उत्तर प्रदेश: CM योगी आदित्यनाथ से मिले शिवपाल यादव, BJP संग मिलकर अखिलेश को देंगे बड़ा झटका

शिवपाल सिंह यादव का बुधवार को सीएम योगी आदित्यनाथ से अचानक मिलना उत्तर प्रदेश की पॉलिटिक्स में बड़े उलटफेर के संकेत दे रहा है। कहा जा रहा है कि शिवपाल बहू अपर्णा की तर्ज पर बीजेपी में जा सकते हैं। 

उत्तर प्रदेश: CM योगी आदित्यनाथ से मिले शिवपाल यादव, BJP संग मिलकर अखिलेश को देंगे बड़ा झटका
  • दिल्ली प्रवास के दौरान बीजेपी के शीर्ष नेताओं से की मुलाकात 
  • राज्यसभा भी भेज सकती है बीजेपी
  • भतीजे की उपेक्षा से नाराज चल रहे हैं चाचा
  • यूपी की राजनीति में बड़े उलटफेर के संकते

लखनऊ। शिवपाल सिंह यादव का बुधवार को सीएम योगी आदित्यनाथ से अचानक मिलना उत्तर प्रदेश की पॉलिटिक्स में बड़े उलटफेर के संकेत दे रहा है। कहा जा रहा है कि शिवपाल बहू अपर्णा की तर्ज पर बीजेपी में जा सकते हैं। 

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समाजवादी पार्टी (सपा) के चुनाव चिन्ह साइकिल पर चुनाव लड़ कर विधानसभा पहुंचे प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव का बीजेपी में शामिल होने को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। कहा जा रहा है कि शिवपाल जल्द ही सत्तारूढ़ दल का दामन थाम सकते हैं। शिवपाल की राज्यसभा के रास्ते बीजेपी में इंट्री पर अटकलें 26 मार्च के बाद से लगातार चल रही है, जिसका खंडन शिवपाल और उनके समर्थकों की ओर से अब तक नहीं किया गया है। 

बीजेपी के शीर्ष नेताओं से भी हो चुकी है शिवपाल की मुलाकात

सोर्सेज के अनुसार पिछले दिनों दिल्ली गये शिवपाल की बीजेपी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात भी हो चुकी है। जल्द ही और नेताओं से भी मुलाकात के उनके कार्यक्रम हैं। चर्चा यह भी है कि बीजेपी उन्हें राज्यसभा भेज सकती है। अखलेश यादव की छोड़ी गयी सीट आजमगढ से भी बीजेपी शिवपाल को उतार सकती है। अपने भतीजे एवं सपा प्रमुख अखिलेश यादव से नाराज दिखाई दे रहे शिवपाल 26 मार्च से इटावा दिल्ली घूम रहे है लेकिन साफ साफ कोई भी बात कहने को तैयार नही है जबकि हर कोई शिवपाल से उनके रुख को लेकर के उनका मत जानना और समझना चाहता है। हालांकि इटावा में शिवपाल ने अपने समर्थकों से मौजूदा हालात को देखते हुये अपने बारे में विचार जाने है कि उन्हें क्या करना चाहिए। समर्थकों ने शिवपाल से साफ साफ कह दिया है कि उनका हर निर्णय में समर्थक साथ होंगे।

बीजेपी के साथ मिलकर भतीजे अखिलेश यादव को झटका दे सकते हैं चाचा शिवपाल
 प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के मुखिया शिवपाल यादव बीजेपी के साथ मिलकर भतीजे अखिलेश यादव को झटका दे सकते हैं। शिवपाल सपा अध्यक्ष अखिलेश की उपेक्षा से नाराज चल रहे हैं। इस कारण वह मंगलवार को अखिलेश द्वारा बुलाई गई सहयोगी दलों की बैठक में भी शामिल नहीं हुए। शिवपाल ने बुधवार को विधायक के रूप में शपथ ग्रहण की। मीडिया से बातचीत में कहा कि समय आने पर बताऊंगा।शिवपाल सिंह यादव का सीएम योगी आदित्यनाथ से अचानक मिलना अपने आप में प्रदेश की राजनीति में बड़े उलटफेर के संकेत दे रहा है। 
भाई के बराबर भतीजे से नहीं मिला सम्मान

