झारखंड में हिरासत में मौतों का हिसाब-किताब: पुलिस मुख्यालय ने 8 साल का रिकॉर्ड तलब किया

झारखंड पुलिस मुख्यालय ने वर्ष 2018 से 2026 के बीच पुलिस हिरासत में हुई मौतों का पूरा ब्यौरा सभी जिलों के एसपी से 29 मई तक मांगा है। 29 और 30 मई को होने वाली समीक्षा बैठक में जवाबदेही तय करने और भविष्य की रणनीति पर चर्चा होगी।

झारखंड में हिरासत में मौतों का हिसाब-किताब: पुलिस मुख्यालय ने 8 साल का रिकॉर्ड तलब किया
हिरासत में मौतों पर मुख्यालय ने मांगा पूरा ब्यौरा।
  • कस्टडी डेथ पर बड़ा एक्शन: सभी जिलों के SP से 29 मई तक मांगी गई रिपोर्ट
  • 2018 से 2026 तक हिरासत में हुई मौतों की होगी समीक्षा, पुलिस मुख्यालय अलर्ट मोड में
  • थानों के रिकॉर्ड खंगालने में जुटी पुलिस, हिरासत में मौतों पर दो दिन चलेगी हाईलेवल समीक्षा बैठक

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड पुलिस मुख्यालय ने राज्यभर में पिछले आठ वर्षों के दौरान पुलिस हिरासत में हुई मौतों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को निर्देश जारी करते हुए वर्ष 2018 से 2026 के बीच हुई हिरासत मौतों का विस्तृत ब्यौरा 29 मई तक उपलब्ध कराने को कहा है। इस निर्देश के बाद राज्य के सभी जिलों में थाना स्तर पर पुराने रिकॉर्ड खंगालने का काम तेज हो गया है।

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मुख्यालय की ओर से मांगी गई रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है। जिलों से पूछा गया है कि किस जिले में कब हिरासत में मौत हुई, मृतक की पहचान क्या थी, घटना किस थाना क्षेत्र में हुई, घटना के बाद क्या कार्रवाई की गई और वर्तमान में जांच की स्थिति क्या है। इसके अलावा यह भी जानकारी मांगी गई है कि संबंधित मामलों की जांच किस स्तर पर कराई गई और अब तक क्या निष्कर्ष सामने आए हैं।

सूत्रों के मुताबिक पुलिस मुख्यालय इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रहा है। यही वजह है कि जिलों को समयसीमा के भीतर रिपोर्ट भेजने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। कई जिलों में एसपी कार्यालयों ने थाना प्रभारियों को 28 मई तक सभी मामलों का पूरा डाटा उपलब्ध कराने का आदेश दिया है, ताकि उसे संकलित कर मुख्यालय भेजा जा सके।

जानकारी के अनुसार, 29 और 30 मई को पुलिस मुख्यालय में दो चरणों में हाईलेवल समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में राज्यभर से आए आंकड़ों और रिपोर्टों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही हिरासत से जुड़े मामलों की मॉनिटरिंग, पुलिस जवाबदेही तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए नई रणनीति तैयार की जा सकती है।

बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। इनमें हिरासत में सुरक्षा मानकों को और सख्त करना, थानों में निगरानी व्यवस्था मजबूत करना तथा संवेदनशील मामलों में जवाबदेही तय करने जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं।

पुलिस मुख्यालय की इस पहल को राज्य में कानून-व्यवस्था और मानवाधिकार से जुड़े मामलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिलों से आने वाली रिपोर्टों में क्या तथ्य सामने आते हैं और समीक्षा बैठक के बाद सरकार एवं पुलिस प्रशासन क्या कदम उठाता है।