धनबाद जिला परिषद में फिर घमासान! अध्यक्ष शारदा सिंह का सीईओ पर सीधा वार, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

धनबाद जिला परिषद में एक बार फिर विवाद गहराया। अध्यक्ष शारदा सिंह ने सीईओ सन्नी राज पर अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।

धनबाद जिला परिषद में फिर घमासान! अध्यक्ष शारदा सिंह का सीईओ पर सीधा वार, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
जिप अध्यक्ष- डीडीसी धनबाद(फाइल फोटो)।

धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद जिला परिषद में एक बार फिर विवाद ने तूल पकड़ लिया है। अध्यक्ष शारदा सिंह और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सह उपविकास आयुक्त सन्नी राज के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। अध्यक्ष ने सीईओ पर उनके अधिकारों के हनन का गंभीर आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

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यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पहले से ही जिला परिषद के भीतर पारदर्शिता और कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

अधिकारों के हनन का आरोप, लिखा आधिकारिक पत्र

अध्यक्ष शारदा सिंह ने सीईओ सन्नी राज को लिखे पत्र में स्पष्ट कहा है कि उनके संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए बताया कि जिला परिषद अध्यक्ष को प्रशासनिक, वित्तीय और निगरानी से जुड़े व्यापक अधिकार प्राप्त हैं।

उन्होंने कहा कि बैठक बुलाने और एजेंडा तय करने का अधिकार अध्यक्ष का है। परिषद के कार्यों की निगरानी और नियंत्रण की जिम्मेदारी भी अध्यक्ष की होती है। वित्तीय स्वीकृति और व्यय में अध्यक्ष की भूमिका अनिवार्य है। अध्यक्ष ने मांग की है कि उनके अधिकारों का पूर्ण सम्मान सुनिश्चित किया जाए और किसी भी प्रकार का अतिक्रमण रोका जाए।

 कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

शारदा सिंह ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि उनके अधिकारों की अवहेलना जारी रहती है या पद की गरिमा को ठेस पहुंचती है, तो इसे विधि विरुद्ध माना जाएगा और वे कानूनी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगी। उनके इस कड़े रुख के बाद जिला परिषद के अंदर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।

पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोप

यह पहली बार नहीं है जब अध्यक्ष ने परिषद के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। इससे पहले भी उन्होंने भ्रष्टाचार और मनमानी का आरोप लगाते हुए बड़ा खुलासा करने की बात कही थी। उन्होंने विशेष रूप से जिला अभियंता और लिपिकों की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे, हालांकि उस समय मामला ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाया था।

 उपाध्यक्ष ने कर दी थी तालाबंदी

विवाद सिर्फ अध्यक्ष तक सीमित नहीं रहा। जिला परिषद की उपाध्यक्ष सरिता देवी ने भी अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और जानकारी छिपाने का आरोप लगाते हुए अपने समर्थकों के साथ कार्यालय में तालाबंदी कर दी थी। उनका आरोप था कि महत्वपूर्ण फैसलों और फाइलों की जानकारी उन्हें नहीं दी जाती, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

प्रशासन की नजर, समाधान की कोशिश

इस पूरे विवाद के बीच जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। उपायुक्त ने आम लोगों के आवेदनों के त्वरित निष्पादन के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं, ताकि जनता का काम प्रभावित न हो।

क्या बढ़ेगा विवाद या निकलेगा समाधान?

लगातार बढ़ते विवाद से यह साफ है कि धनबाद जिला परिषद में प्रशासनिक समन्वय की कमी है। अब देखना होगा कि यह मामला बातचीत से सुलझता है या कानूनी लड़ाई तक पहुंचता है। फिलहाल, इस टकराव ने जिला परिषद की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।