बड़े भाई मुलायम सिंह यादव के हाथ से सपा की बागडोर जाने के बाद शिवपाल का राजनीतिक घर ही पराया हो गया। राजनीतिक मजबूरियों के चलते विधानसभा चुनाव में अखिलेश के साथ आए लेकिन पहले वाला सम्मान न मिलने की कसक उनके दिल में हर मौके पर दिखी। मुलायम के सपा मुखिया रहते शिवपाल सपा में हमेशा नंबर दो की हैसियत में रहे। उनका सम्मान होता रहा। उनकी सिफारिश पर टिकट ही नहीं मंत्री बनाए जाते रहे। मगर, सपा की कमान अखिलेश के हाथ में आने के बाद सम्मान न मिलने की वजह से यह दूरियां बढ़ती गईं। माना जा रहा है कि शिवपाल अब उम्र के इस पढ़ाव पर चाहते हैं कि उनके पास भी एक सुरक्षित घर हो। बेटे का राजनीतिक भविष्य भी संरक्षित हो सके। शिवपाल की बीजेपी से नजदीकियों के पीछे भी यही अहम वजह मानी जा रही है।

एसपी विधायक दल की बैठक में नहीं बुलाया

शिवपाल ने अपनी पार्टी के कई नेताओं के नामों की सूची अखिलेश को टिकट देने के लिए सौंपी थी, किंतु इनमें से एक भी नेता को टिकट नहीं दिया गया।वह भी सपा के सिंबल साइकिल पर चुनाव लड़े। परिवार में एकता के नाम पर शिवपाल सब कुछ सहते रहे, जबकि सपा में उनकी उपेक्षा होती रही।शिवपाल यादव को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब सपा ने उन्हें अपना विधायक मानने से इनकार करते हुए 25 मार्च को विधायक दल की बैठक में नहीं बुलाया। बैठक में न बुलाए जाने पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा था कि वह सपा के सक्रिय सदस्य व विधायक हैं। उन्हें क्यों नहीं बुलाया गया इसका उत्तर सपा का राष्ट्रीय नेतृत्व ही दे सकता है।
उन्होंने अगले कदम के बारे में कहा था कि अभी बहुत समय है जल्द ही आपको बताऊंगा। इसके बाद शिवपाल नाराज होकर इटावा चले गए थे। वहां पर उन्होंने सपा छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले सिरसागंज के एक्स एमएलए हरिओम यादव से भी मुलाकात की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि बीजेपी कैंडिडेट हरिओम को चुनाव जीतना चाहिए था।इसके बाद इटावा से ही शिवपाल दिल्ली चले गए थे। उन्होंने वहां सपा मुखिया शिवपाल यादव से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार शिवपाल ने अपने दिल्ली प्रवास के दौरान भाजपा के शीर्ष नेताओं से भी मुलाकात की है। 

शिवपाल की पहले भी बनी है बीजेपी से नजदीकियां

शिवपाल बड़े भाई मुलायम की हमेशा इज्जत करते रहे हैं। मुलायम के सम्मान के लिए वह अखिलेश से नाराजगी का भरा कड़ुवा प्याला भी विधानसभा चुनाव में पी गये। सपा से अलग होने के बाद उन्होंने भले ही अलग पार्टी बनाई पर बीजेपी से उनकी नजदीकियां बनी रही। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भी शिवपाल के बीजेपी में शामिल होने की चर्चाएं तेज हुई थीं। उनके बीजेपी में जाने की पूरी बिसात बिछ चुकी थीं लेकिन बाद में शिवपाल खुद ही ऐन मौके पर पीछे हट गये।  सीएम योगी आदित्यनाथ मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर जब उनसे मिलने उनके घर तो शिवपाल भी साथ गये थे। विधानसभा चुनाव में भी योगी की कानून व्यवस्था की तारीफ कर बीजेपी के प्रति साफ्ट कार्नर होने का संकेत दे दिया था।