सुप्रीम कोर्ट सख्त: क्लास बंक करने वाले लॉ स्टूडेंट्स नहीं दे पाएंगे परीक्षा, दिल्ली HC के आदेश पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें कम अटेंडेंस वाले लॉ छात्रों को परीक्षा देने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि न्यूनतम उपस्थिति जरूरी है और अनुशासनहीनता को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता।
- अब ‘लो अटेंडेंस’ पर नहीं मिलेगी राहत! सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों को दिया बड़ा झटका
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा- न्यूनतम हाजिरी जरूरी, तभी परीक्षा
- लॉ छात्रों के लिए अटेंडेंस नियम फिर लागू
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और सख्त संदेश दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें कहा गया था कि न्यूनतम उपस्थिति (Minimum Attendance) की कमी के आधार पर किसी भी छात्र को परीक्षा देने से नहीं रोका जा सकता।
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सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि क्लास बंक कर कैंपस में घूमने और अनुशासनहीनता को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत के इस फैसले से अब लॉ कॉलेजों और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज (NLUs) में अटेंडेंस नियमों को लेकर सख्ती बढ़ने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई सख्त नाराजगी
मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि कम अटेंडेंस की वजह से सभी नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज प्रभावित हो रही हैं। कोर्ट ने माना कि अगर न्यूनतम उपस्थिति की अनिवार्यता खत्म कर दी गई तो छात्र नियमित क्लास में आने से बचेंगे और इससे शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा। बेंच ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को छात्र “फ्री पास” की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे क्लास में अनुपस्थित रहने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।
हाई कोर्ट के आदेश पर लगी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने लॉ कॉलेजों और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा दायर याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के पैराग्राफ 249 के प्रभाव और अमल पर रोक लगा दी। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश भविष्य में लागू होगा। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
मुकुल रोहतगी ने उठाया अनुशासन का मुद्दा
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत में कहा कि हाई कोर्ट के फैसले से अनुशासनहीनता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने दलील दी कि अगर छात्र बिना क्लास अटेंड किए परीक्षा में बैठने लगेंगे तो शिक्षा की गुणवत्ता और प्रोफेशनल स्टैंडर्ड दोनों प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि लॉ की पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि नियमित क्लास, चर्चा और अकादमिक सहभागिता भी जरूरी हिस्सा है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा था?
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि किसी भी मान्यता प्राप्त लॉ कॉलेज, यूनिवर्सिटी या संस्थान में पढ़ रहे छात्र को सिर्फ न्यूनतम उपस्थिति की कमी के आधार पर परीक्षा देने से नहीं रोका जा सकता। हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि छात्रों को आगे की पढ़ाई और करियर में प्रगति से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
फैसले का क्या होगा असर?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद देशभर के लॉ कॉलेजों में उपस्थिति नियमों को लेकर सख्ती बढ़ सकती है। अब छात्रों को परीक्षा में बैठने के लिए निर्धारित न्यूनतम अटेंडेंस पूरी करनी होगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से अकादमिक अनुशासन मजबूत होगा और नियमित पढ़ाई को बढ़ावा मिलेगा। वहीं कई छात्र संगठनों का मानना है कि मेडिकल इमरजेंसी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और अन्य व्यावहारिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।






