झारखंड में पुलिस वेतन घोटाले का जाल! 3 जिलों से बढ़कर अब 33 कोषागार तक जांच, सिंडिकेट की आशंका

झारखंड में पुलिसकर्मियों के वेतन से अवैध निकासी का मामला अब पलामू तक पहुंच गया है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सभी 33 कोषागारों की जांच के आदेश दिए हैं, जिससे बड़े घोटाले और सिंडिकेट की आशंका गहराई है।

झारखंड में पुलिस वेतन घोटाले का जाल! 3 जिलों से बढ़कर अब 33 कोषागार तक जांच, सिंडिकेट की आशंका
वित्त मंत्री ने सभी जिलों में जांच का आदेश दिया।

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में पुलिस विभाग से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आ रहा है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिला कर रख दिया है। बोकारो और हजारीबाग के बाद अब पलामू में भी पुलिसकर्मियों के वेतन से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी का मामला उजागर हुआ है।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सख्त कदम उठाते हुए राज्य के सभी 33 कोषागारों की व्यापक जांच के आदेश दे दिए हैं।

अब पूरे राज्य में होगी जांच

वित्त मंत्री ने वित्त सचिव को निर्देश दिया है कि इस घोटाले की जांच केवल तीन जिलों तक सीमित न रखी जाए, बल्कि पूरे राज्य में इसकी तह तक जाया जाए। साथ ही गृह सचिव और डीजीपी को भी निर्देशित किया गया है कि वे अपने स्तर पर यह जांच करें कि जिलों में तैनात अकाउंटेंट कितने वर्षों से एक ही जगह पर कार्यरत हैं।

पलामू में खुला नया मामला

पलामू में सामने आए इस ताजा मामले ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। वित्त मंत्री ने उपायुक्त (डीसी) से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। उनका कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि घोटाले का असली स्वरूप क्या है और इसमें कौन-कौन शामिल हैं।

बोकारो से शुरू हुआ, हजारीबाग होते हुए पलामू तक पहुंचा मामला

इस पूरे घोटाले का खुलासा सबसे पहले महालेखाकार (AG) की रिपोर्ट के आधार पर बोकारो में हुआ था। इसके बाद वित्त विभाग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की, जिसमें हजारीबाग में भी इसी तरह की अवैध निकासी सामने आई। अब पलामू में भी समान पैटर्न मिलने से यह आशंका और मजबूत हो गई है कि मामला व्यापक स्तर पर फैला हुआ है।

सिंडिकेट की भूमिका पर गहराया शक

वित्त मंत्री ने अपने पत्र में साफ कहा है कि तीनों जिलों में एक ही विभाग—पुलिस—से जुड़े मामले सामने आना इस ओर इशारा करता है कि इसके पीछे कोई सुनियोजित आपराधिक सिंडिकेट काम कर रहा हो सकता है। उन्होंने जांच में दो प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान देने को कहा है कि  निकासी प्रणाली की खामियों का फायदा उठाकर गड़बड़ी की गयी। अवैध निकासी के जरिए आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देना है।
डीडीओ की भूमिका पर उठे सवाल

मामले में निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (DDO) की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। वित्त मंत्री ने कहा कि अब तक किसी भी डीडीओ की जवाबदेही तय नहीं की गई है, जो चिंताजनक है। डीडीओ को ही यह पूरी जानकारी होती है कि कितने कर्मचारियों को कितना वेतन दिया जाना है, किस खाते में भुगतान होना है और कुल आवंटन कितना है। ऐसे में उनकी भूमिका की अनदेखी नहीं की जा सकती।

बड़ा घोटाला या सिस्टम की खामी?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ सिस्टम की तकनीकी खामी है या फिर एक संगठित भ्रष्टाचार का नेटवर्क, जो लंबे समय से सरकारी धन की लूट कर रहा है। राज्य सरकार के इस बड़े फैसले के बाद आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मचना तय है।