवी, त्रिपुरारी सिंह
रक्षिका सिंह, ब्रजेश कुमार सिंह
आशा देवी, अनिल कुमार सिंह
भावना मिश्रा, संजय कुमार मिश्रा
अनुपमा देवी, पिता श्याम दास सिंह
कांके पुल पार करने और रिंग रोड क्रॉस करने पर पुलिस पिकेट बना है. यहीं से कथित पुलिस हाउसिंग कॉलोनी जाने का रास्ता है. यह कॉलोनी चामा में बहने वाली जुमार नदी के किनारे बनायी जा रही है. खाता नंबर 87 के प्लॉट नंबर 1232 पर डीके पांडेय का बना बंगला वाला जमीन जीएम लैंड है. इस हाउसिंग कॉलोनी का ज्यादातर हिस्सा खाता नंबर 87 और 88 है. दोनों ही खाता जीएम लैंड है.
प्राइवेट सोसायटी में लगाये गये पुलिस के बोर्ड

बताया जाता है कि प्लानिंग कर जीएम लैंड की जमीन पर कब्जा की गयी. वर्ष 2018 की 20 जनवरी को पहले जमीन का रजिस्ट्री कराया गया. रजिस्ट्री में कही गयी है कि यह जमीन किसी अमोद कुमार से ली गयी है और वो बढ़ई जाति से आते हैं. यह फरजी है. पुलिस हाउसिंग कॉलोनी जिस मौजा में बन रहा है, वो चामा मौजा है. चामा गांव में कोई बढ़ई जाति का परिवार नहीं रहता है. जीएम लैंड रजिस्ट्री कराने के बाद अपने प्रभाव व पहुंच पर तत्कालीन डीजीपी डीके पांडेय को सीओ कार्यालय ने जमीन का म्यूटेशन कर दिया. म्यूटेशन होने के बाद वहां पर पुलिस सिक्युरिटी के इंतजाम कर दिये गये. सरकारी राशि से टीओपी बना दी गयी. हाइवे पर ट्रैफिक पोस्ट भी बन गया. जमीन पर पुलिस की मौजूदगी में बाउंड्री वाल व बिल्डिंग का निर्माण चलता रहा.कॉलोनी व रास्ते पर पुलिस का बोर्ड लगा दिया गया.

पुलिस हाउसिंग सोसाइटी बनाने के लिए पुलिस के नाम और पहचान की साइन बोर्ड का भी प्रयोग किया गया. कांके पिठोरिया हाइवे पर. रिंग रोड का ओवरब्रिज को पार करते ही जीएस कंस्ट्रक्शन के कई बोर्ड पुलिस प्रतीक वाला लाल और ब्लू रंग का बोर्ड लगाया गया था. जिस तरह थाना या पुलिस के किसी दूसरे ऑफिस में बोर्ड लगे होते हैं. लोकल लोगों का आरोप है कि जमीन कारोबारियों के द्वारा पुलिस के नाम का इस्तेमाल लोगों को डराने व जुबान बंद कराने के लिए की गयी.
जीएम लैंड को लेकर सरकार का है आदेश
राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग की तरफ से सचिव कमल किशोर सोन ने 26 अगस्त 2015 को सभी जिलों के डीसी को एक आदेश जारी किया था. आदेश में कहा गया था कि केशर हिंद भूमि, गैरमजरुवा आम भूमि, गैरमजरुवा खास भूमि, वन भूमि, जंगल आदि विभिन्न विभागों के लिए अर्जित, हस्तांतरित और अन्य श्रेणी की सरकारी भूमि का हस्तांतरण विलेख के निबंधन को निबंधन अधिनियम 1908 की धारा 22 ‘क’ के अधीन लोकनीति के विरुद्ध घोषित किया जाता है. इस आदेश के जारी होने के करीब एक साल के बाद 15 जून 2016 को भी एक पत्र लिखा गया था. जिसमें ऊपर के आदेश को लागू करने की बात कही गयी थी.