पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी को बड़ा झटका! TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सभी पदों से दिया इस्तीफा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देते हुए भ्रष्टाचार, आरजी कर मेडिकल कॉलेज केस और IPAC की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। हालांकि उन्होंने पार्टी छोड़ने से इनकार किया है।
कोलकाता (Threesocieties.com Desk): पश्चिम बंगाल की सियासत में बुधवार को बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिला। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। उनके इस कदम को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
बारासात से लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने महिला तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष समेत पार्टी में मिली तमाम जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया। हालांकि उन्होंने साफ किया कि वह सांसद बनी रहेंगी और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भी नहीं छोड़ रही हैं।
‘मानसिक द्वंद्व और नैतिक पीड़ा’ के बाद लिया फैसला
काकोली घोष ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने “गहरे मानसिक द्वंद्व और लंबे विचार-विमर्श” के बाद यह निर्णय लिया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष निशाना साधते हुए कहा कि महिला सांसदों के साथ अनुचित व्यवहार को रोकने में संगठन विफल रहा और उन्हें उच्च नेतृत्व से अपेक्षित सहयोग एवं सहानुभूति नहीं मिली। उन्होंने कहा कि अब ऐसी परिस्थिति में पदों पर बने रहने का कोई अर्थ नहीं रह गया था।
भ्रष्टाचार के आरोपों से आहत हुईं काकोली घोष
अपने इस्तीफे के पीछे की वजह बताते हुए सांसद ने पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ वर्षों में सामने आए कथित घोटालों और विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने राशन वितरण घोटाला, शिक्षक भर्ती भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर गंभीर चिंता जताई।काकोली घोष ने कहा कि इन घटनाओं ने आम लोगों के बीच सरकार और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया है तथा जनता के भीतर गहरा अविश्वास पैदा किया है।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज केस का भी किया जिक्र
टीएमसी सांसद ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर की अस्वाभाविक मौत और कथित सबूतों से छेड़छाड़ के मामले को भी बेहद गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया और उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी गहरी नैतिक पीड़ा पहुंचाई।
IPAC की भूमिका पर उठाए सवाल
काकोली घोष ने चुनावी रणनीतिकार संस्था IPAC की भूमिका को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि लोकतांत्रिक राजनीतिक संस्कृति की जगह अपारदर्शी और अलोकतांत्रिक प्रभाव संगठन पर हावी होने लगें, तो यह पार्टी की मूल विचारधारा और परंपराओं के लिए नुकसानदायक है।
‘पार्टी नहीं छोड़ रही हूं’
हालांकि इस्तीफे के बावजूद काकोली घोष ने स्पष्ट किया कि वह तृणमूल कांग्रेस नहीं छोड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि वह पार्टी की एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में जनता और बंगाल के हित में काम करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि उनका फैसला किसी व्यक्तिगत विवाद या नाराजगी का परिणाम नहीं, बल्कि लोकतंत्र और सार्वजनिक जीवन के प्रति नैतिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।
मुख्य सचेतक पद से हटाए जाने के बाद बढ़ी नाराजगी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि काकोली घोष की नाराजगी तब और बढ़ गई जब उन्हें टीएमसी संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से हटाकर वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई। इसके अलावा, हाल ही में काकोली घोष का पश्चिम बंगाल के विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल होना भी चर्चा का विषय बना था। इस बैठक में टीएमसी के कई विधायक भी मौजूद थे, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष की अटकलें तेज हो गई थीं। अब काकोली घोष के इस इस्तीफे ने बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों और टीएमसी के भीतर संभावित असंतोष को लेकर चर्चाओं को और तेज कर दिया है।






