धनबाद में कोयला माफिया के खिलाफ आवाज उठाना पड़ा भारी! रंजीत सिंह ने जताई हत्या की साजिश की अशंका

धनबाद में अवैध कोयला खनन के खिलाफ आवाज उठाने वाले रंजीत सिंह ने अपनी जान को खतरा बताया है। डीजीपी और प्रशासन से सुरक्षा की मांग, माफिया पर साजिश का आरोप।

धनबाद में कोयला माफिया के खिलाफ आवाज उठाना पड़ा भारी! रंजीत सिंह ने जताई हत्या की साजिश की अशंका
ग्रामीण एकता मंच के रंजीत सिंह।
  • रंजीत सिंह ने अवैध खनन के खिलाफ करने से जान का खतरा 
  • डीजीपी, मुख्य सचिव से सुरक्षा की गुहार लगाई

धनबाद (Threesocieties.com Desk): झारखंड के धनबाद में अवैध कोयला खनन और कोयला चोरी के खिलाफ लगातार आवाज उठाने वाले ग्रामीण एकता मंच के केंद्रीय अध्यक्ष रंजीत सिंह उर्फ बबलू सिंह ने अपनी जान को गंभीर खतरा बताया है। उन्होंने राज्य के डीजीपी, मुख्य सचिव, धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन और एसएसपी प्रभात कुमार को लिखित आवेदन देकर सुरक्षा की गुहार लगाई है।

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रंजीत सिंह का कहना है कि अवैध खनन, आउटसोर्सिंग कंपनियों की मनमानी और पर्यावरण प्रदूषण के खिलाफ उनकी सक्रियता के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि खनन माफिया उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रच रहे हैं।

फोन की निगरानी और गतिविधियों पर नजर का आरोप

रंजीत सिंह ने अपने आवेदन में दावा किया है कि उनके फोन कॉल्स की रेकी की जा रही है और उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से ही कोयला तस्कर अवैध खनन को अंजाम दे रहे हैं।

हाई कोर्ट में दायर कई जनहित याचिकाओं से बढ़ी हलचल

रंजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने अवैध खनन, कोयला चोरी, पेड़ कटाई, प्रदूषण और कांटा घर पर रंगदारी जैसे मामलों को लेकर झारखंड हाई कोर्ट में अब तक पांच जनहित याचिकाएं दायर की हैं। इन मामलों में कोर्ट ने कई बार सख्त रुख अपनाया है, जिससे अवैध कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। हाल ही में एक सुनवाई के दौरान भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल, उपायुक्त आदित्य रंजन और एसपी प्रभात कुमार सहित कई अधिकारियों को अदालत में पेश होना पड़ा था।

 “कभी भी हो सकता है हमला”

रंजीत सिंह का आरोप है कि खनन माफिया और आउटसोर्सिंग कंपनियों से जुड़े लोग उन्हें झूठे मामलों में फंसाने या उन पर हमला कराने की साजिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी भी नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने धनबाद में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि एक सामाजिक कार्यकर्ता, जो अदालत में जनहित याचिकाएं दायर कर रहा है, खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है, तो यह प्रशासन के लिए चिंता का विषय है।

 सुरक्षा नहीं मिली तो फिर कोर्ट का दरवाजा

रंजीत सिंह ने साफ कहा है कि यदि जिला प्रशासन उन्हें सुरक्षा देने में असमर्थ रहता है, तो वे एक बार फिर न्यायालय की शरण लेंगे।