धनबाद भाजपा में ‘सामाजिक संतुलन’ पर बवाल! ब्राह्मण-भूमिहारों को जगह नहीं, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

धनबाद भाजपा महानगर कमेटी में ब्राह्मण और भूमिहार समाज को प्रतिनिधित्व नहीं मिलने से विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर विरोध तेज, पार्टी नेतृत्व डैमेज कंट्रोल में जुटा।

धनबाद भाजपा में ‘सामाजिक संतुलन’ पर बवाल! ब्राह्मण-भूमिहारों को जगह नहीं, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
असंतुष्टों को साधने में जुटा, डैमेज कंट्रोल जारी।

धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद भाजपा महानगर कमेटी के गठन के बाद पार्टी के भीतर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। नई कमेटी में ब्राह्मण और भूमिहार समाज के एक भी पदाधिकारी को जगह नहीं मिलने से इन वर्गों में नाराजगी साफ नजर आ रही है। इंटरनेट मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर जोरदार बहस छिड़ गई है, जिससे संगठन की अंदरूनी खींचतान भी खुलकर सामने आने लगी है।

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 कोर वोटर की अनदेखी से बढ़ा असंतोष

धनबाद में ब्राह्मण और भूमिहार समाज की मजबूत उपस्थिति रही है और इन्हें भाजपा का पारंपरिक (कोर) वोटर माना जाता है। आमतौर पर यह वर्ग पार्टी लाइन पर मतदान करता रहा है, लेकिन संगठनात्मक स्तर पर प्रतिनिधित्व नहीं मिलने से असंतोष बढ़ गया है। नई महानगर कमेटी में इन दोनों प्रभावशाली वर्गों को पूरी तरह नजरअंदाज किए जाने की चर्चा तेज है, जिससे राजनीतिक समीकरणों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

कमेटी की घोषणा के बाद फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कार्यकर्ताओं ने खुलकर विरोध जताया है। स्थानीय कार्यकर्ता सत्येंद्र प्रकाश पांडेय लगातार पोस्ट के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और उन्होंने धनबाद विधायक राज सिन्हा पर भी निशाना साधा है। सोशल मीडिया पर चल रही बहस अब पार्टी के अंदर गुटबाजी की ओर इशारा कर रही है, जिससे भाजपा की अनुशासित छवि पर सवाल उठने लगे हैं।

गुटबाजी और पैरवी के आरोप

पार्टी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि नई कमेटी में चयन रायशुमारी के बजाय पैरवी के आधार पर किया गया है। कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठन में संतुलन और अनुभव की अनदेखी की गई है, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हो सकता है।

श्रवण राय की सफाई, नेतृत्व डैमेज कंट्रोल में

महानगर अध्यक्ष श्रवण राय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कमेटी में सभी वर्गों को संतुलित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। हालांकि, बढ़ते विरोध को देखते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता अब डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं, ताकि आने वाले चुनावों पर इसका असर न पड़े।

चुनावी समीकरण पर पड़ सकता है असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नाराजगी जल्द दूर नहीं की गई तो इसका असर आगामी चुनावों में देखने को मिल सकता है।
भाजपा के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि कोर वोटर में असंतोष किसी भी पार्टी के लिए बड़ा जोखिम होता है।